भक्त ठाकुर श्री किशनसिंह राठौड़ (गारबदेसर, बीकानेर) बीकानेर राज्य के संस्थापक राव बीकाजी राठौड़ के दो पुत्र हुए लूणकरणजी और घड़सी जी । बडे लूणकरणजी बीकाजी के बाद गद्दी पर बैठे । छोटे घड़सी घडसाना के जागीरदार हुए । घड़सीजी के पुत्र देदलजी को 84 गांव सहित गारबदेसर का तामीजी ठिकाना मिला । देदलजी के… Read More


श्री नाभादासजी (गलता / रेवासा) भक्तमाल के रचयिता परम भागवत श्री नाभादासजी का चरित्र आदि से अन्त तक सन्त-सेवा-मय है। उन्होंने जन्म से ही आँखें बन्द रखी और तब तक नहीं खोली, जब तक उनको संतों के दर्शन नहीं हुए। आजन्म संतों की सेवा की और संतों की सीध-प्रसादी का सेवन किया। उसी का चेतन… Read More


सन्तोषी माता का मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो सन्तोषी माई । सत की सदा सहाई । बाबा गणपत की बेटडी । ऋद्धि सिद्धि की जाई । भक्तों को बख्शे सन्तुष्टि । नाम सन्तोषी कहलाई । दुःख हरो, सुख करो । मुरादें पूर्ण करो, सिर पर मेहर का हाथ धरो । माई, तेरी महिमा अपरम्पार । तोहे… Read More


माँ भगवती का मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आदेश, गुरु जी को आदेश । श्रीमहा-काली, श्रीमहा-लक्ष्मी, श्रीमहा-सरस्वती । ॐ भर्गो देवी परमेश्वरी विद्महे निगुर्ण त्रिगुणातीते धीमहि तन्नो दुर्गा भगवती प्रचोदयात् । आदि – नाथ का वाचा फुरे । माई गौरजाँ की होय दुहाई ।”… Read More


बाबा नानक जी का मन्त्र मन्त्रः- “अगम – अगोचर तू परमेश्वर । तू मेरा राखा सवनी थाईं । भाई बुड्ढे नूँ पीढ़ी बख्शी । भाई वावे नूं पीढ़ा । गुरु अङ्गद नूँ गुरयाई बख्शी, चार कुण्ठ देया पीरा । सत नाम श्री वाहे गुरु । मन्त्र बाबा नानक जी दा जाप । रक्षा करनी बाबा… Read More


दत्तात्रेय आसन-गायत्री मन्त्रः- “आसन ब्रह्मा, आसन विष्णु, आसन इन्द्र, आसन बैठे गुरु गोविन्द । आसन बैठो, धरो ध्यान, स्वामी कथनो ब्रह्म-ज्ञान । अजर आसन, वज्र किवाड़, वज्र वजड़े दशम द्वार । जो घाले वज्र घाव, उलट वज्र वाहि को खाव । हृदय मेरे हर बसे, जिसमें देव अनन्त । चौकी हनु- मन्त वीर की ।… Read More


रक्षा-कारक मन्त्र मन्त्रः- “नागौरी से सुलतान, मुहम्मद से जोद्धा, बडे खुदाय काम । चारों चक्र हनुमान जोद्धे ने मारे । मस्तक में सिन्दूर लगाऊँ । सवा सेर का रोट चढाऊं । मैं करूँ हिन्दी का पाठ । घरेर – घार कर लगा लगाया, भेजा – भेजाया सब गुर्ज के बस में कर । पहली हक्का… Read More


रक्षा का मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आदेश, गुरु जी को आदेश । वज्र की कोठड़ी, वज्र किवाड़ा वज्र छायों, दसों द्वारा । गणेश सौंगली, शेष कुण्डा । ब्रह्मा कुञ्जी, विष्णु ताला । भोले शङ्कर की चौकी, भैरों बलि, हनुमन्त वीर का पहरेदारा । जो इस घट-पिण्ड पर करे घाव, तो शिव-शक्ति की फिरे दुहाई । मेरी… Read More


भैरों का मन्त्र मन्त्रः- “आद भैरों, जुगाद भैरों, भैरों है सब थाईं । भैरों ब्रह्मा, भैरों विष्णु, भैरों ही भोला साईं । भैरों देवी, भैरों सब देवता, भैरों सिद्ध, भैरों नाथ । भैरों गुरु, भैरों पीर, भैरों ज्ञान, भैरों ध्यान । भैरों योग- वैराग । भैरों विन होय ना रक्षा । भैरों विन बजे ना… Read More


नव-नाथ का मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आदेश, गुरू जी को आदेश । ओङ्कार – रूपी आदि-नाथ आकाश-स्वरूपी । सन्तोषनाथ विष्णु खण्डा खड्‌ग-स्वरूपी । गज-वेली कन्थडीनाथ गणेश जी हस्ति-स्वरूपी । अचला अचम्भेनाथ शेषनाग अचल – स्वरूपी । सिद्ध चौरङ्गीनाथ पूर्ण भगत चन्द्रमा – स्वरूपी । माया-रूपी मच्छेन्द्रनाथ । घटे-बड़े पिण्ड गुरू गोरखनाथ । इतना नौ नाथ मन्त्र-जाप… Read More