श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय यमलार्जुन का उद्धार राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आप कृपया यह बतलाइये कि नलकूबर और मणिग्रीव को शाप क्यों मिला ? उन्होंने ऐसा कौन-सा निन्दित कर्म किया था, जिसके कारण परम शान्त देवर्षि… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का ऊखल से बाँधा जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक समय की बात हैं, नन्दरानी यशोदाजी ने घर की दासियों को तो दूसरे कामों में लगा दिया और स्वयं (अपने लाला को… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय नामकरण-संस्कार और बाललीला श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! यदुवंशियों के कुल-पुरोहित थे श्रीगर्गाचार्यजी । वे बड़े तपस्वी थे । वसुदेवजी की प्रेरणा से वे एक दिन नन्दबाबा के गोकुल में आये ॥ १ ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय शकट-भञ्जन और तृणावर्त-उद्धार राजा परीक्षित् ने पूछा — प्रभो ! सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि अनेकों अवतार धारण करके बहुत-सी सुन्दर एवं सुनने में मधुर लीलाएँ करते हैं । वे सभी मेरे हृदय को बहुत प्रिय लगती… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय पूतना-उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! नन्दबाबा जब मथुरा से चले, तब रास्ते में विचार करने लगे कि वसुदेवजी का कथन झूठा नहीं हो सकता । इससे उनके मन में उत्पात होने की आशङ्का… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय गोकुल में भगवान् का जन्ममहोत्सव श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! नन्दबाबा बड़े मनस्वी और उदार थे । पुत्र का जन्म होने पर तो उनका हृदय विलक्षण आनन्द से भर गया । उन्होंने स्नान किया… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय कंस के हाथ से छूटकर योगमाया का आकाश में जाकर भविष्यवाणी करना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब वसुदेवजी लौट आये, तब नगर के बाहरी और भीतरी सब दरवाजे अपने-आप ही पहले की तरह… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण का प्राकट्य श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब समस्त शुभ गुणों से युक्त बहुत सुहावना समय आया । रोहिणी नक्षत्र था । आकाश के सभी नक्षत्र, ग्रह और तारे शान्त-सौम्य हो रहे… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय भगवान् का गर्भ-प्रवेश और देवताओं द्वारा गर्भ-स्तुति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! कंस एक तो स्वयं बड़ा बली था और दूसरे, मगधनरेश जरासन्ध की उसे बहुत बड़ी सहायता प्राप्त थी । तीसरे, उसके साथी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय भगवान् के द्वारा पृथ्वी को आश्वासन, वसुदेव-देवकी का विवाह और कंस के द्वारा देवकी के छः पुत्रों की हत्या राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आपने चन्द्रवंश और सूर्यवंश के विस्तार तथा दोनों वंशों… Read More