।। श्री क्रम के कुलगुरु ।। श्रीकुल साधकों के कुल गुरु इस प्रकार है- दिव्यौघगुरु – १. परप्रकाशानंदनाथ २. परशिवानंदनाथ ३. पराशक्त्यम्ब ४. कौलेश्वरानंदनाथ ५. शुक्लदेव्यम्ब ६. कुलेश्वरानंदनाथ ७. कामेश्वर्यम्बा ।… Read More


।। श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादिगुरुत्रयं गणपतिं पीठत्रयं भैरवं, सिद्धौघं वटुकत्रयं पदयुगं दूतीक्रमं मण्डलम् । वीरानष्टचतुकषष्टिनवकं वीरावलीपञ्चकं, श्रीमन्मालिनि मन्त्रराजसहितं वन्दे गुरोर्मण्डलम् ।। (उपर्युक्त ‘ श्रीनाथादिगुरुत्रय० ‘ गुरुमण्डल के अर्चन का रहस्यमय ‘ मन्त्र ‘ है ।)… Read More


विविध कीलन मन्त्रः- “भय कीलूँ, भैसासुर कीलूँ । कीलूँ अपनी काया । जागता मसान कीलूँ, जिसकी बैठूँ छाया । बलिहारी मुहम्मदा बीर की, कीलूँ पवन बावरी, मन चाहे जहाँ डोलूँ, दुष्ट की मुष्ट कीलूँ । मेरे कीले न कीलै, तो अपनी माँ के सङ्ग हराम करे, दुहाई मुहम्मदा वीर की ।।”… Read More


शाबर-मन्त्र-वल्लरी भूत-प्रेतादि बाँधना तथा झाड़ना मन्त्रः- “बाद करत बादी चले, नौ सौ ढाल मढाय । जाते मारै बादिया औ करै बदिनियाँ राँड़ ।। पाँच बरस का बालक मारे, गर्भै करै अहार । देव को बाँध, देवी को बाँध, भूत को बाँध, चुड़ैल को बाँध ।। किए-कराए को बाँध, गली-घाट को बाँध । कब्जे मे कर… Read More


शाबर-मन्त्र-वल्लरी भूत-प्रेत पकड़ना तथा झाड़ना मन्त्रः- “जभी बुलाए, तब न आए और आए आधी रात, लौंग सुपाड़ी नारियल । बीरा लेत अकास, धाय बीर आकास जाय और धाय बीर पाताल, धाय बीर चोटी गहै, भूत पकड़, देव पकड़, देवी पकड़, चड़ैल पकड़, किए कराए को पकड़, जादू – टोना को पकड़, मरही मसान को पकड़,… Read More


सिर-दर्द-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “लङ्का में बैठ के माथ हिलावै हनुमन्त, सो देखि के राक्षस-गण पराय तुरन्त । बैठी सीता देवी अशोक वन में, देखि हनुमान को आनन्द भई मन में । गई उर विषाद, देवी स्थिर दरशाय । अमुक के नहिं कछु पीर, नहिं कछु भार । आदेश कामाख्या हरिदासी चण्डी की दुहाई ।।”… Read More


देह बाँधना मन्त्रः- “धार राखै बारका, सीस राखै सोखा बीर । नाड़ी राखै नाहर सिंह, कपाल राखै, जोगनी । आगा राखै इन्द्र सिंह, पाछा राखै भीम सिंह । बारा कोस अगाड़ी राख, बारा कोस पिछाड़ी राख । तू जो कहै गौरा, मेरा प्रण न राखै, तो गौरा पारबती महा-देव की आन ।।”… Read More


अखाड़ा खोलना मन्त्रः- “उल्टा घोड़ा, उल्टा पीर । उल्टा चले मुहमदा पीर । मैं कहूं अखाड़े को खोल, न खोले तो बीबी फातिमा की आन, सुअर की चर्सा पर नमाज पढ़ै ।।”… Read More


शाबर-मन्त्र-वल्लरी कुश्ती जीतना तथा अखाड़ा बाँधना मन्त्रः- “ॐ महाबीर रणधीर बाँके पहलवान, आकाश बाँध, पाताल बाँध, अखाड़े के चारों कोने बाँध, दुश्मन का सीना बाँध, हाथ बाँध, पांव बाँध, निगाह बाँध, इतने बाँध के जेर न करे, तो माता अञ्जनी का दूध हराम करे, राजा रामचन्द्र जी की दुहाई ।।”… Read More


सुरक्षा-कारक मन्त्र मन्त्रः- “इर्द-गिर्द या अली चौफिर्द मुस्तफा । मदद मेरी को पहुंचिए, पञच-पीर मूर्त्तजा । लाइल्लाह का कोट, इल्लाह की खाई । हजरत मुहम्मद रसूल को चौकी, अल्लाह की दुहाई ।।”… Read More