शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय ब्रह्मा की मानसपुत्री कुमारी सन्ध्या का आख्यान सूतजी बोले — हे महर्षियो ! ब्रह्माजी के इस वचन को सुनकर मुनिश्रेष्ठ [नारद] प्रसन्नचित्त होकर शंकरजी का स्मरण करके आनन्दपूर्वक कहने लगे — ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय कामदेव के विवाह का वर्णन नारदजी बोले — हे विष्णुशिष्य ! हे महाप्राज्ञ ! हे विधे ! संसार की रचना करनेवाले हे प्रभो ! आपने शिवजी की लीलारूपी अमृत से युक्त यह अद्भुत कथा कही ॥ १ ॥ हे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय कामदेव को विविध नामों एवं वरों की प्राप्ति, काम के प्रभाव से ब्रह्मा तथा ऋषिगणों का मुग्ध होना, धर्म द्वारा स्तुति करने पर भगवान् शिव का प्राकट्य और ब्रह्मा तथा ऋषियों को समझाना, ब्रह्मा तथा ऋषियों से अग्निष्वात्त आदि… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय सदाशिव से त्रिदेवों की उत्पत्ति, ब्रह्माजी से देवता आदि की सृष्टि के पश्चात् देवी सन्ध्या तथा कामदेव का प्राकट्य सूतजी बोले — हे नैमिषारण्यनिवासी मुनियो ! [ब्रह्मा के] इस वचनको सुनकर नारद ने पुनः पापों को नष्ट करनेवाली कथा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय सती चरित्र वर्णन, दक्षयज्ञविध्वंस का संक्षिप्त वृत्तान्त तथा सती का पार्वतीरूप में हिमालय के यहाँ जन्म लेना नारदजी बोले — हे विधे ! भगवान् शंकर की कृपा से आप सब कुछ जानते हैं । आपने शिव और पार्वती की… Read More


॥ श्रीमहाकालसहस्रनामस्तोत्रम् ॥ श्रीप्रकृष्टनन्दोक्तागमे ॥ ऋषिरुवाच ॥ महाकालसहस्रं तु श्रोतुमिच्छामि सुव्रत! । कथयस्व प्रसादेन शिष्याय वक्तुमर्हसि ॥ १ ॥ ॥ सूत उवाच ॥ सुधामयः सुतः श्रीमान् सुदामा नाम वै द्विजः । तेन गोपीपतिः कृष्णो विद्यामभ्यसितुङ्गतः ॥ २ ॥ सान्दीपनान्तिकेऽवन्त्यां गतौ तौ पठनार्थिनौ । चतुःषष्टिः कलाः सर्वाः कृता विद्याश्चतुर्दश ॥ ३ ॥ एकदा प्राह कृष्णं स… Read More


॥ महाकालस्तुतिः ॥ ॥ ब्रह्मोवाच ॥ नमोऽस्त्वनन्तरूपाय नीलकण्ठ नमोऽस्तु ते । अविज्ञातस्वरूपाय कैवल्यायामृताय च ॥ १ ॥ नान्तं देवा विजानन्ति यस्य तस्मै नमो नमः । यं न वाचः प्रशंसन्ति नमस्तस्मै चिदात्मने ॥ २ ॥… Read More


॥ श्रीमहाकाल ककाराद्यष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् ॥ कैलास शिखरे रम्ये, सुखासीनं जगद्गुरुं । प्रणम्य परया भक्त्या, पार्वती परिपृच्छति ॥ ॥ श्रीपार्वत्युवाच ॥ त्वत्तः श्रुतं पुरा देव, भैरवस्य महात्मनः । नाम्नामष्टोत्तरं शतं, ककरादिमभीष्टदम् ॥ गुह्याद् गुह्यतरं गुह्यं, सर्वाभीष्टार्थ साधकम् । तन्मे वदस्व देवेश ! यद्यहं तव वल्लभा ।… Read More


॥ श्रीमहाकालस्तोत्रम् ॥ दृष्ट्वा देवं महाकालं कालिकाङ्गं महाप्रभुम् । भार्गवः पतितो भूमौ दण्डवत्सुरपूजिते ॥ १ ॥ ॥ भार्गव उवाच ॥… Read More


॥ श्रीमहाकाल स्तोत्रम् ॥ ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पते । महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते ॥ महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो । महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते ॥… Read More