श्रीकृष्ण – दशाक्षर मन्त्र प्रयोगः ॥ श्रीकृष्ण – दशाक्षर मन्त्र प्रयोगः ॥ दशाक्षर मन्त्र – “गोपीजन वल्लभाय स्वाहा ।” श्रीकृष्णमन्त्र – गोपीजनवल्लभाय स्वाहा — यह श्रीकृष्ण का दशाक्षर मन्त्र है । इससे दृष्टादृष्ट सभी प्रकार के फल प्राप्त होते हैं । ऐहिक और पारलौकिक दोनों ही शुभ फल प्राप्त होते हैं । इस मन्त्र के पहले ‘क्लीं’ बीज लगाकर ‘क्लीं… Read More
श्रीकृष्ण – अष्टाक्षर मन्त्र ॥ श्रीकृष्ण – अष्टाक्षर मन्त्र ॥ 1. मन्त्रः- क्लीं हृषीकेशाय नमः । हृषिकेश-पद डेऽन्त नमोऽन्त काम-पूर्वक अष्टाक्षरो मनु प्रोक्त समस्त पुरुषार्थद – (बृहद् तन्त्रसार, मन्त्र महोदधि) विनियोग- अस्य श्रीगोविन्दमन्त्रस्य त्रैलोक्यमोहनाख्य ऋषिर्गायत्री छन्दः त्रैलोक्यमोहनो देवताऽभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- श्रीगोविन्दमन्त्रस्य त्रैलोक्यमोहनाख्य ऋषये नमः शिरसि । गायत्री छन्दसे नमः मुखे । त्रैलोक्यमोहनो देवताय नमः हृदि । विनियोगाय… Read More
पाशुपतास्त्र प्रयोगः ॥ पाशुपतास्त्र प्रयोगः ॥ भगवान शिव का पशुपति प्रयोग ग्रह बाधा, क्षुद्र रोग, पशुता (जड़ता) का नाश करने वाला प्रज्ञा एवं बुद्धि प्रदाता तथा पालनकर्ता एवं प्रबल संहारक मंत्र है । अति आवश्यकता में ही शत्रुसंहार हेतु प्रयोग किया जाता है । मन्त्रोद्धार – तारो (ॐ) वान्तो (श) धरा (ल) संस्थो, वामनेत्रन्दु भूषितः (ईकार विन्दु)… Read More
अघोरास्त्र मन्त्र प्रयोगः ॥ अघोरास्त्र मन्त्र प्रयोगः ॥ सामान्य क्रम में अश्वशान्ति, गजशांति, महामारी, राजकीय उपद्रव, प्रेत, शत्रुबाधा असामयिक गर्भपात शान्ति हेतु इस मन्त्र का प्रयोग किया जा सकता है । इसके साथ में शिवपूजा, ईशानदि देवों का पूजन करना चाहिये । शारदा तिलक व अग्निपुराण में इनका विधान है । ॥ अघोरास्त्र मंत्र ॥ “ह्रीं स्फुर स्फुर… Read More
अर्द्धनारीश्वर ॥ अर्द्धनारीश्वर ॥ (शिव तन्त्रे) मंत्र – (षडाक्षर) ‘रक्षं मं यं औं ऊं’ (मतांतरे शारद तिलके – ऊः) विनियोग – ॐ अर्द्धनारीश्वर मंत्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टप् छंदः अर्द्धनारीश्वर देवता सर्वाभीष्ट सिद्धये जपे विनियोगः । ऋषिन्यासः – कश्यप ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टप् छंदसे नमः मुखे, अर्द्धनारीश्वर देवतायै नमः हृदि, विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे । अङ्गन्यासः – मंत्र… Read More
मंजुघोष प्रयोगः ॥ अथ मंजुघोष प्रयोगः ॥ मंजुघोष का प्रयोग शिव प्रयोगों में विद्या प्राप्ति हेतु विशेष माना जाता है । इस . विषय में शिव कहते है – श्रुणु देवि ! महामंत्रं साधकानां सुखावहम् । यज्ज्ञात्वा जड़धीः प्रायो वाचस्पति समो भवेत् ॥ जपेत् सिद्धिप्रदं सद्यो वैष्णवं सात्विकात्मकम् । शैवसिद्धिप्रदं सद्यस्तामसं समुदाहृतम् ॥ अर्थात् इसकी सात्विक उपासना… Read More
वीरभद्र मंत्र प्रयोगः ॥ वीरभद्र मंत्र प्रयोगः ॥ शत्रुनाश हेतु विशेष प्रयोग विधि भैरव प्रपंचसार तंत्र व आकाशभैरव कल्पादि तंत्रो में देखें। विनियोग:- अस्य श्री वीरभद्र मंत्रस्य ब्रह्माऋषिः, अनुष्टुप्छंदः, वीरभद्रोदेवता सर्वशत्रुक्षयार्थे जपे विनियोगः । मंत्र: – (३२ अक्षरात्मक) “ॐ वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोपं सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा ।” षडङ्गन्यासः – ॐ वीरभद्राय हृदयाय नमः । अतिक्रूराय शिरसे… Read More
तुम्बुरू शिव ॥ तुम्बुरू शिव ॥ (शारदा तिलक) एकाक्षर मंत्र: – ( मंत्रोद्धार) क्षकारोमाग्नि पवनवामकर्णार्द्ध चन्द्रवान । क्ष्+म्+र्+यूँ = क्ष्म्र्यूँ विनियोग – अस्य मंत्रस्य काश्यप ऋषिः, अनुष्टप् छंदः, तुम्बुरू शिव देवता, रं बीजं, ॐ शक्तिं सर्वसमृद्धि हेतुवे जपे विनियोगः । षड़ङ्गन्यासः – षड् दीर्धभाजा बीजेन षड़ङ्गानिप्रकल्पयेत् । अर्थात बीज मंत्र के षड् दीर्घो से न्यास करें यथा… Read More
अमृतेश्वरी मन्त्र प्रयोगः ॥ अमृतेश्वरी मन्त्र प्रयोगः ॥ पुरुष देवता के साथ उसकी शक्ति देवता का पूजन करने से पूर्णाङ्ग होता है । स्त्री देवता के साथ पुरुष देवता का पूजन-अर्चन भी आवश्यक है । यदि पुरुष देवता के एक लक्ष जप किये जाये तो उसके दशांश जप (दस हजार) उसकी स्त्री देवता के करने आवश्यक है ।… Read More
सर्वरोगनाशक धर्मराज मन्त्र विधानम् ॥ सर्वरोगनाशक धर्मराज मन्त्र विधानम् ॥ (मन्त्रमहोदधि ग्रन्थ में इसका संक्षिप्त विधान है।) संकल्प – मम सकलापदां विनाशनाय सर्वरोगाणां प्रशमनार्थे श्रीधर्मराज मन्त्र जपमहं करिष्ये। करन्यास – हृदयादिन्यास की तरह करें । ॐ क्रों ह्रीं हृदयाय नमः । ॐ आं वैं शिरसे स्वाहा । ॐ वैवस्वताय श्खिायै वषट् । ॐ धर्मराजाय कवचाय हुँ । ॐ भक्तानुग्रहकृते… Read More