श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय विदर्भ के वंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! राजा विदर्भ को भोज्या नामक पत्नी से तीन पुत्र हुए — कुश, क्रथ और रोमपाद । रोमपाद विदर्भवंश में बहुत ही श्रेष्ठ पुरुष हुए ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय अनु, द्रुह्यु, तुर्वसु और यदु के वंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! ययातिनन्दन अनु के तीन पुत्र हुए — सभानर, चक्षु और परोक्ष । सभानर का कालनर, कालनर का सृञ्जय, सृञ्जय का जनमेजय,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय पाञ्चाल, कौरव और मगधदेशीय राजाओं के वंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! दिवोदास का पुत्र था मित्रेयु । मित्रेयु के चार पुत्र हुए — च्यवन, सुदास, सहदेव और सोमक । सोमक के सौ… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २१ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय भरतवंश का वर्णन, राजा रन्तिदेव की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! वितथ अथवा भरद्वाज का पुत्र था मन्यु । मन्यु के पाँच पुत्र हुए — बृहत्क्षत्र, जय, महावीर्य, नर और गर्ग । नर का… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २० श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय पूरु के वंश, राजा दुष्यन्त और भरत के चरित्र का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब मैं राजा पूरु के वंश का वर्णन करूँगा । इसी वंश में तुम्हारा जन्म हुआ है । इसी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय ययाति का गृहत्याग श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! राजा ययाति इस प्रकार स्त्री के वश में होकर विषयों का उपभोग करते रहे । एक दिन जब अपने अधःपतन पर दृष्टि गयी तब उन्हें बड़ा वैराग्य… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय ययाति-चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जैसे शरीरधारियों के छः इन्द्रियाँ होती हैं, वैसे ही नहुष के छः पुत्र थे । उनके नाम थे — यति, ययाति, संयाति, आयति, वियति और कृति ॥ १ ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय क्षत्रवृद्ध, रजि आदि राजाओं के वंश का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! राजेन्द्र पुरूरवा का एक पुत्र था आयु । उसके पाँच लड़के हुए — नहुष, क्षत्रवृद्ध, रजि, शक्तिशाली रम्भ और अनेना । अब… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय परशुरामजी के द्वारा क्षत्रियसंहार और विश्वामित्रजी के वंश की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अपने पिता की यह शिक्षा भगवान् परशुराम ने ‘जो आज्ञा’ कहकर स्वीकार की । इसके बाद वे एक वर्ष तक… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – नवम स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय ऋचीक, जमदग्नि और परशुरामजी का चरित्र श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! उर्वशी के गर्भ से पुरूरवा के छः पुत्र हुए — आयु, श्रुतायु, सत्यायु, रय, विजय और जय ॥ १ ॥ श्रुतायु का पुत्र था… Read More