आकस्मिक आसन्न सङ्कट से रक्षा करनेवाला मन्त्र आकस्मिक आसन्न सङ्कट से रक्षा करनेवाला मन्त्र मन्त्र :- (१) “आवत देखो, उध-सुध बैठत, पथरा सुहान । हाथ बाँधौ, मुँह बाँधौ, आठो दन्त बन्द कराऔ । अहो नारसिंह नाथ ! इस बन से उस बन चली जाई, काल दाग को दीन्हो छिपाई । जै बजरङ्ग बली की दोहाई ।”… Read More
वृश्चिक दंश का अनुभूत मन्त्र वृश्चिक दंश का अनुभूत मन्त्र मन्त्र : ”काळी कुकडी, पाय पकडी, सौन्दडीच पान । उतर – उतर विंचवा, तेच तुझ रान ।।” विधि – ‘सूर्य-ग्रहण’ – काल में उक्त मन्त्र सिद्ध कर ले । पहले स्नान करके गीले कपड़े पहने ही पूजा-स्थान में आसनस्थ हो जाए । फिर-‘केशवाय नमः, नारायणाय नमः’ से आचमन करे ।… Read More
विषैले जन्तुओं का विष-निवारण प्रचलित शाबर मन्त्र विषैले जन्तुओं का विष-निवारण (क) “एरई हाविल हासी बहु-सर रहीम ।।” विधि – पीतल की थाली की पेन्दी पर उक्त मन्त्र एक पंक्ति मे पूरा लिखे । इसी तरह दूसरी और तीसरी पंक्ति में भी लिखे ।… Read More
बाई-पीड़ा (वात-दर्द) निवारण मन्त्र बाई-पीड़ा (वात-दर्द) निवारण मन्त्र मन्त्रः- “बाई झारो पोरे – पोरे । बाई झारो जङ्ग से । बाई चले-हट ।”… Read More
चोर (चमक) दर्द-निवारण मन्त्र चोर (चमक) दर्द-निवारण मन्त्र मन्त्रः- “राम चले धनुष साजे, सीता जी झारे केश । लछु-मन चलते चोर धरे, ठाँवें परे विशेष ।। दुहाई गौरी-पार्वती की ।।”… Read More
कटे-जले घाव की चिकित्सा कटे-जले घाव की चिकित्सा मन्त्रः- “राम लछुमन बोउ भाइ । काटा घाव फूँका जाइ ।। नाहीं घाव, नाहीं पूज । सिद्ध गुरू उस्तादे पाँव ।। काँवरू- काँवरू कामाक्षा-कामाक्षा आज्ञा हाड़ी जीते ।।”… Read More
दिशा, स्थान बाँधने का मन्त्र दिशा, स्थान बाँधने का मन्त्र मन्त्र :- “काला गुरू, धर धतूर तै । जान बास – बसेरु, अमली खेरु । वन देउता आकासे लाग, दशो दिशा दशो देउता । मोरे गुरू, तोर गुरू । मै जानो शपथ साँची । कहु राख धरू मार, बन्धान पर ओर – छोर । मोर देउता, गौरा पार्वती, महादेव की… Read More
स्थान बाँधने का मन्त्र स्थान बाँधने का मन्त्र मन्त्र :- “उतरे पाँव परन्ते जी, सुमिरन सुग्रीव लाभा होय । चौगुना सान्से परे न जीव, धरती करो बिछौना । तम्बू तनू आकाश, सूर्य – चन्द्रमा दीपक-सुख, सोमै हरी के दास । पाँच पुतरी के रखवार, भाग-भाग रे दुष्ट ! हनुमन्त बिराजे आय । जहाँ बजी हनु- मन्त की ताली, तहाँ… Read More
आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत गणेश मन्त्र सिद्ध शाबर मन्त्र-कल्पतरु आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र मन्त्र :- “ॐ गुरू जी गनेपाइयाँ, रिद्धि-सिद्धि आइयाँ । रिद्धि-सिद्धि भरै भण्डार, कमी कछू की नाहीं । पीर-पैगम्बर औलिया- सबको राह बताई । हाथा तो हनुमन्त बसे, भैरो बसे कपाल । दो नैनन बिच, नाहर सिंह, मोह लीन संसार । बिन्द्रा लाव, सिन्दूर का सोहै माँग लिलार… Read More
आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र सिद्ध शाबर मन्त्र-कल्पतरु आत्म-बल, स्व-शरीर-रक्षा का अनुभूत मन्त्र मन्त्र :- (१) “ॐ गुरू जी काल-भैरव ! काली लट हाथ, फरसी साथ, नगरी करहुँ प्रवेश । नगरी की करो बकरी । राजा को करो बिलाई । जो कोई मेरा जोग भङ्ग करै, बाबा कृष्णनाथ की दुहाई ।”… Read More