व्यपोहन स्तव लिंगपुराण के ८२वें अध्याय में एक महत्त्वपूर्ण स्तव आया है, जिसका नाम है –“व्यपोहनस्तव” । व्यपोहन शब्द में ‘वि’ उपसर्ग है, जिसका अर्थ है ‘विशेषरुप से’ । ‘अपोहन’ का अर्थ है, ‘दूर हटाना या छिपाना’ । सूतजी ऋषियों से कहते हैं कि मैं अब आप लोगों को एक ऐसे स्तव (स्तोत्र, स्तुति) –… Read More


श्रीबगला त्रैलोक्य-विजय कवचम् ।। श्री भैरव उवाचः ।। श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि स्व-रहस्यं च कामदम् । श्रुत्वा गोप्यं गुप्ततमं कुरु गुप्तं सुरेश्वरि ।। १ ।। कवचं बगलामुख्याः सकलेष्टप्रदं कलौ । तत्सर्वस्वं परं गुह्यं गुप्तं च शरजन्मना ।। २ ।। त्रैलोक्य-विजयं नाम कवचेशं मनोरमम् । मन्त्र-गर्भं ब्रह्ममयं सर्व-विद्या विनायकम् ।। ३ ।। रहस्यं परमं ज्ञेयं साक्षाद्-मृतरुपकम् ।… Read More


बगला दशक (प्रस्तुत ‘बगला-दशक’ स्तोत्र में पाँच मन्त्र बगला विद्या के सुख-साध्य और सु-शीघ्र फल-दायी हैं । इस मन्त्रों में एक बगला के ‘मन्दार’ मन्त्र नाम से प्रसिद्ध है । उक्त स्तोत्र में मन्त्र तो पाँच हैं, पर उनके विषय में मन्त्रोद्धार तथा फल-समेत दस पद्य होने के कारण ‘बगला-दशक’ नाम दिया है ।) सुवर्णाभरणां… Read More


आम्नाय भेद क्रम दीक्षा बगलामुखी आराधना क्रम-पूर्वक करने से लाभ मिलता है । क्रम भिन्न कर एकदम उच्च प्रयोगों को करने से बाधा व हानि होती है । पहले एकाक्षरी, चतुरक्षरी, अष्टाक्षरी मंत्र जप के बाद ३६ अक्षरात्मक मंत्र ग्रहण करना चाहिये । साथ में गणेश, वटुक, मृत्युंजय, दक्षिणकालिका, सौभाग्य-विद्या, हृदय, शताक्षर, बगलापञ्चास्त्र, कुल्लुका, ब्रह्मास्त्र… Read More


रक्षा-कारी मन्त्र सर्प से रक्षा हेतु मन्त्रः कहीं भी अचानक सर्प देखने पर निम्न-लिखित मन्त्र का उच्चारण करने से सर्प से रक्षा होती है। यदि पूरा श्लोक याद न हो, तो केवल “आस्तिक”- नाम उच्चारण करे। यदि घर में अचानक साँप निकलते हों, तो घर की दीवाल पर भी घी और सिन्दूर से यह श्लोक… Read More


महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपञ्च-दश-ऋचस्य श्री-सूक्तस्य श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषयः, अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दांसि, श्रीमहा-लक्ष्मी देवताः, श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगः।… Read More


पितृ-आकर्षण मन्त्र (कभी-कभी पितृ-पीड़ा से मनुष्य का जीवन दुःख-मय हो जाता है। निर्धारित कार्यों में बाधा, विफलता की प्राप्ति होती है। आकस्मिक दुर्घटनाएँ घटती है। पूरा कुटुम्ब दुःखी रहता है। ऐसी दशा में निम्नलिखित ‘प्रयोग’ करे। यह ‘प्रयोग’ निर्दोष है। पितृ-पीड़ा हो या न हो, सभी प्रकार की बाधाएँ नष्ट हो जाती है और सुख-शान्ति… Read More


पितृ-स्तोत्रम् रूचिरूवाच नमस्येऽहं पितृन् श्राद्धे ये वसन्त्यधिदेवताः । देवैरपि हि तर्प्यंते ये च श्राद्धैः स्वधोत्तरैः ।।1।। नमस्येऽहं पितृन्स्वर्गे ये तर्प्यन्ते महर्षिभिः । श्राद्धेर्मनोमयैर्भक्तया भुक्ति-मुक्तिमभीप्सुभिः ।।2।। नमस्येऽहं पितृन्स्वर्गे सिद्धाः संतर्पयन्ति यान् । श्राद्धेषु दिव्यैः सकलै रूपहारैरनुत्तमैः ।।3।।… Read More


स्वास्थ्य के लिये टोटके 1॰ सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें। उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती… Read More