सर्व-कार्य-सिद्धि जञ्जीरा मन्त्र “या उस्ताद बैठो पास, काम आवै रास। ला इलाही लिल्ला हजरत वीर कौशल्या वीर, आज मज रे जालिम शुभ करम दिन करै जञ्जीर। जञ्जीर से कौन-कौन चले? बावन वीर चलें, छप्पन कलवा चलें। चौंसठ योगिनी चलें, नब्बे नारसिंह चलें। देव चलें, दानव चलें। पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा… Read More


ग्रह-बाधा-शान्ति मन्त्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं दह दह।” विधि- सोम-प्रदोष से ७ दिन तक, माल-पुआ व कस्तुरी से उक्त मन्त्र से १०८ आहुतियाँ दें। इससे सभी प्रकार की ग्रह-बाधाएँ नष्ट होती है।… Read More


शाबर मन्त्रों को सिद्ध कैसे करें ? १॰ शाबर-मन्त्रों की साधना’ के पूर्व निम्न-लिखित ‘सर्वार्थ-साधक-मन्त्र’ को २१ बार जप लेना चाहिए- “गुरु सठ गुरु सठ गुरु हैं वीर, गुरु साहब सुमरौं बड़ी भाँत। सिङ्गी टोरीं बन कहौं, मन नाऊँ करतार। सकल गुरु की हर भजे, घट्टा पकर उठ जाग, चेत सम्भार श्री परम-हंस।” २॰ इसके… Read More


श्रीकृष्ण कीलक एक बार माता पार्वती कृष्ण बनी तथा श्री शिवजी माँ राधा बने। उन्हीं पार्वती रूप कृष्ण की उपासना हेतु उक्त ‘कृष्ण-कीलक’ की रचना हुई।… Read More


भाग्योदय हेतु श्रीमहा-लक्ष्मी-साधना भाग्योदय हेतु श्रीमहा-लक्ष्मी की तीन मास की सरल, व्यय रहित साधना है। यह साधना कभी भी ब्राह्म मुहूर्त्त पर प्रारम्भ की जा सकती है। ‘दीपावली’ जैसे महापर्व पर यदि यह प्रारम्भ की जाए, तो अति उत्तम। ‘साधना’ हेतु सर्व-प्रथम स्नान आदि के बाद यथा-शक्ति (कम-से-कम १०८ बार) “ॐ ह्रीं सूर्याय नमः” मन्त्र… Read More


ग्रह, आर्थिक, विवाह-बाधा-निवारण प्रयोग १॰ सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति-पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है एवं कामना-पुर्ति होती है।… Read More


सुख-शान्ति-दायक महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपञ्च-दश-ऋचस्य श्री-सूक्तस्य श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषयः, अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दांसि, श्रीमहालक्ष्मी देवताः, श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषिभ्यो नमः शिरसि। अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दोभ्यो नमः मुखे। श्रीमहालक्ष्मी देवताय नमः हृदि। श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे।… Read More


सर्व-संकटहारी-प्रयोग “सर्वा बाधासु, वेदनाभ्यर्दितोऽपि। स्मरन् ममैच्चरितं, नरो मुच्यते संकटात्।। ॐ नमः शिवाय।” उपर्युक्त मन्त्र से ‘सप्त-श्लोकी दुर्गा’  का एकादश अर्थात् ११ बार सम्पुट-पाठ करने से सब प्रकार के संकटों से छुटकारा मिलता है। प्रत्येक ‘पाठ’ करने के बाद उक्त ‘सम्पुट-मन्त्र’ के अन्त में “स्वाहा” जोड़कर एकादश बार निम्न-लिखित वस्तुओं से हवन करेः-… Read More


लक्ष्मी ध्यान (१) सहस्त्रदलपद्मस्य कर्णिकावासिनीं पराम्। शरत्पार्वणकोटीन्दुप्रभाजुष्टवराम्बराम्।। स्वतेजसा प्रज्वलन्तीं सुखदृश्यां मनोहराम्। प्रतप्तकाञ्चननिभां शोभां मूर्तिमतीं सतीम्।। रत्नभूषणभूषाढ्यां शाभितां पीतवाससा। ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां शश्वत्सुस्थिरयौवनाम्।। सर्वसम्पत्प्रदात्रीं च महालक्ष्मीं भजे शुभाम्। (ब्रह्मवैवर्त्त पुराण।प्रकृतिखण्ड।३९।१०-१२॰५)… Read More


नव-नाथ-स्मरण “आदि-नाथ ओ स्वरुप, उदय-नाथ उमा-महि-रुप। जल-रुपी ब्रह्मा सत-नाथ, रवि-रुप विष्णु सन्तोष-नाथ। हस्ती-रुप गनेश भतीजै, ताकु कन्थड-नाथ कही जै। माया-रुपी मछिन्दर-नाथ, चन्द-रुप चौरङ्गी-नाथ। शेष-रुप अचम्भे-नाथ, वायु-रुपी गुरु गोरख-नाथ। घट-घट-व्यापक घट का राव, अमी महा-रस स्त्रवती खाव। ॐ नमो नव-नाथ-गण, चौरासी गोमेश। आदि-नाथ आदि-पुरुष, शिव गोरख आदेश। ॐ श्री नव-नाथाय नमः।।”… Read More