॥ अथ शिव पञ्चावरण देवानां स्तुतिः ॥ इस स्तोत्र में रुद्र यन्त्र में वर्णित पूजा का वृहत् कर्म है जो व्यक्ति नित्य रुद्र यन्त्र का अर्चन करने में असमर्थ हैं वे यदि इस स्तोत्र का पाठ करें तो उसे यन्त्रार्चन का पूर्ण फल मिलता है । स्तोत्रं वक्षामि ते कृष्ण पंचावरणमार्गतः । योगेश्वरमिदं पुण्यं कर्म… Read More


॥ अथ त्र्यक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र विविध प्रयोगः ॥ बहुधा मृत्युञ्जय प्रयोग रोग-पीड़ा निवारण में ही करते हैं । ग्रहपीड़ा शमन में भी शुभ है । शिव प्रतिमा व शिवलिङ्ग पर अलग-अलग कामना के लिये अलग-अलग अभिषेक द्रव्य हैं । अभिचार व प्रेतादि दोष में सरसों के तेल का अभिषेक, उष्णज्वर, टाईफाईड में दही की छाछ… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय नारदजी का शिवतीर्थों में भ्रमण, शिवगणों को शापोद्धार की बात बताना तथा ब्रह्मलोक में जाकर ब्रह्माजी से शिवतत्त्व के विषय में प्रश्न करना सूतजी बोले — महर्षियो ! भगवान् श्रीहरि के अन्तर्धान हो जाने पर मुनिश्रेष्ठ नारद शिवलिंगों का… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय नारदजी का भगवान् विष्णु को क्रोधपूर्वक फटकारना और शाप देना, फिर माया के दूर हो जाने पर पश्चात्तापपूर्वक भगवान् के चरणों में गिरना और शुद्धि का उपाय पूछना तथा भगवान् विष्णु का उन्हें समझा-बुझाकर शिव का माहात्म्य जानने के… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [ प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय मायानिर्मित नगर में शीलनिधि की कन्या पर मोहित हुए नारदजी का भगवान् विष्णु से उनका रूप माँगना, भगवान् का अपने रूप के साथ वानरका-सा मुँह देना, कन्या का भगवान् को वरण करना और कुपित हुए नारद का शिवगणों… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय नारद मुनि की तपस्या, इन्द्र द्वारा तपस्या में विघ्न उपस्थित करना, नारद का काम पर विजय पाना और अहंकार से युक्त होकर ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र से अपने तप का कथन सूतजी बोले — [हे मुनियो!] एक समय की… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [ प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय ऋषियों के प्रश्न के उत्तर में श्रीसूतजी द्वारा नारद-ब्रह्म-संवाद की अवतारणा विश्वोद्भवस्थितिलयादिषु हेतुमेकं गौरीपतिं विदिततत्त्वमनन्तकीर्तिम् । मायाश्रयं विगतमायमचिन्त्यरूपं बोधस्वरूपममलं हि शिवं नमामि ॥ जो विश्व की उत्पत्ति-स्थिति और लय आदि के एकमात्र कारण हैं, गिरिराजकुमारी उमा के पति… Read More


॥ श्री रुद्र कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ विनियोग- ॐ अस्य श्री रुद्र कवच स्तोत्र महा मंत्रस्य दूर्वासऋषिः अनुष्ठुप् छंदः त्र्यंबक रुद्रो देवता ह्रां बीजं श्रीं शक्तिः ह्रीं कीलकम् – मम मनसोभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ह्रामित्यादिषड्बीजैः षडंगन्यासः ॥ ॥ ध्यानम् ॥… Read More


॥ ब्रह्माण्डविजय श्री शिव कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ ॥ नारद उवाच ॥ शिवस्य कवचं ब्रूहि मत्स्य राजेन यद्धृतम् । नारायण महाभाग श्रोतुं कौतूहलं मम ॥ १ ॥ ॥ श्रीनारायण उवाच ॥… Read More


॥ सदाशिव प्रासादख्यमन्त्रकवचम् ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरव उवाच ॥ शैलजे देवदेवेशि सर्वाम्नायप्रपूजिते । सर्वं मे कथितं देवि कवचं न परकाशितम् ॥ १ ॥ प्रासाद्याख्यस्य मन्त्रस्य कवचं मे प्रकाशय । सदाशिवमहादेवभावितं सिद्धिदायकम् ॥ २ ॥ अप्रकाश्यं महामन्त्रं भैरवीभैरवोदयम् । सर्वरक्षाकरं देवि यदि स्नेहोऽस्ति मां प्रति ॥ ३ ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरवी उवाच ॥… Read More