शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 35 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पैंतीसवाँ अध्याय धर्मराज द्वारा मुनि पिप्पलाद की भार्या सती पद्मा के पातिव्रत्य की परीक्षा, पद्मा द्वारा धर्मराज को शाप प्रदान करना तथा पुनः चारों युगों में शाप की व्यवस्था करना, पातिव्रत्य से प्रसन्न हो धर्मराज द्वारा पद्मा को अनेक वर प्रदान… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 34 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौंतीसवाँ अध्याय सप्तर्षियों द्वारा हिमालय को राजा अनरण्य का आख्यान सुनाकर पार्वती का विवाह शिव से करने की प्रेरणा देना वसिष्ठजी बोले — [हे गिरिश्रेष्ठ!] इन्द्रसावर्णि नामक चौदहवें मनु के वंश में वह अनरण्य नामक राजा उत्पन्न हुआ था ॥ १… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 33 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तैंतीसवाँ अध्याय वसिष्ठपत्नी अरुन्धती द्वारा मेना को समझाना तथा सप्तर्षियों द्वारा हिमालय को शिवमाहात्म्य बताना ऋषि बोले — [हे हिमालय!] शिवजी जगत् के पिता कहे गये हैं और पार्वती जगत् की माता मानी गयी हैं । इसलिये आप अपनी कन्या महात्मा… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 32 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बत्तीसवाँ अध्याय ब्राह्मण-वेषधारी शिव द्वारा शिवस्वरूप की निन्दा सुनकर मेना का कोपभवन में गमन, शिव द्वारा सप्तर्षियों का स्मरण और उन्हें हिमालय के घर भेजना, हिमालय की शोभा का वर्णन तथा हिमालय द्वारा सप्तर्षियों का स्वागत ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!]… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 31 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इकतीसवाँ अध्याय देवताओं के कहने पर शिव का ब्राह्मण-वेष में हिमालय के यहाँ जाना और शिव की निन्दा करना ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! इस प्रकार मेना और शैलराज की शिव में अनन्य भक्ति देखकर इन्द्र आदि सभी देवताओं ने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 30 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तीसवाँ अध्याय पार्वती के पिता के घर में आनेपर महामहोत्सव का होना, महादेवजी का नटरूप धारणकर वहाँ उपस्थित होना तथा अनेक लीलाएँ दिखाना, शिव द्वारा पार्वती की याचना, किंतु माता-पिता के द्वारा मना करने पर अन्तर्धान हो जाना नारदजी बोले —… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 29 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उनतीसवाँ अध्याय शिव और पार्वती का संवाद, विवाहविषयक पार्वती के अनुरोध को शिव द्वारा स्वीकार करना नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे ! हे महाभाग ! इसके बाद फिर क्या हुआ ? मैं वह सब सुनना चाहता हूँ, आप… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 28 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अट्ठाईसवाँ अध्याय पार्वती द्वारा परमेश्वर शिव की महत्ता प्रतिपादित करना और रोषपूर्वक जटाधारी ब्राह्मण को फटकारना, शिव का पार्वती के समक्ष प्रकट होना पार्वतीजी बोलीं — मैं तो यही समझती थी कि यह कोई अन्य ही आया है, किंतु अब मैंने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 27 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्ताईसवाँ अध्याय जटाधारी ब्राह्मण द्वारा पार्वती के समक्ष शिवजी के स्वरूप की निन्दा करना पार्वती बोलीं — हे द्विजेन्द्र ! हे जटिल ! मेरा समस्त वृत्तान्त सुनें । इस समय मेरी सखी ने जो कुछ भी कहा है, वह सब सत्य… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 26 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छब्बीसवाँ अध्याय पार्वती की परीक्षा लेने के लिये भगवान् शिव का जटाधारी ब्राह्मण का वेष धारणकर पार्वती के समीप जाना, शिव-पार्वती-संवाद ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! उन मुनियों के अपने-अपने लोक चले जाने पर जगत्स्रष्टा प्रभु शिव ने स्वयं पार्वती… Read More