भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९० अनङ्ग-त्रयोदशी-व्रत युधिष्ठिर ने पूछा — संसार से उद्धार करनेवाले स्वामिन् ! आप रूप एवं सौभाग्य प्रदान करनेवाला कोई व्रत बताये । भगवान् श्रीकृष्णा ने कहा — महाराज ! शरीर को क्लेश देनेवाले बहुत-से व्रतों के करने… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८९ धर्मराज का समाराधन-व्रत… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८७ से ८८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८७ से ८८ अबाधक-व्रत एवं दौर्भाग्य-दौर्गन्ध्य नाशक (मन्दार-निम्बार्क) व्रत का माहात्म्य राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! जनशून्य घोर वन में, समुद्रतरण में, संग्राम में, चोर आदि के भय में व्याकुल मनुष्य किस देवता… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८६ मदन-द्वादशी-व्रत में मरुद्गणों का आख्यान युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! दिति (दैत्योंकी जननी)— ने जिस व्रत करने से उनचास मरुद्गणओं को पुत्र रूप में प्राप्त किया था, अब मैं आपसे उस मदनद्वादशी-व्रत के विषय में… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८५ विभूतिद्वादशी-व्रत में राजा पुष्पवाहन की कथा भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाराज ! अब मैं भगवान् विष्णु के विभूति द्वादशी नामक सर्वोत्तम व्रत का वर्णन कर रहा हूँ, जो सम्पूर्ण देवगणों द्वारा अभिवन्दित है । बुद्धिमान्… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८४ विशोकद्वादशी-व्रत और गुड-धेनु आदि दस धेनुऑ के दान की विधि तथा उसकी महिमा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! इस भूतल पर कौन ऐसा उपवास या व्रत है, जो मनुष्य के अभीष्ट वस्तुओं के वियोग से… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८३ धरणी-व्रत (अर्चावतार-व्रत) राजा युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! वेदों में यह कहा गया है कि विधिपूर्वक यज्ञ करने, बड़े-बड़े दान देने और कठिन परिश्रम करने से परमेश्वर की प्राप्ति होती हैं, किंतु कलियुग के प्राणी,… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ८२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ८२ सुकृत-द्वादशी के प्रसंग में सीरभद्र वैश्य की कथा राजा युधिष्ठिरने पूछा — श्रीकृष्णचन्द्र ! ऐसा कौनसा कर्म है, जिसके करने से सभी कष्ट दूर हो जायें तथा कोई संताप भी न हो । भगवान् श्रीकृष्ण ने… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७९ से ८१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७९ से ८१ अखण्ड-द्वादशी, मनोरथ-द्वादशी एवं तिल-द्वादशी-व्रतों का विधान राजा युधिष्ठिर ने पूछा — श्रीकृष्ण ! व्रतोपवास, दान, धर्म आदि में जो कुछ वैकल्य अर्थात् किसी बात की न्यूनता रह जाय तो क्या फल होता… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७८ गोविन्द-द्वादशी व्रत भगवान् श्रीकृष्ण ने पुनः कहा — महाराज ! इसी प्रकार गोविन्द-द्वादशी नाम का एक अन्य व्रत है, जिसके करने से सभी अभीष्ट सिद्ध हो जाते हैं । पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी… Read More