ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 17 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सत्रहवाँ अध्याय विश्वकर्मा का आगमन, उनके द्वारा पाँच योजन विस्तृत नूतन नगर का निर्माण, वृषभानु गोप के लिये पृथक् भवन, कलावती और वृषभानु के पूर्वजन्म का चरित्र, राजा सुचन्द्र की तपस्या, ब्रह्मा द्वारा वरदान, भनन्दन के यहाँ कलावती का जन्म और वृषभानु के… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 16 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सोलहवाँ अध्याय वन में श्रीकृष्ण द्वारा बकासुर, प्रलम्बासुर और केशी का वध, उन सबका गोलोकधाम में गमन, उनके पूर्वजीवन का परिचय, पार्वती के त्रैमासिक व्रत का सविधि वर्णन तथा नन्द की आज्ञा के अनुसार समस्त व्रजवासियों का वृन्दावन में गमन भगवान् नारायण कहते… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 15 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पन्द्रहवाँ अध्याय नन्द का शिशु श्रीकृष्ण को लेकर वन में गो-चारण के लिये जाना, श्रीराधा का आगमन, नन्द से उनकी वार्ता, शिशु कृष्ण को लेकर राधा का एकान्त वन में जाना, वहाँ रत्नमण्डप में नवतरुण श्रीकृष्ण का प्रादुर्भाव, श्रीराधा-कृष्ण की परस्पर प्रेमवार्ता, ब्रह्माजी… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 14 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौदहवाँ अध्याय यशोदा के यमुनास्नान के लिये जाने पर श्रीकृष्ण द्वारा दही-दूध-माखन आदि का भक्षण तथा बर्तनों को फोड़ना, यशोदा का उन्हें पकड़कर वृक्ष से बाँधना, वृक्ष का गिरना, गोप-गोपियों तथा नन्दजी का यशोदा को उपालम्भ देना, नल- कूबर और रम्भा को शाप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 13 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तेरहवाँ अध्याय मुनि गर्गजी का आगमन, यशोदा द्वारा उनका सत्कार और परिचय-प्रश्न, गर्गजी का उत्तर, नन्द का आगमन, नन्द-यशोदा को एकान्त में ले जाकर गर्गजी का श्रीराधा-कृष्ण के नाम – माहात्म्य का परिचय देना और उनकी भावी लीलाओं का क्रमशः वर्णन करना, श्रीकृष्ण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 12 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बारहवाँ अध्याय यशोदा के घर गोपियों का आगमन और उनके द्वारा उन सबका सत्कार, शिशु श्रीकृष्ण के पैरों के आघात से शकट का चूर-चूर होना तथा श्रीकृष्ण-कवच का प्रयोग एवं माहात्म्य भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! एक दिन नन्दपत्नी यशोदा अपने घ… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 11 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ ग्यारहवाँ अध्याय तृणावर्त का उद्धार तथा उसके पूर्वजन्म का परिचय भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! एक दिन गोकुल में सती साध्वी नन्दरानी यशोदा बालक को गोद लिये घर के कामकाज में लगी हुई थीं। उस समय गोकुल में बवंडर का रूप धारण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 10 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दसवाँ अध्याय आकाशवाणी सुनकर कंस का पूतना को गोकुल में भेजना, पूतना का श्रीकृष्ण के मुख में विषमिश्रित स्तन देना और प्राणों से हाथ धोकर श्रीकृष्ण की कृपा से माता की गति को प्राप्त हो गोलोक में जाना भगवान् नारायण कहते हैं —… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 09 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ नौवाँ अध्याय श्रीकृष्ण की अनिर्वचनीय महिमा, धरा और द्रोणकी तपस्या, अदिति और कद्रूका पारस्परिक शापसे देवकी तथा रोहिणीके रूपमें भूतलपर जन्म, हलधर और श्रीकृष्णके जन्मका उत्सव नारदजी ने पूछा — भगवन् ! गोकुल में यशोदा-भवन के भीतर श्रीकृष्ण को रखकर जब वसुदेवजी ने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 08 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ आठवाँ अध्याय जन्माष्टमी-व्रत के पूजन, उपवास तथा महत्त्व आदि का निरूपण नारदजी बोले — भगवन् ! जन्माष्टमी-व्रत समस्त व्रतों में उत्तम कहा गया है। अतः आप उसका वर्णन कीजिये। जिस जन्माष्टमी व्रत में जयन्ती नामक योग प्राप्त होता है, उसका फल क्या है… Read More