विष्णु सूक्त ॥ विष्णुसूक्त ॥ इस सूक्त के द्रष्टा दीर्घतमा ऋषि हैं । विष्णुके विविध रूप, कर्म हैं । अद्वितीय परमेश्वररूप में उन्हें ‘महाविष्णु’ कहा जाता हैं । यज्ञ एवं जलोत्पादक सूर्य भी उन्हीं का रूप है। वे पुरातन हैं, जगत्स्रष्टा हैं। नित्य-नूतन एवं चिरसुन्दर हैं । संसार को आकर्षित करनेवाली भगवती लक्ष्मी उनकी भार्या हैं ।… Read More
नारायण सूक्त ॥ नारायणसूक्त ॥ इस सूक्तके ऋषि नारायण, देवता आदित्य-पुरुष और छन्द भूरिगार्षी त्रिष्टुप, निच्यूदा त्रिष्टुप् एवं आर्य्यनुष्टुप् है । इस सूक्त में केवल छः मन्त्र हैं । शुक्लयजुर्वेद में पुरुषसूक्त के १६ मन्त्रों के अनन्तर इसके छः मन्त्र प्राप्त होते हैं । अतः इसे ‘उत्तर नारायणसूक्त’ भी कहा जाता है । इसमें सष्टि के विकास… Read More
चतुःश्लोकी भागवत ॥ चतुःश्लोकी भागवत ॥ अहमेवासमेवाग्रे नान्यद् यत् सदसत् परम् । पश्चादहं यदेतच्च योऽवशिष्येत सोऽस्यहम् ॥ १ ॥ ‘सृष्टि के पूर्व केवल मैं-ही-मैं था । मेरे अतिरिक्त न स्थूल था न सूक्ष्म और न तो दोनों का कारण अज्ञान । जहाँ यह सृष्टि नहीं है, वहाँ मैं-ही-मैं हूँ और इस सृष्टि के रूप में जो कुछ… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९९ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९९ पौर्णमासी-व्रत-विधान एवं अमावास्या में श्राद्ध-तर्पण की महिमा तथा बुध के जन्म की कथा भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — महाराज ! पूर्णिमा तिथि चन्द्रमा को अत्यन्त पवित्र है क्योंकि पूर्णमासी तिथि वहीं होती है जिसमें मास की… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९८ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९८ सर्वफलत्याग-चतुर्दशी व्रत भगवान् श्रीकृष्ण बोले — भारत ! अब आप सर्वफलत्याग-चतुर्दशी व्रत का माहात्म्य सुनें । यह सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करनेवाला है । इस व्रत का नियम मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९६ से ९७ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९६ से ९७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९६ से ९७ नक्त एवं शिवचतुर्दशी-व्रतकी विधि भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अब आप नक्तव्रत का विधान सुनिये, जिसके करने से मनुष्य मुक्ति प्राप्त कर लेता है । किसी भी मास की शुक्ल चतुर्दशी… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९५ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९५ श्रवणिका व्रत-कथा एवं व्रत-विधि राजा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! संसार में श्रावणी नाम की जिन देवियों का नाम सुना जाता है, वे कौन हैं और उनका क्या धर्म है तथा वे क्या करती हैं… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९४ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९४ अनन्तचतुर्दशी-व्रत-विधान भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — राजन् ! सम्पूर्ण पापों का नाशक, कल्याणकारक तथा सभी कामनाओं को पूर्ण करनेवाला अनन्त चतुर्दशी नामक एक व्रत है, जिसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को सम्पन्न किया… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९३ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९३ आग्नेयी शिवचतुर्दशी-व्रत के प्रसंग में महर्षि अङ्गिरा का आख्यान श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! चतुर्दशी तिथि अग्नि की परम प्रेयसी है, क्योंकि नष्ट होते हुए भी अग्नि देव में इसी दिन पुनः अग्नित्व प्राप्त किया था… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९१ से ९२ भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ९१ से ९२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ९१ से ९२ पाली-व्रत… Read More