शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 54 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौवनवाँ अध्याय नारदजी द्वारा अनिरुद्ध के बन्धन का समाचार पाकर श्रीकृष्ण की शोणितपुर पर चढ़ाई, शिव के साथ उनका घोर युद्ध, शिव की आज्ञा से श्रीकृष्ण का उन्हें जृम्भणास्त्र से मोहित करके बाणासुर की सेना का संहार करना व्यासजी बोले —… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 53 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तिरपनवाँ अध्याय क्रुद्ध बाणासुर का अपनी सेना के साथ अनिरुद्ध पर आक्रमण और उसे नागपाश में बाँधना, दुर्गा के स्तवन द्वारा अनिरुद्ध का बन्धनमुक्त होना सनत्कुमार बोले —- इसके बाद बाणासुर ने अत्यन्त क्रुद्ध हो वहाँ जाकर दिव्य लीला से युक्त… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 52 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बावनवाँ अध्याय अभिमानी बाणासुर द्वारा भगवान् शिव से युद्ध की याचना, बाणपुत्री ऊषा का रात्रि के समय स्वप्न में अनिरुद्ध के साथ मिलन, चित्रलेखा द्वारा योगबल से अनिरुद्ध का द्वारका से अपहरण, अन्तःपुर में अनिरुद्ध और ऊषा का मिलन तथा द्वारपालों… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 51 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इक्यावनवाँ अध्याय प्रह्लाद की वंशपरम्परा में बलिपुत्र बाणासुर की उत्पत्ति की कथा, शिवभक्त बाणासुर द्वारा ताण्डव नृत्य के प्रदर्शन से शंकर को प्रसन्न करना, वरदान के रूप में शंकर का बाणासुर की नगरी में निवास करना, शिव-पार्वती का विहार, पार्वती द्वारा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 50 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पचासवाँ अध्याय शुक्राचार्य द्वारा काशी में शुक्रेश्वर लिंग की स्थापनाकर उनकी आराधना करना, ‘मूर्त्यष्टक स्तोत्र’ से उनका स्तवन, शिवजी का प्रसन्न होकर उन्हें मृतसंजीवनी विद्या प्रदान करना और ग्रहों के मध्य प्रतिष्ठित करना सनत्कुमार बोले — [हे व्यास!] मृत्युंजय नामक शिवजी… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 49 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनचासवाँ अध्याय शुक्राचार्य द्वारा शिव के उदर में जपे गये मन्त्र का वर्णन, अन्धक द्वारा भगवान् शिव की नामरूपी स्तुति-प्रार्थना, भगवान् शिव द्वारा अन्धकासुर को जीवनदानपूर्वक गाणपत्य पद प्रदान करना ॥ सनत्कुमार उवाच ॥ ॐ नमस्ते देवेशाय सुरासुरनमस्कृताय भूतभव्यमहादेवाय हरितपिगललोचनाय बलाय… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 48 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अड़तालीसवाँ अध्याय शुक्राचार्य की अनुपस्थिति से अन्धकादि दैत्यों का दुखी होना, शिव के उदर में शुक्राचार्य द्वारा सभी लोकों तथा अन्धकासुर के युद्ध को देखना और फिर शिव के शुक्ररूप में बाहर निकलना, शिव-पार्वती का उन्हें पुत्ररूप में स्वीकार कर विदा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 47 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सैंतालीसवाँ अध्याय शुक्राचार्य द्वारा युद्ध में मरे हुए दैत्यों को संजीवनी-विद्या से जीवित करना, दैत्यों का युद्ध के लिये पुनः उद्योग, नन्दीश्वर द्वारा शिव को यह वृत्तान्त बतलाना, शिव की आज्ञा से नन्दी द्वारा युद्ध स्थल से शुक्राचार्य को शिव के… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 46 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छियालीसवाँ अध्याय भगवान् शिव एवं अन्धकासुर का युद्ध, अन्धक की माया से उसके रक्त से अनेक अन्धकगणों की उत्पत्ति, शिव की प्रेरणा से विष्णु का कालीरूप धारणकर दानवों के रक्त का पान करना, शिव द्वारा अन्धक को अपने त्रिशूल में लटका… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 45 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पैंतालीसवाँ अध्याय अन्धकासुर का शिव की सेना के साथ युद्ध सनत्कुमार बोले — [हे व्यास!] तदनन्तर मदिरा पानकर नेत्रों को घुमाता हुआ मदमत्त गज के समान गतिवाला तथा श्रेष्ठ वीरों के साथ चलनेवाला वह प्रचण्ड वीर बहुत-सी सेना से युक्त हो… Read More