श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय मोहिनी रूप को देखकर महादेवजी का मोहित होना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब भगवान् शङ्कर ने यह सुना कि श्रीहरि ने स्त्री का रूप धारण करके असुरों को मोहित कर लिया और देवताओं को… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ११ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय देवासुर संग्राम की समाप्ति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! परम पुरुष भगवान् को अहेतुकी कृपा से देवताओं की घबराहट जाती रही, उनमें नवीन उत्साह का सञ्चार हो गया । पहले इन्द्र, वायु आदि देवगण रणभूमि… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय देवासुर-संग्राम श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! यद्यपि दानवों और दैत्यों ने बड़ी सावधानी से समुद्रमन्थन की चेष्टा की थी, फिर भी भगवान् से विमुख होने के कारण उन्हें अमृत की प्राप्ति नहीं हुई ॥ १… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय मोहिनी रूप से भगवान् के द्वारा अमृत बाँटा जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! असुर आपस के सद्भाव और प्रेम को छोड़कर एक-दूसरे की निन्दा कर रहे थे और डाकू की तरह एक-दूसरे के हाथ… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय समुद्र से अमृत का प्रकट होना और भगवान् का मोहिनी-अवतार ग्रहण करना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — इस प्रकार जब भगवान् शङ्कर ने विष पी लिया, तब देवता और असुरों को बड़ी प्रसन्नता हुई । वे फिर… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय समुद्रमन्थन का आरम्भ और भगवान् शङ्कर का विषपान श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! देवताओं और असुरों ने नागराज वासुकि को यह वचन देकर कि समुद्रमन्थन से प्राप्त होनेवाले अमृत में तुम्हारा भी हिस्सा रहेगा, उन्हें… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय देवताओं और दैत्यों का मिलकर समुद्रमन्थन के लिये उद्योग करना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवताओं ने सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीहरि की इस प्रकार स्तुति की, तब वे उनके बीच में ही प्रकट हो गये… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय देवताओं का ब्रह्माजी के पास जाना और ब्रह्माकृत भगवान् की स्तुति श्री शुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् की यह गजेन्द्रमोक्ष की पवित्र लीला समस्त पापों का नाश करनेवाली है । इसे मैंने तुम्हें सुना… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय गज और ग्राह का पूर्वचरित्र तथा उनका उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! उस समय ब्रह्मा, शङ्कर आदि देवता, ऋषि और गन्धर्व श्रीहरि भगवान् के इस कर्म की प्रशंसा करने लगे तथा उनके ऊपर फूलों… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – अष्टम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय गजेन्द्र के द्वारा भगवान् की स्तुति और उसका संकट से मुक्त होना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अपनी बुद्धि से ऐसा निश्चय करके गजेन्द्र ने अपने मन को हृदय में एकाग्र किया और फिर पूर्वजन्म… Read More