मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद ॥ मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद ॥ मृत्युञ्जयस्त्रिधा प्रोक्त आद्यो मृत्युञ्जयः स्मृतः । मृतसञ्जीवनी चैव महामृत्युञ्जयस्तथा ॥ मृत्युञ्जयः केवलः स्यात् पुटितो व्याहृतित्रयैः । तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितो मृतसञ्जीवनी ॥ तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितैस्तैस्त्र्यम्बकः । महामृत्युञ्जयः प्रोक्तः सर्वमन्त्रविशारदैः ॥ उक्त उद्धार मन्त्रों के अनुसार ‘त्र्यम्बक यजामहे..’ ऋचा को आद्य व अन्त में व्याहृति ‘भूर्भुवः स्वः’ से संपुटित… Read More
मृत्युञ्जय मन्त्र – अन्य मन्त्र ॥ मृत्युञ्जय मन्त्र – अन्य मन्त्र ॥ Continue :- मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद नवाक्षरी मृत्युञ्जय – ॐ जूं सः पालय पालय । दशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्र – ॐ जूं सः मां पालय पालय । (किसी अन्य के लिये ‘मां’ के स्थान पर रोगी का नाम द्वितीया विभक्ति का एक वचन बनाकर जोड़ देना चाहिये) द्वादशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्रः –… Read More
त्र्यक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र विविध प्रयोगः ॥ अथ त्र्यक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र विविध प्रयोगः ॥ बहुधा मृत्युञ्जय प्रयोग रोग-पीड़ा निवारण में ही करते हैं । ग्रहपीड़ा शमन में भी शुभ है । शिव प्रतिमा व शिवलिङ्ग पर अलग-अलग कामना के लिये अलग-अलग अभिषेक द्रव्य हैं । अभिचार व प्रेतादि दोष में सरसों के तेल का अभिषेक, उष्णज्वर, टाईफाईड में दही की छाछ… Read More
दक्षिणामूर्ति शिव मन्त्र ॥ दक्षिणामूर्ति शिव ॥ दक्षिणामूर्ति शिव को तन्त्रों का रचियता माना है । बुद्धि, विवेक व ज्ञान की अभिवृद्धि करने वाले एवं जगद्गुरु है । जिन लोगों को सद्गुरु का आश्रय नहीं मिल पा रहा है वे दक्षिणामूर्ति शिव को गुरु मानकर अपनी साधना को आगे बढ़ा सकते हैं । यदि दीक्षित मन्त्र के अलावा… Read More
त्वरित रुद्रमन्त्र प्रयोगः ॥ अथ त्वरित रुद्रमन्त्र प्रयोगः॥ (हेमाद्रिशांति रत्नेषु) इस मन्त्र का प्रयोग सभी कामनाओं की सिद्धि हेतु तथा विघ्ननाश हेतु किया जाता है । औषधोपचार में यदि दवाकाम नहीं कर रही है तो इसके प्रयोग से मार्गदर्शन होकर रोगी को लाभ प्राप्त होगा । मन्त्रोयथा – ॐ यो रुद्रो ऽग्नौ योऽप्सुय ओषधीषु यो रुद्रो विश्वाभुवनाविवेश तस्मै… Read More
दशाक्षररुद्र मन्त्र विधानम् ॥ अथ दशाक्षररुद्र मन्त्र विधानम् ॥ रुद्रयाग व विशिष्ट साधना में विविध ऋचाओं से न्यास किये जाते है । मन्त्र – ॐ नमो भगवते रुद्राय। विनियोगः – ॐ अस्य श्री रुद्रमन्त्रस्य बोधायन ऋषिः, पंक्ति छन्दः, रुद्रो देवता ममाभिष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ ऋषिन्यासः- ॐ बोधायनर्षये नमः शिरसि, पंक्ति छन्दसे नमः मुखे, रुद्र देवतायै नमः हृदि,… Read More
अष्टाक्षरी शिवमन्त्र प्रयोगः ॥ अष्टाक्षरी शिवमन्त्र प्रयोगः ॥ उमापति (शारदायाम्) मन्त्र – “ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं” । विनियोगः – ॐ अस्य श्रीशिवाष्टाक्षर मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः, पंक्ति छन्दः, उमापतिर्देवता सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोगः । ऋषिन्यासः – ॐ वामदेवर्षये नमः शिरसि, पंक्ति छन्दसे नमः मुखे, उमापतिदेवतायै नमः हृदि, विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ॥… Read More
शिव पञ्चाक्षरी मन्त्र प्रयोगः ॥ अथ शिव पञ्चाक्षरी मन्त्र प्रयोगः ॥ मन्त्र – (शारदायाम्) “नमः शिवाय” एवं षडाक्षरी ” ॐ नमः शिवाय” ऋष्यादि से विनियोग करके न्यास करें – विनियोगः- अस्य मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः, पंक्ति छन्द, ईशान देवता, ॐ बीजाय, नमः शक्तये, शिवायेति कीलकाय, सदाशिव प्रसन्नार्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- ॐ वामदेवर्षये नमः शिरसि । पंक्ति छन्दसे नमः मुखे… Read More
भगवान् शिव के विभिन्न मन्त्र ॥ भगवान् शिव के विभिन्न मन्त्र ॥ एकाक्षरीमंत्र – ‘हौं’ । हिन्दी तन्त्रसार में ऋषि वामदेव, छन्द पंक्ति, देवता सदाशिव कहे गये है । शारदा तिलक में ‘हं’ बीज औं’ शक्ति बतलाया गया है । एकाक्षर चिंतामणि – ‘क्ष्रौं’ । शारदा तिलक के अनुसार यह भगवान शिव के उत्तरवक्त्र से सम्बन्धित है । ऋषि काश्यप,… Read More
गुह्यकाली दैनिककर्म सन्ध्या मन्त्राः ॥ अथ गुह्यकाली दैनिककर्म सन्ध्या मन्त्राः ॥ १. दन्तधावन मन्त्रः — आयुर्बलं यशो वर्चः प्रजाः पशुवसूनि च । ब्रह्मप्रज्ञां च मेघां च तन्नो धेहि वनस्पते ॥ क्लीं फट् । २. मुखप्रक्षालनार्थ जलदानमन्त्रः — ॐ जूं सः । ३. आचमन मन्त्रः — ऐं अमृताय हूं फट् ।… Read More