ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 07 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सातवाँ अध्याय श्रीकृष्णजन्म-वृत्तान्त-आकाशवाणी से प्रभावित हो देवकी के वध के लिये उद्यत हुए कंस को वसुदेवजी का समझाना, कंस द्वारा उसके छः पुत्रों का वध, सातवें गर्भ का संकर्षण, आठवें गर्भ में भगवान् ‌का आविर्भाव – देवताओं द्वारा स्तुति, भगवान्‌ का दिव्य रूप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 06 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छठा अध्याय देवताओं द्वारा तेजःपुञ्ज में श्रीकृष्ण और राधा के दर्शन तथा स्तवन, श्रीकृष्ण द्वारा देवताओं का स्वागत तथा उन्हें आश्वासन-दान, भगवद्भक्त के महत्त्व का वर्णन, श्रीराधासहित गोप-गोपियों को व्रज में अवतीर्ण होने के लिये श्रीहरि का आदेश, सरस्वती और लक्ष्मीसहित वैकुण्ठवासी नारायण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 05 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय श्रीराधा के विशाल भवन एवं अन्तःपुर की शोभा का वर्णन, ब्रह्मा आदि को दिव्य तेजःपुञ्ज के दर्शन तथा उनके द्वारा उन तेजोमय परमेश्वर की स्तुति भगवान् नारायण कहते हैं — सम्पूर्ण गोलोक का दर्शन करके उन तीनों देवताओं के मन में… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 04 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौथा अध्याय पृथ्वी का देवताओं के साथ ब्रह्मलोक में जाकर अपनी व्यथा-कथा सुनाना, ब्रह्माजी का उन सबके साथ कैलासगमन, कैलास से ब्रह्मा, शिव तथा धर्म का वैकुण्ठ में जाकर श्रीहरि की आज्ञा से गोलोक में जाना और वहाँ विरजा-तट, शतशृङ्ग-पर्वत, रासमण्डल एवं वृन्दावन… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 03 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसरा अध्याय श्रीदामा और राधा का परस्पर शाप नारायण बोले — हे मुने ! राधा ने रति-गृह में जाकर भगवान् को नहीं देखा और विरजा का नदी रूप देखकर अपने भवन लोट गयीं । अनन्तर श्रीकृष्ण ने अपनी प्रेयसी विरजा को नदी रूप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 02 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दूसरा अध्याय श्रीराधा और श्रीकृष्ण के गोकुल में अवतार लेने का कारण नारायण बोले — जिसकी प्रार्थनावश भगवान् श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये और पृथ्वी पर जो-जो कार्य करके अपने लोक को चले गये; जैसे पृथ्वी का भार उतारना, दुष्टों के वध तथा पृथ्वी… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 01 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पहला अध्याय नारदजी के प्रश्न तथा मुनिवर नारायण द्वारा भगवान् विष्णु एवं वैष्णव के माहात्म्य का वर्णन नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत् ॥ भगवान् नारायण, नरश्रेष्ठ नर तथा देवी सरस्वती को नमस्कार करके जय ( इतिहास- पुराण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 46 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छियालीसवाँ अध्याय सबका स्तवन-पूजन और नमस्कार करके परशुराम का जाने के लिये उद्यत होना, गणेश-पूजा में तुलसी – निषेध के प्रसङ्ग में गणेश -तुलसी के संवाद का वर्णन तथा गणपति-खण्ड का श्रवण – माहात्म्य श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इस प्रकार परशुराम ने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 45 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय परशुराम को गौरी का स्तवन करने के लिये कहकर विष्णु का वैकुण्ठ गमन, परशुराम का पार्वती की स्तुति करना श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इस प्रकार पार्वती को समझा-बुझाकर भगवान् विष्णु परशुराम से हितकारक, तत्त्वस्वरूप, नीति का साररूप और परिणाम में… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-गणपतिखण्ड-अध्याय 44 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौवालीसवाँ अध्याय पार्वती की शिव से प्रार्थना, परशुराम को देखकर उन्हें मारने के लिये उद्यत होना, परशुराम द्वारा इष्टदेव का ध्यान, भगवान्‌ का वामनरूप से पधारना, शिव-पार्वती को समझाना और नामाष्टक-गणेश-स्तोत्र को प्रकट करना पार्वती ने कहा — प्रभो ! जगत् में सभी… Read More