शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय वरांगी के पुत्र तारकासुर की उत्पत्ति, तारकासुर की तपस्या एवं ब्रह्माजी द्वारा उसे वरप्राप्ति, वरदान के प्रभाव से तीनों लोकों पर उसका अत्याचार ब्रह्माजी बोले — तदनन्तर वरांगी ने आदरपूर्वक गर्भ धारण किया । वह बहुत वर्षों तक परम… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय तारकासुर की उत्पत्ति के प्रसंग में दितिपुत्र वज्रांग की कथा, उसकी तपस्या तथा वरप्राप्ति का वर्णन नारदजी बोले — हे विष्णुशिष्य ! हे महाशैव ! हे विधे ! आपने यह शिवा एवं शिवजी के परम पवित्र चरित्र का अच्छी… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय पार्वती और परमेश्वर का दार्शनिक संवाद, शिव का पार्वती को अपनी सेवा के लिये आज्ञा देना, पार्वती का महेश्वर की सेवा में तत्पर रहना भवानी बोलीं — हे योगिन् ! आपने तपस्वी होकर भी मेरे पिता से क्या कह… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 12 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बारहवा अध्याय हिमवान् का पार्वती को शिव की सेवामें रखने के लिये उनसे आज्ञा माँगना, शिव द्वारा कारण बताते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर देना ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] तदनन्तर शैलराज हर्षित होकर उत्तम फल-फूल का समूह लेकर अपनी… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 11 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः ग्यारहवाँ अध्याय भगवान् शिव का तपस्या के लिये हिमालय पर आगमन, वहाँ पर्वतराज हिमालय से वार्तालाप ब्रह्माजी बोले — हिमालय की वह लोकपूजित पुत्री पार्वती उनके घर में बढ़ती हुई जब आठ वर्ष की हो गयी, तब हे नारद ! उसका… Read More


॥ हेरम्बोपनिषत् ॥ ॐ सहनाववतु । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अथातो हेरम्बोपनिषदं व्याख्यास्यामः । गौरी सा सर्वमङ्गला सर्वज्ञं परिसमेत्योवाच । अधीहि भगवन्नात्मविद्यां प्रशस्तां यया जन्तुर्मुच्यते मायया च । यतो दुःखाद्विमुक्तो याति लोकं परं शुभ्रं केवलं सात्विकं च ॥ १॥… Read More


॥ गौरिकृतम् हेरम्बस्तोत्रं ॥ ॥ गौर्युवाच ॥ गजानन ज्ञानविहारकारिन्न मां च जानासि परावमर्षाम् । गणेश रक्षस्व न चेच्छरीरं त्यजामि सद्यस्त्वयि भक्तियुक्ता ॥ १ ॥ विघ्नेश हेरम्ब महोदर प्रिय लम्बोदर प्रेमविवर्धनाच्युत । विघ्नस्य हर्ताऽसुरसङ्घहर्ता मां रक्ष दैत्यात्वयि भक्तियुक्ताम् ॥ २ ॥… Read More


॥ महागणपति मंत्रः ॥ मंत्र – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा । यह मन्त्र संसार का वशीकरण कर सर्वसिद्धि देने वाला है । विनियोगः- ॐ अस्य श्री महागणपति मंत्रस्य गणक ऋषिः (शिरसि), निवृद गायत्री छन्दः (मुखे), महागणपतये देवताये (हृदि), सर्वाभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।… Read More


गणेशजी  शाबर मंत्र प्रयोग १ – निम्न मंत्र का पाठ प्रति दिन तीन बार करने से विद्या, बुद्धि की प्राप्ति होती है । मंत्रः— जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश पाहि माम । जय गणेश जय गणेश, जय गणेश रक्ष माम । जय सरस्वती, जय सरस्वती जय सरस्वती पाहि माम । जय अम्बे, जय अम्बे,… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 10 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दसवाँ अध्याय शिवजी के ललाट से भौमोत्पत्ति नारदजी बोले — हे विष्णुशिष्य ! हे महाभाग ! हे विधे ! हे शिवभक्तों में श्रेष्ठ ! हे प्रभो ! आप शिवजी की इस लीला को प्रीतिपूर्वक विस्तार से मुझसे कहिये ॥ १ ॥… Read More