॥ विघ्न-निवारकं सिद्धिविनायक स्तोत्रम् ॥ विघ्नेश विघ्नचयखण्डननामधेय श्रीशङ्करात्मज सुराधिपवन्द्यपाद । दुर्गामहाव्रतफलाखिलमङ्गलात्मन् विघ्नं ममापहर सिद्धिविनायक त्वम् ॥ १ ॥… Read More


॥ उच्छिष्ट गणेशस्तवराजः ॥ ॥ देव्युवाच ॥ पूजान्ते ह्यनया स्तुत्या स्तुवीत गणनायकम् । नमामि देवं सकलार्थदं तं सुवर्णवर्णं भुजगोपवीतम् । गजाननं भास्करमेकदन्तं लम्बोदरं वारिभवासनं च ॥ १ ॥… Read More


॥ श्रीउच्छिष्ट गणपति सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीभैरव उवाच ॥ श‍ृणु देवि रहस्यं मे यत्पुरा सूचितं मया । तव भक्त्या गणेशस्य वक्ष्ये नामसहस्रकम् ॥ १॥ ॥ श्रीदेव्युवाच ॥ ॐ भगवन्गणनाथस्य उच्छिष्टस्य महात्मनः । श्रोतुं नाम सहस्रं मे हृदयं प्रोत्सुकायते ॥ २॥… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 05 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पाँचवाँ अध्याय मेना की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी का उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन देकर वरदान देना, मेना से मैनाक का जन्म नारदजी बोले —  हे तात ! जब देवी दुर्गा अन्तर्धान हो गयीं और देवगण अपने-अपने धाम को चले गये, उसके… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 04 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौथा अध्याय उमादेवी का दिव्यरूप में देवताओं को दर्शन देना और अवतार ग्रहण करने का आश्वासन देना ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] इस प्रकार देवताओं के द्वारा स्तुति किये जाने पर दुर्ग नामक राक्षस के द्वारा उत्पन्न संकट का नाश करनेवाली… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 03 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसरा अध्याय विष्णु आदि देवताओं का हिमालय के पास जाना, उन्हें उमाराधन की विधि बता स्वयं भी देवी जगदम्बा की स्तुति करना नारदजी बोले — हे विधे ! हे प्राज्ञ ! हे महाबुद्धिमान् ! हे वक्ताओं में श्रेष्ठ ! इसके बाद… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 02 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दूसरा अध्याय पितरों की तीन मानसी कन्याओं – मेना, धन्या और कलावती के पूर्वजन्म का वृत्तान्त तथा सनकादि द्वारा प्राप्त शाप एवं वरदान का वर्णन नारदजी बोले — हे महाप्राज्ञ ! हे विधे ! अब आदरपूर्वक मेना की उत्पत्ति का वर्णन… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 01 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पहला अध्याय पितरों की कन्या मेना के साथ हिमालय के विवाह का वर्णन नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! अपने पिता के यज्ञ में शरीर का त्यागकर दक्षकन्या सती देवी जगदम्बा किस प्रकार हिमालय की पुत्री बनीं और किस तरह अत्यन्त… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 43 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तैंतालीसवाँ अध्याय भगवान् शिव का दक्ष को अपनी भक्तवत्सलता, ज्ञानी भक्त की श्रेष्ठता तथा तीनों देवों की एकता बताना, दक्ष का अपने यज्ञ को पूर्ण करना, देवताओं का अपने-अपने लोकों को प्रस्थान तथा सतीखण्ड का उपसंहार और माहात्म्य ब्रह्माजी बोले —… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [द्वितीय-सतीखण्ड] – अध्याय 42 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बयालीसवाँ अध्याय भगवान् शिव का देवता आदिपर अनुग्रह, दक्षयज्ञ-मण्डप में पधारकर दक्ष को जीवित करना तथा दक्ष और विष्णु आदि द्वारा शिव की स्तुति ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] मुझ ब्रह्मा, लोकपाल, प्रजापति तथा मुनियोंसहित विष्णु के अनुनय-विनय करने पर परमेश्वर… Read More