कालभैरव ( कालभैरवाष्टमी ) कालभैरव ( कालभैरवाष्टमी ) ।। ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:।। भगवान शंकर के अवतारों में भैरव का अपना एक विशिष्ट महत्व है। तांत्रिक पद्धति में भैरव शब्द की निरूक्ति उनका विराट रूप प्रतिबिम्बित करती हैं। वामकेश्वर तंत्र की योगिनी-हदय-दीपिका टीका में अमृतानंद नाथ कहते हैं- ‘विश्वस्य भरणाद् रमणाद् वमनात्… Read More
धनप्राप्ति यंत्र धनप्राप्ति यंत्र इसकी साधना के लिए बैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष तथा माघ मास सबसे उत्तम है। तिथियाँ – द्वितीया, पंचमी, सप्तमी, नवमी, द्वादशी तथा त्रयोदशी श्रेष्ठ हैं। वार – बुधवार, बृहस्पति, शुक्रवार सबसे अच्छे हैं। नक्षत्र – रोहिणी, पुनर्वस, हस्त, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, उत्तराफाल्गुनी, तथा रेवती शुभ है। स्थान – नदी तट, देवी मन्दिर, पहाड़ की… Read More
सर्वजन मोहन पुनर्नवा वशीकरण मन्त्र सर्वजन मोहन पुनर्नवा वशीकरण मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो सर्व जीव वंशराय कुरु-कुरु स्वाहा।”… Read More
सिन्दूर मोहन शाबर मन्त्र सिन्दूर मोहन शाबर मन्त्र विधि – सर्वप्रथम एक चाँदी की डिब्बी में “कामिया सिन्दूर” लेकर छत पर या किसी खुले स्थान में पूर्णमासी की सारी रात्रि में छोड़ दें। यह इस प्रकार से डिब्बी को खुली रखें कि इस पर सारी रात चाँदनी पड़ती रहें । सूर्योदय से पूर्व ही इसे उठा लायें और सिरहाने… Read More
वीर सिद्धि शाबर मन्त्र वीर सिद्धि शाबर मन्त्र विधिः- किसी भी शनिवार की रात्रि से सरसों के तेल का दीपक जलाकर इस मंत्र को दक्षिण की ओर मुख करके जपा जाता है। लोबान जलाकर रखें और इस मंत्र का प्रति रात 1008 बार जाप करें। यह प्रयोग 41 रात्रि तक करें तो सिद्धि मिलती है। मंत्र सिद्ध हो जाने… Read More
मंत्रात्मक गायत्री कवच ॥ मंत्रात्मक गायत्री कवच ॥ देव देव महादेव! संसारार्णव तारक ! गायत्री कवचं देव ! कृपया कथय प्रभो । ॥ महादेव उवाच ॥ मूलाधारेषु या नित्या कुण्डली तत्त्व-रूपिणी । सूक्ष्माति सूक्ष्मा परमा विसतन्तु-स्वरूपिणी ॥ विद्युत-पुञ्ज-प्रतीकाशा कुण्डलाकृति-रूपिणी । परम-ब्रह्म गृहिणी पञ्चाशद् वर्ण-रूपिणी ॥ शिवस्य नर्तकी नित्या परम् ब्रह्म-पूजिता । ब्रह्मणः सैव गायत्री सच्चिदानन्दरूपिणी ॥ तद् भ्रमावर्त्तवातोऽयं… Read More
श्री गायत्री कवचम् ॥ श्री गायत्री कवचम् ॥ ॥याज्ञवल्क्य उवाचः॥ स्वामिन् सर्व-जगन्नाथ संशयोऽस्ति महान्मम् । चतुः षष्टि-कलानां च पातकानां तद्वद् ॥१ ॥ मुच्यते केन पुण्येन ब्रहा-रूपं कथं भवेत् । देहश्च देवता-रूपं मन्त्र-रूपं विशेषतः ॥२ ॥ क्रमतः श्रोतुमिच्छामि कवचं विधि-पूर्वकम् । ॥ब्रह्मोवाचः॥ विनियोगः- “ॐ अस्य श्री गायत्री-कवचस्य ब्रह्म-विष्णु-रुद्रा ऋषयः ऋग्यजुः सामाथर्वाणिच्छन्दांसि पर-ब्रह्म-स्वरूपिणी गायत्री देवता भूः बीजम् भुवः शक्तिः स्वः… Read More
व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र विधिः- व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व यदि इस मंत्र का 108 बार उच्चारण करके दुकान खोलें और व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करें तो उस दिन ब्रिकी बढ़ती है और किसी प्रकार का कोई उपद्रव या परेशानी नहीं आती। इस मंत्र को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं… Read More
शाबर तंत्र साधना से पूर्व आवश्यक निर्देश शाबर तंत्र साधना से पूर्व आवश्यक निर्देश किसी भी साधक को कोई भी तांत्रिक प्रयोग अथवा तंत्र-मंत्र-यंत्र साधना करने से पूर्व अपने इष्टदेव का स्मरण तथा अपने पूज्य गुरूदेव का आशीर्वाद व मार्गदर्शन तथा निम्नांकित आवश्यक निर्देशों एवं सावधानियों का पालन करना अत्यावश्यक होता है- * मंत्रतंत्र का जप अंग-शुद्धि, सरलीकरण एवं विधि-विधान पूर्वक करना… Read More
गोरक्षनाथाष्टकम् || गोरक्षनाथाष्टकम् || (हंसचित्रम्) योगीन्द्राप्त-हितोपदेश-विशदा देशार्थ-तत्वं शिरो। ज्ञानं कर्म च दक्षिणोत्तर-गता, वक्षोभ्यपक्षा-वसौ। आत्मा योगवरः स्वरूप-विषया पुच्छे प्रतिष्ठा-चितो । माया यस्य जगत्वयं विजयते हंसः स नाथो विभुः ॥ 1॥ द्वैतं दक्षिणपक्ष एष विहितोऽद्वैतं विविच्योत्तरः पक्षो योग-शिरो विशेष-परमा द्वैतं तदात्मा महान् । पुच्छं केवल-भाव एक विदुषां, हृत्पद्मनीड मह, न्माया यस्य जगत्त्रय विजयते, हंसः स नाथोविभु ॥ 2… Read More