सर्व-कार्य-सिद्धि के लिये “ॐ नमो भगवते सर्वरक्षकाय ह्रीं ॐ मां रक्ष रक्ष सर्वसौभाग्यभाजनं मां कुरु कुरु स्वाहा।” इस मन्त्र का हरिद्रा अथवा तुलसी की माला पर प्रतिदिन १०८ बार जप करना चाहिये और जप के अनन्तर रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड के निम्नलिखित ग्यारहवें दोहे के बाद वाली चौपाई से लेकर उत्तरकाण्ड के चौदहवें दोहे तक पाठ… Read More


रोग, उपद्रव की शान्ति हेतु सप्तशती-प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्री ‘शरणागत-दीनार्त’ इति मन्त्रस्य श्रीवह्नि-पुरोगमा-ब्रह्मादयो सेन्द्रा सुराः ऋषयः, श्रीमहा-काली देवता, ग्लौं बीजं, श्रीछाया शक्तिः, श्रीकाल्यादि-दश-महा-विद्याः, तमो गुण-प्रधाना त्रिगुणाः, श्रोतृ-प्रधान-पञ्च-ज्ञानेन्द्रियाणि, शान्तः रसः, कर-प्रधाना पञ्च-कर्मेन्द्रियाणि, स्तवन स्वरः, पञ्चतत्त्वानि, पञ्च कलाः, ऐं ह्रीं श्रीं उत्कीलनं, स्तवनं मुद्रा मम क्षेम्-स्थैर्यायुरोग्याभि-वृद्धयर्थं श्रीजगदम्बा-योग-माया-भगवती-दुर्गा-प्रसाद-सिद्धयर्थं च नमो-युत-प्रणव-वाग्-वीज-स्व-वीज-लोम-विलोम-पुटितोक्त-मन्त्र-जपे विनियोगः ।… Read More


रोग नाशक देवी मन्त्र “ॐ उं उमा-देवीभ्यां नमः” ‘Om um uma-devibhyaM namah’ इस मन्त्र से मस्तक-शूल (headache) तथा मज्जा-तन्तुओं (Nerve Fibres) की समस्त विकृतियाँ दूर होती है – ‘पागल-पन'(Insanity, Frenzy, Psychosis, Derangement, Dementia, Eccentricity)तथा ‘हिस्टीरिया’ (hysteria) पर भी इसका प्रभाव पड़ता है ।… Read More


श्रीसूक्तः साधना के आयाम ‘श्री-सूक्त’ में 15 ऋचाएँ है । यह सूक्त ऋग्वेद संहिता के अष्टक 4, अध्याय 4, वर्ण के अन्तिम मण्डल 5 के अन्त में ‘परिशिष्ट’ के रुप में आया है । इसी को ‘खिल-सूक्त’ भी कहते हैं । निरुक्त एवं शौनक आदि ने भी इसका उल्लेख किया है । ‘खिल’ शब्द का… Read More


श्रीसूक्त के प्रयोग १॰ “श्रीं ह्रीं क्लीं।।हिरण्य-वर्णा हरिणीं, सुवर्ण-रजत-स्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आवह।। श्रीं ह्रीं क्लीं” सुवर्ण से लक्ष्मी की मूर्ति बनाकर उस मूर्ति का पूजन हल्दी और सुवर्ण-चाँदी के कमल-पुष्पों से करें। फिर सुवासिनी-सौभाग्यवती स्त्री और गाय का पूजन कर, पूर्णिमा के चन्द्र में अथवा पानी से भरे हुए कुम्भ में श्रीपरा-नारायणी… Read More


“श्रीसूक्त”-विधान विनियोगः- ॐ हिरण्य – वर्णामित्यादि-पञ्चदशर्चस्य श्रीसूक्तस्याद्यायाः ऋचः श्री ऋषिः तां म आवहेति चतुर्दशानामृचां आनन्द-कर्दम-चिक्लीत-इन्दिरा-सुताश्चत्वारः ऋचयः, आद्य-मन्त्र-त्रयाणां अनुष्टुप् छन्दः, कांसोऽस्मीत्यस्याः चतुर्थ्या वृहती छन्दः, पञ्चम-षष्ठयोः त्रिष्टुप् छन्दः, ततोऽष्टावनुष्टुभः, अन्त्या प्रस्तार-पंक्तिः छन्दः । श्रीरग्निश्च देवते । हिरण्य-वर्णां बीजं । “तां म आवह जातवेद” शक्तिः । कीर्तिसमृद्धिं ददातु मे” कीलकम् । मम श्रीमहालक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More


सुन्दर काण्ड का अद्भुत अनुष्ठान इस अनुष्ठान से सभी प्रकार की मनोकामनाएँ निश्चय ही पूर्ण होती है । अनेक व्यक्तियों द्वारा यह अनुभूत है । सर्वप्रथम अपने पूजा स्थान में श्रीहनुमान जी का एक सुन्दर चित्र विधि-वत् प्रतिष्ठित कर लें । उस चित्र के सम्मुख दीपक एवं धूपबत्ती जलाकर रखें । चित्र का यथा-शक्ति भक्ति-भाव… Read More


ऋण-मुक्ति श्रीभैरव-मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ऐं क्लीं ह्रीं मम् भैरवाय मम ऋण-विमोचनाय मह्यं महाधन-प्रदाय क्लीं स्वाहा ।” विधिः- रविवार को शुक्ल पक्ष में ‘पुष्य’ या ‘हस्त’ नक्षत्र हो तो उस दिन संकल्प-पूर्वक उक्त मन्त्र का जाप प्रारम्भ करके प्रतिदिन बारह माला २१ तक लगातार करें । रविवार एवं मंगलवार को कन्याओं एवं छोटे बच्चों को मीठा… Read More


ऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- भगवान् शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण-मोचन-गणपति देवतायै नमः हृदि, मम-ऋण-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ।… Read More


ऋण-हरण श्री गणेश-मन्त्र प्रयोग यह धन-दायी प्रयोग है। यदि प्रयोग नियमित करना हो तो साधक अपने द्वारा निर्धारित वस्त्र में कर सकता है किन्तु, यदि प्रयोग पर्व विशेष मात्र में करना हो, तो पीले रंग के आसन पर पीले वस्त्र धारण कर पीले रंग की माला या पीले सूत में बनी स्फटिक की माला से… Read More