शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता पाँचवाँ अध्याय वाराहकल्पके दसवेंसे अट्ठाईसवें द्वापरतक होनेवाले व्यासों एवं शिवावतारोंका वर्णन शिवजी बोले – [ हे ब्रह्मन् ! ] दसवें द्वापरयुगमें जब त्रिधामा नामक मुनि व्यास होंगे, उस समय मैं हिमालय पर्वतके मनोहर भृगुतुंग नामक ऊँचे शिखरपर अवतार ग्रहण… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता चौथा अध्याय वाराहकल्पके प्रथमसे नवम द्वापरतक हुए व्यासों एवं शिवावतारोंका वर्णन नन्दीश्वर बोले – हे सनत्कुमार! हे सर्वज्ञ ! अब शंकरजीके जिस सुखदायक चरित्रको हर्षित होकर रुद्रने ब्रह्माजीसे प्रेमपूर्वक कहा था, [उस चरित्रको सुनें ] ॥ १ ॥ शिवजी… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 003 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता तीसरा अध्याय भगवान् शिवका अर्धनारीश्वर – अवतार एवं सतीका प्रादुर्भाव नन्दीश्वर बोले- हे तात ! हे महाप्राज्ञ ! अब मैं ब्रह्माजीकी मनोकामनाओंको पूर्ण करनेवाले शिवके उत्तम अर्धनारीश्वर नामक रूपका वर्णन कर रहा हूँ, उसे सुनें । ब्रह्माके द्वारा विरचित… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 002 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता दूसरा अध्याय भगवान् शिवकी अष्टमूर्तियोंका वर्णन नन्दीश्वर बोले — हे प्रभो ! हे तात! हे मुने ! अब महेश्वरके समस्त प्राणियोंको सुख प्रदान करनेवाले तथा लोकके सम्पूर्ण कार्योंको सम्पादित करनेवाले अन्य श्रेष्ठतम अवतारोंको सुनें ॥ १ ॥ यह सारा… Read More


शिवमहापुराण – शतरुद्रसंहिता – अध्याय 001 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता पहला अध्याय सूतजी से शौनकादि मुनियोंका शिवावतारविषयक प्रश्न महानन्दमनन्तलीलं महेश्वरं सर्वविभुं महान्तम् । गौरीप्रियं कार्तिकविघ्नराज-समुद्भवं शङ्करमादिदेवम् ॥ मैं परम आनन्दस्वरूप, अनन्त लीलाओं से युक्त, सर्वत्र व्यापक, महान्, गौरीप्रिय, कार्तिकेय और गजानन को उत्पन्न करने वाले आदिदेव महेश्वर शंकर को… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 59 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनसठवाँ अध्याय काशी के कन्दुकेश्वर शिवलिंग के प्रादुर्भाव में पार्वती द्वारा विदल एवं उत्पल दैत्यों के वध की कथा, रुद्रसंहिता का उपसंहार तथा इसका माहात्म्य सनत्कुमार बोले — हे व्यासजी ! अब आप प्रेमपूर्वक शिवजी के उस चरित्र को सुनिये, जिस… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 58 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अट्ठावनवाँ अध्याय काशी के व्याघेश्वर लिंग-माहात्म्य के सन्दर्भ में दैत्य दुन्दुभिनिर्ह्राद के वध की कथा सनत्कुमार बोले — हे व्यासजी ! सुनिये, मैं शिवजी के चरित्र को कहता हूँ, जिस प्रकार महादेव ने दुन्दुभिनिर्ह्राद नामक दैत्य को मारा । समय पाकर… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 57 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्तावनवाँ अध्याय महिषासुर के पुत्र गजासुर की तपस्या तथा ब्रह्मा द्वारा वरप्राप्ति, उन्मत्त गजासुर द्वारा अत्याचार, उसका काशी में आना, देवताओं द्वारा भगवान् शिव से उसके वध की प्रार्थना, शिव द्वारा उसका वध और उसकी प्रार्थना से उसका चर्म धारणकर ‘कृत्तिवासा’… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 56 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छप्पनवाँ अध्याय बाणासुर का ताण्डव नृत्य द्वारा भगवान् शिव को प्रसन्न करना, शिव द्वारा उसे अनेक मनोऽभिलषित वरदानों की प्राप्ति, बाणासुरकृत शिवस्तुति नारदजी बोले — हे महामुने ! भार्यासहित अनिरुद्ध तथा श्रीकृष्णजी के द्वारकापुरी में चले जाने पर बाणासुर ने क्या… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [पंचम-युद्धखण्ड] – अध्याय 55 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पचपनवाँ अध्याय भगवान् कृष्ण तथा बाणासुर का संग्राम, श्रीकृष्ण द्वारा बाण की भुजाओं का काटा जाना, सिर काटने के लिये उद्यत हुए श्रीकृष्ण को शिव का रोकना और उन्हें समझाना, बाण का गर्वापहरण, श्रीकृष्ण और बाणासुर की मित्रता, ऊषा-अनिरुद्ध को लेकर… Read More