देवीवाहन (सिंह) ध्यानम् ।। देवीवाहन (सिंह) ध्यानम् ।। ग्रीवायां मधू सूदनोऽस्य शिरसि श्री नीलकण्ठः स्थितः, श्री देवी गिरिजा ललाट फलके वक्षः स्थले शारदा । षड्वक्त्रो मणिबन्ध संधिषु तथा नागास्तु पार्श्वस्थिताः, कर्णौयस्य तु चाश्विनौ स भगवान-सिंहो ममास्त्विष्टदः ।।१… Read More
श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ विधि श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ विधि 1 पूजनकर्ता स्नान करके, आसन शुद्धि की क्रिया सम्पन्न करके, शुद्ध आसन पर बैठ जाएँ, साथ में शुद्ध जल, पूजन सामग्री और श्री-दुर्गा-सप्तशती की पुस्तक । इन्हें अपने सामने काष्ठ आदि के शुद्ध आसन पर विराजमान कर दें। माथे पर अपनी पसंद के अनुसार भस्म, चंदन अथवा रोली लगा लें, शिखा बाँध… Read More
सर्वसिद्धिदायक साधना – श्रीउच्छिष्ट-गणेश कवच सर्व-सिद्धि-दायक साधना ।। श्रीउच्छिष्ट-गणेश कवच ।। ऋषिर्मे गणकः पातु, शिरसि च निरन्तरम् । त्राहि मां देवी गायत्री, छन्दः ऋषिः सदा मुखे ।।१ हृदये पातु मां नित्यमुच्छिष्ट-गण-देवता । गुह्ये रक्षतु तद्-बीजं, स्वाहा शक्तिश्च पादयो ।।२ काम-कीलकं सर्वांगे, विनियोगश्च सर्वदा । पार्श्व-द्वये सदा पातु, स्व-शक्तिं गण-नायकः ।।३ शिखायां पातु तद्-बीजं, भ्रू-मध्ये तार-बीजकं । हस्ति-वक्त्रश्च शिरसि, लम्बोदरो ललाटके… Read More
कुमारी पूजा कुमारी पूजा ‘कुमारी-पूजा’ से भगवती सद्यः प्रसन्न होती है। कुमारी-पूजा में जाति-भेद नहीं माना गया है। चारों वर्णों की कुमारियों की पूजा, जिनका फल भी भिन्न-भिन्न है, शास्त्र द्वारा निर्दिष्ट है। ‘मेरु-तन्त्र’ में लिखा है कि ‘ब्राह्मण-कुमारी’ के पूजन से सर्व-इष्ट, ‘क्षत्रिय-कुमारी’ के पूजन से यश, ‘वैश्य-कुमारी’ के पूजन से धन तथा ‘शूद्र-कुमारी’ के पूजन… Read More
आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र घटित चन्डी-विधानम् ‘आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र’ घटित चन्डी-विधानम् सम्पूर्ण कामनाओं की यथा-शीघ्र सिद्धि के लिए मैथिलों द्वारा कही हुई चण्डी-पाठ-घटित ‘आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र’ के पाठ की विधि आचमन, प्राणायाम, संकल्प (देश-काल-निर्देश) के उपरान्त – ‘अमुक-प्रवरान्वित अमुक-गोत्रोत्पन्नामुक-शर्मणः अमुक-वेदान्तर्गत अमुक-शाखाध्यायी मम (यजमानस्य) शीघ्रं अमुक-दुस्तर-संकट-निवृत्त्यर्थं सप्तशती-माला-मन्त्रस्य क्रमेण प्रथमादि-त्रयोदशाध्यायान्ते क्रियमाण आपदुद्धारक-बटुक-भैरवाष्टोत्तर-शत-नाम-मात्रावर्तन-घटित-अमुक-संख्यकावर्तनमहं करिष्ये।’ उक्त प्रकार ‘संकल्प’ में योजना करे। इसके बाद पहले विघ्नों के निवारण के लिए… Read More
रुद्र-यामलोक्त श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तवम् रुद्र-यामलोक्त श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तवम् विनियोगः- अस्य श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तोत्रस्य श्रीमहा-मार्तण्ड-भैरवः ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, श्रीपराऽम्बिका दुर्गा देवता, दुं बीजं, स्वाहा शक्तिः, क्लीं कीलकं, सर्वार्थ-साधने पाठे विनियोगः। ध्यान्- हेम-प्रख्यामिन्दु-खण्डात्त-मौलिं, शंखाभीष्टाभीति-हस्तां त्रिनेत्राम्। हेमाब्जस्थां पीत-वस्त्रां प्रसन्नां, देवीं दुर्गां दिव्य-रुपां नमामि ।।… Read More
दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो भगवती पुर-पुर देशनि पुराधिपतये सर्व जगद-भयंकरिच्छीमै ॐ रांग र रीं क्ला वालो सल्पञ्च काम-बाण सर्वश्री समस्त नर-नारी-गणं मम वशमानय मानय स्वाहा ।”… Read More
श्री दुर्गा पूजन और श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ का सही क्रम श्री दुर्गा पूजन और श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ का सही क्रम नवरात्र में माता दुर्गा की प्रसन्नता के लिए श्रीदुर्गा-सप्तशती का पाठ करने का भी विधान है। कतिपय ध्यातव्य नियम इस प्रकार हैं – १॰ प्रथम दिन घट-स्थापना की जाती है और उसके बाद ही देवी के स्वरुप एवं अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी… Read More
श्रीदुर्गा-सप्तशती-पाठ के विविध क्रम श्रीदुर्गा-सप्तशती-पाठ के विविध क्रम – ‘श्रीदुर्गा-सप्तशती’ के स्वाध्याय अर्थात् पाठ की कई विधियाँ है। ‘मरीच-कल्प’ में लिखा है कि ‘सप्तशती’ का पाठ करने के पहले ‘रात्रि-सूक्त’ का पाठ करना चाहिए और जब उसका पाठ कर चुके, तब अन्त में ‘देवी-सूक्त’ का पाठ करे। – दूसरा मत यह है कि ‘सप्तशती’ का पाठ उसके अंगों के… Read More
सर्वोपयोगी अनुभूत साधना सर्वोपयोगी अनुभूत साधना इस ‘साधना-क्रम’ में तीन उपासनाएँ है- (१) श्री गायत्री उपासना, (२) श्री दुर्गोपासना एवं (३) श्री बटुक-भैरवोपासना। प्रतिदिन प्रातःकाल और रात्रि-भोजन के पूर्व, निजी आसन पर बैठकर नियमित रुप से निश्वित समय पर इस साधना कप करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं एवं सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।… Read More