भगवान् श्रीराम के राज्यकाल में अयोध्या का वैभव भगवान् श्रीराम के राज्यकाल में अयोध्या का वैभव भगवान् श्रीराम की चरणरज से पवित्रता को प्राप्त श्रीअयोध्यापुरी, जहाँ चारों ओर प्राकृतिक सौन्दर्य अपनी चरम सीमा तक फैला पड़ा है, जिसे निहारकर ऐसा लगता है, जैसे कामदेव और रति ने इसे अपने हाथों से सजाया है । ऐसी परमपावन अयोध्यापुरी जहाँ प्रभु श्रीराम अपनी जीवन-सहचरी श्रीजानकीजी… Read More
शिशु-रोग-निवारक ‘श्रीराम-रक्षा झारा’ शिशु-रोग-निवारक ‘श्रीराम-रक्षा झारा’ मन्त्र :- ‘ॐ रोम-रोम की रक्षा राम जी करें । हाडन की रक्षा हर जी करें । टकान की रक्षा टीकम जी करें । पिण्डरी की रक्षा मोहन जी करें । गोड़न की रक्षा गोवर्धन जी करें । जाँघन की रक्षा जनार्दन जी करें । इन्द्री की रक्षा इन्द्र जी करें ।… Read More
नजर, बुखार में राम-बाण : शाबर नजर, बुखार में राम-बाण : शाबर मन्त्र :- ‘लोहार, लोहरवा की बेटी ! तोर बाप का करत हय ?’ ‘कोइला काटत हय ।’ ‘ओ कोइला का करी ?’ ‘छप्पन छुरा गढ़ी ।’ ‘ओ छुरा का करी ?’ ‘डीठ काटी, टोना काटी और काटी टापर ।’ दोहाई गुरु धनन्तर की । लोना चमारिन की दोहाई ।… Read More
अकाल मृत्यु नाशक मन्त्र अकाल मृत्यु नाशक मन्त्र मन्त्र:- “नाम पाहरु दिवस निसि, ध्यान तुम्हार कपाट । लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट ।।”… Read More
महामारी भगाने का मन्त्र महामारी भगाने का मन्त्र मन्त्र:- “जय रघुवंस बनज बन भानु । गहन दनुज कुल दहन कृसानू ।।”… Read More
हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग ब्राह्म-मुहूर्त में उठकर, ‘सन्ध्या-वन्दनादि’ नित्य क्रिया करने के उपरान्त साधक नदी किनारे जाए। नदी में स्नान करके, ‘तीर्थ-आवाहन’ कर आठ बार मूल-मन्त्र का जप करे। फिर मूल-मन्त्र जपते हुए बारह बार अपने मस्तक पर जल के द्वारा ‘अभिषेक’ करे। अभिषेक करने के बाद वस्त्र धारण कर नदी के किनारे बैठ- ‘ह्रां… Read More
श्रीगायत्री-मन्त्र से रोग-ग्रह-शान्ति श्रीगायत्री-मन्त्र से रोग-ग्रह-शान्ति १॰ क्रूर से क्रूर ग्रह-शान्ति में, शमी-वृक्ष की लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े कर, गूलर-पाकर-पीपर-बरगद की समिधा के साथ ‘गायत्री-मन्त्र से १०८ आहुतियाँ देने से शान्ति मिलती है। २॰ महान प्राण-संकट में कण्ठ-भर या जाँघ-भर जल में खड़े होकर नित्य १०८ बार गायत्री मन्त्र जपने से प्राण-रक्षा होती है। ३॰ घर के आँगन… Read More
श्री परशुराम प्रयोग श्री परशुराम प्रयोग भगवान् परशुराम की उपासना के फल-स्वरुप साधक अपनी विविध कामनाओं की पूर्ति करते है। यथा-सन्तान, विवाह, कृषि, वर्षा, ऐश्वर्य, वाक्-सिद्धि, स`र्व-शत्रुओं का नाश, रोगों का निवारण आदि।… Read More
शोक (दुःख) नाशक मन्त्र शोक (दुःख) नाशक मन्त्र मन्त्र:- “जब तें राम ब्याहि घर आए । नित नव मंगल मोद बधाए ।।”… Read More
विघ्न दूर करने का मन्त्र विघ्न दूर करने का मन्त्र मन्त्र:- “सकल विघ्न ब्यापहिं नहिं ताही । राम सुकृपाँ बिलोकहिं जाही ।।”… Read More