शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 18 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय शिवमन्दिर में दीपदान के प्रभाव से पापमुक्त होकर गुणनिधि का दूसरे जन्म में कलिंगदेश का राजा बनना और फिर शिवभक्ति के कारण कुबेर पद की प्राप्ति ब्रह्माजी बोले — उन वृत्तान्तों को सुनकर वह दीक्षितपुत्र अपने भाग्य की निन्दा… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 17 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय यज्ञदत्त के पुत्र गुणनिधि का चरित्र सूतजी बोले — हे मुनीश्वरो ! ब्रह्माजी की यह बात सुनकर नारदजी ने विनयपूर्वक उन्हें प्रणाम करके पुनः पूछा — ॥ १ ॥ नारदजी बोले — भक्तवत्सल भगवान् शंकर कैलासपर्वत पर कब गये… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 16 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय ब्रह्माजी की सन्तानों का वर्णन तथा सती और शिव की महत्ता का प्रतिपादन ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! तदनन्तर मैंने शब्द आदि सूक्ष्मभूतों का स्वयं ही पंचीकरण करके उनसे स्थूल आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथिवी की सृष्टि की… Read More
वृहद् महामृत्युञ्जय मालामन्त्र ॥ वृहद् महामृत्युञ्जय मालामन्त्र ॥ यह मालामन्त्र सूर्य, ब्रह्मा, विष्णु एवं त्र्यम्बक का समष्टि मन्त्र है । एवं इसके साथ चतुष्पाद गायत्री का संयोजन करके प्रभाव को विशेष ओजोमय बना दिया है ।… Read More
महामृत्युञ्जय (मृत संजीवनी) मंत्रस्य (५२ अक्षरात्मक) ॥ महामृत्युञ्जय (मृत संजीवनी) मंत्रस्य (५२ अक्षरात्मक) ॥ मन्त्र महोदधि में कहा गया है : पाप एवं विपत्ति को दूर करनेवाले महामृत्युञ्जय मन्त्र को बतलाता हूं जिसे भगवान शङ्कर से प्राप्त करके शुक्राचार्य ने मरे हुये दैत्यों को जीवित किया था। मन्त्र इस प्रकार है- मन्त्र – “ॐ हौं ॐ जूं सः भूर्भुवः स्वः त्र्यम्बकं… Read More
महामृत्युञ्जय (मृत संजीवनी) मंत्रस्य विधानम् ॥ महामृत्युञ्जय (मृत संजीवनी) मंत्रस्य विधानम् ॥ विनियोग :- ॐ अस्य श्री मृतसंजीवनी महामृत्युञ्जय मन्त्रस्य वामदेव, कहोल वसिष्ठऋषिः पंक्ति, गायत्री अनुष्टप् छन्दः श्रीमहामृत्युञ्जयरुद्रो देवताः, हौं बीजं, जूं शक्ति, सः कीलकं श्रीमृत्युञ्जय देवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः :- वामदेव कहोल वसिष्ठ ऋषये नमः शिरसि । पंक्ति गायत्री अनुष्टप्छन्दसे नमः मुखे । श्रीमहामृत्युञ्जय रुद्रदेवतायै नमः हृदये… Read More
शताक्षरी मृत्युञ्जय प्रयोगः ॥ अथ शताक्षरी मृत्युञ्जय प्रयोगः ॥ विनियोगः – ॐ अस्य श्री शताक्षरी गायत्रीमन्त्रस्य विश्वामित्र मरीचि कश्यप वसिष्ठ ऋषयो गायत्री त्रिष्टप् अनुष्टप्छन्दासि सवितृ जातवेदस्त्र्यम्बका देवता गायत्र्यक्षराणि बीजानि अनुष्टबक्षराणि शक्तयस्त्रिष्टुबक्षराणि कीलकानि ममारिष्टशान्तये जपे विनियोगः ।… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 15 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय सृष्टि का वर्णन नारदजी बोले — हे महाभाग ! हे विधे ! हे देवश्रेष्ठ ! आप धन्य हैं । आपने आज यह शिव की परमपावनी अद्भुत कथा सुनायी ॥ १ ॥ इसमें सदाशिव की लिंगोत्पत्ति की जो कथा हमने… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 14 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय विभिन्न पुष्पों, अन्नों तथा जलादि की धाराओं से शिवजी की पूजा का माहात्म्य ऋषिगण बोले — हे महाभाग ! हे व्यासशिष्य ! आप सप्रमाण हमें यह बतायें कि किन-किन पुष्पों से पूजन करने पर भगवान् सदाशिव कौन-कौन-सा फल प्रदान… Read More
त्रि-त्रिंशदक्षर त्र्यम्बक मन्त्र प्रयोगः ॥ त्रि-त्रिंशदक्षर त्र्यम्बक मन्त्र प्रयोगः ॥ शारदातिलक मन्त्र:- “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥” ऋचा के पहले ॐ लगायें । आगे व पीछे दोनों ओर ॐ लगाने से ३४ अक्षर का मन्त्र हुआ । विनियोगः – ॐ अस्य त्र्यम्बक मन्त्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, अनुष्टप् छन्दः त्र्यम्बकपार्वतीपतिर्देवता, त्र्यं बीजं, बं शक्तिः, कं कीलकं… Read More