श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय प्रह्लादजी द्वारा माता के गर्भ में प्राप्त हुए नारदजी के उपदेश का वर्णन नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! जब दैत्यबालकों ने इस प्रकार प्रश्न किया, तब भगवान् के परम प्रेमी भक्त प्रह्लादजी को मेरी बात… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय प्रह्लादजी का असुर-बालकों को उपदेश प्रह्लादजी ने कहा — मित्रो ! इस संसार में मनुष्य-जन्म बड़ा दुर्लभ हैं । इसके द्वारा अविनाशी परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है । परन्तु पता नहीं कब इसका अन्त हो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय हिरण्यकशिपु के द्वारा प्रह्लादजी के वध का प्रयत्न नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! दैत्यों ने भगवान् श्रीशुक्राचार्यजी को अपना पुरोहित बनाया था । उनके दो पुत्र थे — शण्ड और अमर्क । वे दोनों राजमहल… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय हिरण्यकशिपु के अत्याचार और प्रह्लाद  के गुणों का वर्णन नारदजी कहते हैं — युधिष्ठिर ! जब हिरण्यकशिपु ने ब्रह्माजी से इस प्रकार के अत्यन्त दुर्लभ वर माँगे, तब उन्होंने उसकी तपस्या से प्रसन्न होने के कारण… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय हिरण्यकशिपु की तपस्या और वरप्राप्ति नारदजी ने कहा — युधिष्ठिर ! अब हिरण्यकशिपु ने यह विचार किया कि ‘मैं अजेय, अजर, अमर और संसार का एकछत्र सम्राट् बन जाऊँ, जिससे कोई मेरे सामने खड़ा तक न… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय हिरण्याक्ष का वध होने पर हिरण्यकशिपु का अपनी माता और कुटुम्बियों को समझाना नारदजी ने कहा — युधिष्ठिर ! जब भगवान् ने वराहावतार धारण करके हिरण्याक्ष को मार डाला, तब भाई के इस प्रकार मारे जाने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – सप्तम स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजय की कथा राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! भगवान् तो स्वभाव से ही भेदभाव से रहित हैं — सम हैं, समस्त प्राणियों के प्रिय और सुहृद हैं; फिर उन्होंने, जैसे कोई साधारण… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय पुंसवन-व्रत की विधि राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आपने अभी-अभी पुंसवन-व्रत का वर्णन किया है और कहा है कि उससे भगवान् विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं । सो अब मैं उसकी विधि जानना चाहता… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय अदिति और दिति की सन्तानों की तथा मरुद्गण की उत्पत्ति का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! सविता की पत्नी पृश्नि के गर्भ से आठ सन्तानें हुई — सावित्री, व्याहृति, त्रयी, अग्निहोत्र, पशु, सोम, चातुर्मास्य… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय चित्रकेतु को पार्वतीजी का शाप श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! विद्याधर चित्रकेतु, जिस दिशा में भगवान् सङ्कर्षण अन्तर्धान हुए थे, उसे नमस्कार करके आकाशमार्ग से स्वच्छन्द विचरने लगे ॥ १ ॥ महायोगी चित्रकेतु करोड़ों वर्षों… Read More