गुह्यकाली विविध मन्त्र 02 ॥ गुह्यकाली विविध मन्त्र 02 ॥ See Also :- गुह्यकाली विविध मन्त्र 01 ३३ – शिवोपास्यायुताक्षर मन्त्रः —… Read More
कामकलाकालि पूजाऽर्चा विधानम् ॥ अथ कामकलाकालि पूजाऽर्चा विधानम् ॥ पूर्वोक्त ध्यान मन्त्रों से देवी का आवाहन कर षोडशोपचार से पूजन कर बलि प्रदान करें । आवाहन – ॐ ह्रीं क्लीं आं कामकलाकालि देवि आगच्छ आगच्छ तिष्ठ तिष्ठ पूजां गृहाण गृहाण स्वाहा । आवाहन कर पुष्पांजलि प्रदान करें – एष पुष्पाञ्जलिः क्लीं कामकलाकाल्यै नमः । अर्घ्यादि प्रदान करें –… Read More
कामकलाकाल्याः विविध मन्त्राः ॥ कामकलाकाल्याः विविध मन्त्राः ॥ १. मरीचिसमुपासिताया सप्तदशाक्षर मन्त्रः- ओं ऐं ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं हूं छ्रीं स्त्रीं फ्रें क्रों हौं क्षौं आं स्फ्रों स्वाहा । २. कपिलोपास्याया षोडशाक्षर मन्त्रः – ह्रीं फ्रें क्रों ग्लूं छ्रीं स्त्रीं हूं स्फ्रों खफ्रें हसफ्रीं हसखफ्रें क्ष्रौं स्हौः फट् स्वाहा ॥ ३. हिरण्याक्षोपासिताया नवाक्षर मन्त्रः- खफ्रें रह्रीं रज्रीं रक्रीं… Read More
कामकला काली ॥ कामकलाकाली ॥ गुह्यकाली का ही प्रतिपादित रूप कामकलाकाली है । कामकलाकाली आद्या शक्ति के भयङ्कर स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है । कामकलाकाली में कामकला तत्त्व एवं कामाख्य योग की परिभावना है । राम, रावण, हनुमानादि उपासकों ने इस विद्या की उपासना की थी । इसकी उपासना श्मशान प्रिय तथा पञ्चमकारयुक्त कही गई है ।… Read More
गुह्यकाली विविध मन्त्र 01 महाकालसंहिताया गुह्यकालीखण्डस्य प्रथमभागे समागताः मूलमन्त्राः १–भरतोपास्यगुह्याल्याः षोडशाक्षरः कीलितमन्त्रः (१।११-१४) ‘ओं ॐ सिद्धिकरालि ह्रीं हूं क्रीं स्त्रीं ॐ नमः स्वाहा’। २- तस्या एवाकीलितः षोडशाक्षरमन्त्रः (१।१५) ‘ओं फ्रें सिद्धि करालि ह्रीं छ्रीं हूं स्त्रीं फ्रें नमः स्वाहा’ । ३–रामोपास्यायाः सप्तदशाक्षरः कीलितमन्त्रः (१।१६-२०) ‘ओं फ्रें सिद्धि हस्ख्फ्रें हस्फ्रें ख्फ्रें करालि ख्फ्रें हस्ख्फ्रें ख्फ्रें फ्रें ओं स्वाहा’ ।… Read More
गुह्यकाली मन्त्रभेदाः तथा विभिन्न गायत्री मंत्राः ॥ गुह्यकाली मन्त्रभेदाः ॥ (१) नवाक्षर विद्या – क़्रीं गुह्ये कालिके क्रीं स्वाहा । (२) चतुर्दशाक्षरी मन्त्र – क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं गुह्ये कालिके स्वाहा । (३) पञ्चदशाक्षरी मन्त्र – हूं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा । (४) षोडशाक्षरी मन्त्र – क्रीं हूं ह्रीं गुह्ये कालिके क्रीं… Read More
“ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा” श्रीराधा-उपासना – देवी भागवत अनुसार ॥ ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा ॥ श्रीराधा-उपासना – देवी भागवत अनुसार भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! सुनो, यह वेदवर्णित रहस्य तुम्हें बताता हूँ । यह सर्वोत्तम एवं परात्पर साररहस्य जिस किसी के सम्मुख नहीं कहना चाहिये । इस रहस्य को सुनकर दूसरों से कहना उचित नहीं है; क्योंकि यह अत्यन्त गुह्य रहस्य है ।… Read More
युगलशरणागति-मन्त्र युगलशरणागति-मन्त्र सारस्वत कल्प से पच्चीसवें कल्प पूर्व की बात है, उस समय नारदजी कश्यपजी के पुत्र होकर उत्पन्न हुए थे । उस समय भी उनका नाम नारद ही था । एक दिन वे भगवान् श्रीकृष्ण का परम तत्त्व पूछने के लिये कैलास पर्वत पर भगवान् शिव के समीप गये । वहाँ उनके प्रश्न करने पर… Read More
श्रीकृष्ण के विभिन्न मन्त्र ॥ श्रीकृष्ण के विभिन्न मन्त्र ॥ * द्वादशाक्षर मन्त्र- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।” (जप-संख्या–१२ लाख) * बालगोपाल अष्टाक्षर मन्त्र- “ॐ गोकुलनाथाय नमः ।” * बालगोपालमन्त्र – (१) ‘ॐ क्लीं कृष्ण क्लीं नमः ।’ (२) ‘ॐ क्लीं कृष्ण क्लीं ।’ * बालगोपाल के अट्ठारह प्रसिद्ध मन्त्र –… Read More
भैरव शाबर मन्त्र भैरव शाबर मन्त्र प्रयोग 1 — निम्न मन्त्र की सिद्धि के लिए किसी भैरव मन्दिर या शिव मन्दिर में मंगलवार या शनिवार के दिन 11 बजे रात्रि के बाद पूरब या उत्तर दिशा में मुंह करके लाल या काला आसन लगाकर पहले भैरव देव की षोडशोपचार पूजा करें । इसके बाद गुड़ से बनी खीर,… Read More