श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३० श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के विरह में गोपियों की दशा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् सहसा अन्तर्धान हो गये । उन्हें न देखकर व्रजयुवतियों की वैसी ही दशा हो गयी, जैसे यूथपति गजराजके बिना हथिनियों की… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनतीसवाँ अध्याय रासलीला का आरम्भ श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! शरद् ऋतु थी । उसके कारण बेला, चमेली आदि सुगन्धित पुष्प खिलकर महँ-महँ महँक रहे थे । भगवान् ने चीरहरण के समय गोपियों को जिन रात्रियों… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठाईसवाँ अध्याय वरुणलोक से नन्दजी को छुड़ाकर लाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! नन्दबाबा ने कार्तिक शुक्ल एकादशी का उपवास किया और भगवान् की पूजा की तथा उसी दिन रात में द्वादशी लगने पर स्नान करने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्ताईसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का अभिषेक श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब भगवान् श्रीकृष्ण ने गिरिराज गोवर्द्धन को धारण करके मूसलधार वर्षा से व्रज को बचा लिया, तब उनके पास गोलोक से कामधेनु (बधाई देने के लिये)… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छब्बीसवाँ अध्याय नन्दबाबा से गोपों की श्रीकृष्ण के प्रभाव के विषय में बातचीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! व्रज के गोप भगवान् श्रीकृष्ण के ऐसे अलौकिक कर्म देखकर बड़े आश्चर्य में पड़ गये । उन्हें भगवान्… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचीसवाँ अध्याय गोवर्धनधारण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब इन्द्र को पता लगा कि मेरी पूजा बंद कर दी गयी है, तब वे नन्दबाबा आदि गोपों पर बहुत ही क्रोधित हुए । परन्तु उनके क्रोध करने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय इन्द्रयज्ञ-निवारण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी के साथ वृन्दावन में रहकर अनेकों प्रकार की लीलाएँ कर रहे थे । उन्होंने एक दिन देखा कि वहाँ के सब गोप इन्द्र-यज्ञ करने की… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय यज्ञपत्नियों पर कृपा ग्वालबालों ने कहा — नयनाभिराम बलराम ! तुम बड़े पराक्रमी हो । हमारे चित्तचोर श्यामसुन्दर ! तुमने बड़े-बड़े दुष्टों का संहार किया है । उन्हीं दुष्टों के समान यह भूख भी हमें… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय चीरहरण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब हेमन्त ऋतु आयी । उसके पहले ही महीने में अर्थात् मार्गशीर्ष में नन्दबाबा के व्रज की कुमारियाँ कात्यायनी देवी की पूजा और व्रत करने लगीं । वे… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २१ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय वेणुगीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! शरद् ऋतु के कारण वह वन बड़ा सुन्दर हो रहा था । जल निर्मल था और जलाशयों में खिले हुए कमलों की सुगन्ध से सनकर वायु मन्द-मन्द चल… Read More