गृह बाधा शान्ति शाबर मन्त्र यह मंत्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में साधक की रक्षा करता है । कोई भी व्यक्ति इसे सिद्ध करके स्वयं को सुरक्षित कर सकता है । जिसने इसे सिद्ध कर लिया हो, ऐसा व्यक्ति कहीं भी जाए, उसको किसी प्रकार की शारीरिक हानि की आशंका नहीं रहेगी । केवल आततायी… Read More


कार्य-सिद्ध भैरव शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ-कार ! ॐ गुरु भु-मसान, ॐ गुरु सत्य गुरु, सत्य नाम काल भैरव कामरु जटा चार पहर खोले चोपटा, बैठे नगर में सुमरो तोय दृष्टि बाँध दे सबकी । मोय हनुमान बसे हथेली । भैरव बसे कपाल । नरसिंह जी की मोहिनी मोहे सकल… Read More


साधना सफलता का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ इक ओंकार, सत नाम करता पुरुष निर्मै निर्वैर अकाल मूर्ति अजूनि सैभं गुर प्रसादि जप आदि सच, जुगादि सच है भी सच, नानक होसी भी सच – मन की जै जहाँ लागे अख, तहाँ-तहाँ सत नाम की रख । चिन्तामणि कल्पतरु आए कामधेनु को संग ले आए, आए… Read More


श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र प्रस्तुत मन्त्रात्मक-श्रीचण्डिका-हृदय-स्तोत्र का सविधि तीनों सन्ध्याओं में पाठ करने से पाठ करने वाले व्यक्ति की सभी कामनाएँ पूर्ण होती है । प्रति सन्ध्या-काल में इस स्तोत्र का पाठ २१-२१ बार करना चाहिए । केवल पहले पाठ में विनियोग से ध्यान तक की प्रारम्भिक क्रिया और अन्तिम पाठ में फल-श्रुति का पाठ करना चाहिए ।… Read More


श्रीचामुण्डा-कवच-स्तोत्रम् विनियोगः- ॐ अस्य श्रीदेवी-चामुण्डा-कवच-स्तोत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीचामुण्डा देवता, ऐं बीजं, ह्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकं, श्रीचण्डिका-चामुण्डा-प्रीत्यर्थे पाठे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्रीब्रह्मर्षये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीचामुण्डा देवतायै नमः हृदि, ऐं बीजाय नमः गुह्ये, ह्रीं शक्तये नमः पादयो, क्लीं कीलकाय नमः नाभौ, श्रीचण्डिका-चामुण्डा-प्रीत्यर्थे पाठे विनियोगाय नमः सर्वांगे। “ऐं” – बीज से षडङ्ग-न्यास कर… Read More


ब्रह्माण्डविजयं नाम दुर्गाकवचम् नारायण उवाच श्रृणु नारद वक्ष्यामि दुर्गायाः कवचं शुभम् । श्रीकृष्णेनैव यद् दत्तं गोलोके ब्रह्मणे पुरा ।।१ ब्रह्मा त्रिपुर-संग्रामे शंकराय ददौ पुरा । जघान त्रिपुरं रुद्रो यद् धृत्वा भक्तिपूर्वकम् ।।२ हरो ददौ गौतमाय पद्माक्षाय च गौतमः । यतो बभूव पद्माक्षः सप्तद्वीपेश्वरो जयी ।।३ यद् धृत्वा पठनाद् ब्रह्मा ज्ञानवाञ्छक्तिमान् भुवि । शिवो बभूव सर्वज्ञो… Read More


प्रकृतेर्ब्रह्माण्ड-मोहन-कवचम् ।। नारद उवाच ।। भगवन् सर्वधर्मज्ञ सर्वज्ञानविशारद । ब्रह्माण्डमोहनं नाम प्रकृतेः कवचं वद ।।१ ।। नारायण उवाच ।। श्रृणु वक्ष्यामि हे वत्स कवचं च सुदुर्लभम् । श्रीकृष्णेनैव कथितं कृपया ब्रह्मणे पुरा ।।२… Read More


श्रीमद्-देवी-भगवत की ज्ञान-दायिनी सिद्ध देवी-स्तुति नमो देव्यै प्रकृत्यै च, विधात्र्यै सततं नमः । कल्याण्यै कामदायै च, वृद्ध्यै सिद्ध्यै नमो नमः ।।१ सच्चिदानन्द-रुपिण्यै, संसारारणये नमः । पञ्च-कृत्य-विधात्र्यै ते, भुवनेश्यै नमो नमः ।।२ सर्वाधिष्ठान-रुपायै, कूटस्थायै नमो नमः । अर्ध-मात्रार्थ-भूतायै, हृल्लेखायै नमो नमः ।।३… Read More


‘श्रीदुर्गे स्मृतेति’ – मन्त्र की साधना सभी प्रकार के कष्ट-निवारण, आर्थिक-संकट-निवारण हेतुः शुद्ध होकर आसन पर बैठे। आसन-शोधन, आत्म-शोधन की प्रारम्भिक क्रियाएँ कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्रीदुर्गे स्मृतेति मन्त्रस्य विष्णुः ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहा-लक्ष्मी देवता, शाकम्भरी शक्तिः, वायु कीलकं, सकल-संकेत-कष्ट-दारिद्र्य-परिहारार्थं जपे विनियोगः।… Read More


सिद्धि-चण्डी महा-विद्या सहस्राक्षर मन्त्र वन्दे परागम-विद्यां, सिद्धि-चण्डीं सङ्गिताम् । महा-सप्तशती-मन्त्र-स्वरुपां सर्व-सिद्धिदाम् ।। विनियोगः- ॐ अस्य सर्व-विज्ञान-महा-राज्ञी-सप्तशती रहस्याति-रहस्य-मयी-परा-शक्ति श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डिका-सहस्राक्षरी-महा-विद्या-मन्त्रस्य श्रीमार्कण्डेय-सुमेधा ऋषि, गायत्र्यादि नाना-विधानि छन्दांसि, नव-कोटि-शक्ति-युक्ता-श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी देवता, श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी-प्रसादादखिलेष्टार्थे जपे विनियोगः ।… Read More