भूत भगाने का मन्त्र भूत भगाने का मन्त्र मन्त्र:- “हनुमान अंगद रन गाजे । हाँक सुनत रजनीचर भाजे ।।”… Read More
भगवती ( शताक्षी) शाकम्भरी भगवती ( शताक्षी) शाकम्भरी प्राचीन समय की बात है । दुर्गम नाम का एक महान् दैत्य था । उसका जन्म हिरण्याक्ष के कुलमें हुआ था तथा उसके पिताका नाम रुरु था । ‘देवताओं का बल वेद है । वेदके लुप्त हो जाने पर देवता भी नहीं रहेंगे’ – ऐसा सोचकर दुर्गम ने ब्रह्माजी से वर… Read More
परमभागवत परीक्षित् परमभागवत परीक्षित् जिस समय पाण्डव लोग सभी सुकृत कर्मों का अनुष्ठान करके आत्मा के आत्यन्तिक स्वरूप को जानकर, अपने मन को भगवान् के चरणाम्बुज में लगाकर एकान्त गति को प्राप्त हो गये, उस समय ब्राह्मणों की शिक्षासे महाभागवत राजा परीक्षित् पृथिवीका शासन करने लगे । राजा परीक्षित् ने जब सुना कि ‘कलिकाल के प्रभावसे प्राणियोंके… Read More
शत्रु को स्तम्भित करने का मन्त्र शत्रु को स्तम्भित करने का मन्त्र मन्त्र:- “बयरु न कर काहू सन कोई । राम प्रताप विषमता खोई ।।”… Read More
श्री सनकादि श्री सनकादि सृष्टि के प्रारम्भ में लोकपितामह ब्रह्मा ने विविध लोकों को रचने की इच्छा से तपस्या की । स्रष्टा के उस अखण्ड तप से प्रसन्न होकर विश्वाधार प्रभु ने ‘तप’ अर्थवाले ‘सन’ नाम से युक्त होकर सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार-इन चार निवृत्ति-परायण ऊर्ध्वरेता मुनियों के रूपमें अवतार ग्रहण किया । ये प्रकट-काल से… Read More
रोग नाशक मन्त्र रोग नाशक मन्त्र मन्त्र:- “दैहिक दैविक भौतिक तापा । राम राज नहिं काहुहिं ब्यापा ।।”… Read More
जय जगदम्बिके ! जय जगदम्बिके ! हो रही सुशोभित लिए खड्ग-गदा-चक्र-चाप, परिधान शूल भुशुण्डि और शंख भी सुघोष हैं । नील घनश्याम रंग नेत्र हैं विशाल तीन, अंग-अंग साज रहे छवि के सु-कोष हैं ।। भक्त-जन ध्यावें जिनके कोमल चरण दस, पावें सुत बित ज्ञान मोक्ष सौं सु-पोष हैं । ऐसी महा-काली गल मुण्ड-माल धारि, करें रक्षा हमारी… Read More
हरि भजन बिना सुख नाहीं रे हरि भजन बिना सुख नाहीं रे हरि भजन बिना सुख नाहीं रे । नर क्यों बिरथा भटकाई रे ।। काशी गया द्वारका जावे, चार धाम तीरथ फिर आवे, मन की मैल न जाई रे । हरि भजन बिना सुख नाहीं रे । छाप तिलक बहु भाँत लगाए, सिर पर जटा विभूत रमाए, हिरदे शांति न… Read More
विपत्ति नाशक व सुख-प्राप्ति का मन्त्र विपत्ति नाशक व सुख-प्राप्ति का मन्त्र मन्त्र:- “राजिव नयन धरें धनुसायक । भगति बिपति भंजन सुखदायक ।।”… Read More
अपनी रक्षा के लिए मन्त्र अपनी रक्षा के लिए मन्त्र मन्त्र:- “ममाभिरक्षय रघुकुल नायक । धृतबरचाप रुचिकर सायक ।। मोरे हित हरि सम नहीं कोऊ । ऐहि अवसर सहाय सोइ होऊ ।।”… Read More