श्रीकार्तवीर्यार्जुन-माला-मन्त्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीकार्तवीर्यार्जुन-माला-मन्त्रस्य दत्तात्रेय ऋषिः । गायत्री छन्दः । श्रीकार्तवीर्यार्जुन देवता । अभीष्ट-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- दत्तात्रेय ऋषये नमः शिरसि । गायत्री छन्दसे नमः मुखे । श्रीकार्तवीर्यार्जुन देवतायै नमः हृदि । अभीष्ट-सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे । पञ्चांग-न्यासः- दत्तात्रेय-प्रियतमाय हृदयाय नमः । महिष्मती-नाथाय शिरसे स्वाहा । रेवा-नदी-जल-क्रीडा-तृप्ताय शिखायै वषट् । हैहयाधोपतये कवचाय… Read More


श्री कामाख्या-मन्त्र-प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीकामाख्या-मन्त्रस्य वह्निक ऋषिः, जगती छन्दः, कामाख्या देवता, प्रणवः शक्तिः अव्यक्तं कीलकं, अमुक-कर्मणि जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- वह्नि-ऋषये नमः शिरसि, जगती-छन्दसे नमः मुखे, कामाख्या-देवतायै नमः हृदये, प्रणव (ॐ) शक्तये नमः पादयोः, अव्यक्तं कीलकाय नमः नाभौ, अमुक-कर्मणि जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे।… Read More


भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न मन्त्र  आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं (१) एकाक्षर कृष्णः क॰ “क्लीं” (हिन्दी-तन्त्रसार / मेरुतन्त्र) ख॰ “ग्लौं” (मेरु-तन्त्र) ग॰ बाल-गोपाल-मन्त्र- “कृः” (हिन्दी-तन्त्रसार) घ॰ बाल-गोपाल-मन्त्र- “कृं” (मेरु-तन्त्र)… Read More


श्री कार्तवीर्यार्जुन दर्पण-प्रयोग घर से भागे हुए व्यक्ति के बारे में यदि पता न चल रहा हो, तब उसकी स्थिति व परिस्थिति जानने के लिए यह प्रयोग किया जा सकता है । वैसे तो इस प्रयोग के द्वारा चोरी गई वस्तुओं तथा उनके चोरों का भी ज्ञान पाया जा सकता है, परन्तु क्योंकि प्रयोग मँहगा… Read More


श्री कार्तवीर्यार्जुन मन्त्र-प्रयोग आज के धन-प्रधान युग में यदि किसी का परिश्रम से कमाया हुआ धन किसी जगह फँस जाए तथा उसकी पुनः प्राप्ति की सम्भावना भी दिखाई न पड़े, तो श्रीकार्तवीर्यार्जुन का प्रयोग अचूक तथा सद्यः फल-दायी होता है । श्रीकार्तवीर्यार्जुन का प्रयोग ‘तन्त्र’-शास्त्र की दृष्टि से बड़े गुप्त बताए जाते हैं । इस… Read More


गायत्री मन्त्र द्वारा प्राण-वायु का संचार जिस प्रकार नाग के मस्तिष्क में मणि स्थित रहती है, उसी प्रकार मानव-मस्तिष्क के ललाट में भी विभूतियों से ओत-प्रोत मणि स्थित है । यह मणि प्राण-वायु के विशेष सञ्चार के प्रभाव से समस्त विभूतियों की किरणों से जगमगा उठती है । गायत्री मन्त्र के साथ उसके प्रत्येक अक्षर… Read More


सौभाग्य-प्राप्ति, वर-वधू-प्राप्ति प्रयोग १॰ प्रातः-काल चम्पा के फूलों से हवन करने से वेश्याओं का वशीकरण होता है । २॰ सायं-काल जल के साथ घिसे हुए चन्दन के साथ नव-मालिका (वासन्ती, नेवारी, सेउती या मोगरा) के फूलों का अथवा पलाश (ढाक, छेवला) के फूलों का त्रि-मधु के साथ हवन करने से, कन्या को उत्तम वर तथा… Read More


सर्व-संकट-हारी-प्रयोग “सर्वा बाधासु घोरासु, घोरासु, वेदनाभ्यर्दितोऽपि। स्मरन् ममैच्चरितं, नरो मुच्यते संकटात्।। ॐ नमः शिवाय।” उपर्युक्त मन्त्र से ‘सप्त-श्लोकी दुर्गा’ का एकादश (११) ‘सम्पुट-पाठ’ करने से सब प्रकार के संकटों से छुटकारा मिलता है।… Read More


सहस्त्राक्षर-मृत्युञ्जय-मालामन्त्र “ॐ नमो भगवते सदाशिवाय सकलतत्त्वात्मकाय सर्वमन्त्ररुपाय सर्वयन्त्राधिष्ठिताय सर्वतन्त्रस्वरुपाय सर्वतत्त्विदूराय ब्रह्मरुद्रावतारिणे नीलकण्ठाय पार्वतीप्रियाय सोमसूर्याग्निलोचनाय भस्मोद्धूलितविग्रहाय महामणिमुकुटधारणाय माणिक्यभूषणाय सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय दक्षाध्वजध्वंसकाय महाकालभेदकाय मूलाधारैकनिलयाय तत्त्वातीताय गंगाधराय सर्वदेवाधिदेवाय षडाश्रयाय वेदान्तसाराय त्रिवर्गसाधनायानेक-कोटिब्रह्माण्डनायकान्त… Read More


संजीवनी-स्तवः अथापरमहं वक्ष्येऽमृत-सञ्जीवनी-स्तवम्, यस्याऽनुष्ठान-मात्रेण मृत्युर्दूरात् पलायते।।१ असाध्याः कष्ट-साध्याश्च महा-रोग-भयंकरा, शीघ्रं नश्यंति पठनात् स्यात् आयुश्च प्रवर्धते।।२ शाकिनी डाकिनी दोषाः कुदृष्टिः ग्रह-शत्रुजा, प्रेत-वेताल-यक्षोत्था बाधा नश्यंति चाखिलाः।।३ दुरितानि समस्तानि नाना-जन्मोद्भवानि च, संसर्गज विकाराणि विलीयन्तेऽस्य पाठतः।।४… Read More