।। अथ आञ्जनेयास्त्रम् ।। अधुना गिरिजानन्द आञ्जनेयास्त्रमुत्तमम् । समन्त्रं सप्रयोगं च वद मे परमेश्वर ।।१।। ।।ईश्वर उवाच।। ब्रह्मास्त्रं स्तम्भकाधारि महाबलपराक्रम् । मन्त्रोद्धारमहं वक्ष्ये श्रृणु त्वं परमेश्वरि ।।२।। आदौ प्रणवमुच्चार्य मायामन्मथ वाग्भवम् । शक्तिवाराहबीजं व वायुबीजमनन्तरम् ।।३।। विषयं द्वितीयं पश्चाद्वायु-बीजमनन्तरम् । ग्रसयुग्मं पुनर्वायुबीजं चोच्चार्य पार्वति ।।४।। स्फुर-युग्मं वायु-बीजं प्रस्फुरद्वितीयं पुनः । वायुबीजं ततोच्चार्य हुं फट् स्वाहा… Read More


महाकवि श्रीहर्ष और चिन्तामणि मन्त्र बात तो है बारहवीं शताब्दी की, किन्तु लगती है कल की जैसी। वैसा प्रखर पाण्डित्य, उतनी गहराएयों के साथ दार्शनिक अनुशीलन की शक्ति, संस्कृत भाषा पर अद्भुत अधिकार, काव्य-निर्माण की अद्वितीय अप्रतिहत प्रतिज्ञा और कारयित्री तथा भावयित्री प्रतिभाओं का अविछिन्न संगम ‘महाकवि’- “श्रीहर्ष” के रोम-रोम में प्रवाहित हो रहा था।… Read More


अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्र-साधना भगवान् अर्द्ध-नारीश्वर के “चिन्ता-मणि” नामक मन्त्र की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियाँ मिलती है । इसकी साधना विधि निम्न प्रकार है – विनियोगः- ॐ अस्य अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, अर्द्ध-नारीश्वर देवता, सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- शिरसि कश्यप ऋषये नमः, मुखे अनुष्टुप छन्दसे नमः, हृदि अर्द्ध-नारीश्वर देवतायै नमः, अञ्जलौ सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय… Read More


रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग ।। श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्र प्रयोग ।। किसी प्राचीन शिवालय में जाकर गणेश जी की “ॐ गं गणपतये नमः” मन्त्र से षोडशोपचार पूजन करे । तदनन्तर “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र से महा-देव जी की पूजा कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्रस्य श्री कहोल ऋषिः, विराट् छन्दः,… Read More


साबर मन्त्रों को सिद्ध कैसे करें ? ‘साबर’ मन्त्रों की साधना के पूर्व ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र को 21 बार जप लेना चाहिए । इसके बाद अपने अभीष्ट मन्त्र की साधना करें । ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र का जप करते समय ध्यान रखें कि इसका कोई भी शब्द या वर्ण उच्चारण में अशुद्ध न हो । सर्वार्थ-साधक-मन्त्र- “गुरु सठ… Read More


श्रीसाबर-शक्ति-पाठ पूर्व-पीठिका ।। विनियोग ।। श्रीसाबर-शक्ति-पाठ का, भुजंग-प्रयात है छन्द । भारद्वाज शक्ति ऋषि, श्रीमहा-काली काल प्रचण्ड ।। ॐ क्रीं काली शरण-बीज, है वायु-तत्त्व प्रधान । कालि प्रत्यक्ष भोग-मोक्षदा, निश-दिन धरे जो ध्यान ।। ।। ध्यान ।। मेघ-वर्ण शशि मुकुट में, त्रिनयन पीताम्बर-धारी । मुक्त-केशी मद-उन्मत्त सितांगी, शत-दल-कमल-विहारी ।। गंगाधर ले सर्प हाथ में, सिद्धि… Read More


श्री गोरक्ष वल्लभास्तोत्र इस गोरक्ष वल्लभा स्तोत्र का वैसे तो कोई भी विधिवत् पाठ कर फल प्राप्त कर सकता है, किन्तु विद्यार्थियों के लिए यह परम कल्याणकारक है । शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से प्रतिदिन प्रातः-काल ब्रह्म-मुहूर्त्त में उठ जाना चाहिए तथा सूर्योदय से पूर्व स्नानादि से निवृत्त होकर धूले हुए शुद्ध वस्त्रों को… Read More


दत्तात्रेय आसन गायत्री मन्त्रः- आसन ब्रह्मा, आसन विष्णु, आसन इन्द्र, आसन बैठे गुरु गोविन्द । आसन बैठो, धरो ध्यान, स्वामी कथनो ब्रह्म-ज्ञान । अजर आसन, वज्र किवाड़, वज्र वज़ड़े दशम द्वार । जो घाले वज्र घाव, उलट वज्र वाहि को खाव । हृदय मेरे हर बसे, जिसमें देव अनन्त । चौकी हनुमन्त वीर की ।… Read More


दश महाविद्या शाबर मन्त्र सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । ॐ सोऽहं सिद्ध की काया, तीसरा नेत्र त्रिकुटी ठहराया । गगण मण्डल में अनहद बाजा । वहाँ देखा शिवजी बैठा, गुरु हुकम से भितरी बैठा, शुन्य में ध्यान गोरख दिठा । यही ध्यान तपे महेशा, यही ध्यान ब्रह्माजी लाग्या ।… Read More


शरीर रक्षा शाबर मन्त्र मन्त्रः- “वार को वार बाँधें, पार को पार बाँधें, मरघट-मसान बाँधें, जादू-वीर बाँधें, दीठ-मूठ बाँधें, चोरी-छीना बाँधें, भेड़िया-बाघ बाँधें, लखूरी-स्यार बाँधें, बिच्छू और साँप बाँधें, लाइल्लाह का कोट, इल्लाह की खाई, मोहम्मद रसूलिल्लाह की चौकी, हजरत अली की दुहाई ।” प्रयोग एवं विधिः-… Read More