नवाक्षर गणपति-विद्या का जप नवाक्षर गणपति-विद्या का जप ‘विरभद्रोड्डीश तन्त्र’ के अनुसार कुम्हार के चाक की मिट्टी से ‘गणेश-प्रतिमा’ बनाकर पञ्चोपचार (गन्ध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य) से पूजाकर प्रति-दिन ‘नवाक्षर’ गणपति-विद्या ‘ॐ गं गणपतये नमः का १००० जप करे, तो बुद्धि का विकास होता है। एक मास जप करे, तो स्त्री-लाभ होता है। छः मास जप करे, तो… Read More
ऋण-मुक्ति श्रीभैरव-मन्त्र ऋण-मुक्ति श्रीभैरव-मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ऐं क्लीं ह्रीं मम् भैरवाय मम ऋण-विमोचनाय मह्यं महाधन-प्रदाय क्लीं स्वाहा ।” विधिः- रविवार को शुक्ल पक्ष में ‘पुष्य’ या ‘हस्त’ नक्षत्र हो तो उस दिन संकल्प-पूर्वक उक्त मन्त्र का जाप प्रारम्भ करके प्रतिदिन बारह माला २१ तक लगातार करें । रविवार एवं मंगलवार को कन्याओं एवं छोटे बच्चों को मीठा… Read More
ऋण-हरण श्री गणेश-मन्त्र प्रयोग ऋण-हरण श्री गणेश-मन्त्र प्रयोग यह धन-दायी प्रयोग है। यदि प्रयोग नियमित करना हो तो साधक अपने द्वारा निर्धारित वस्त्र में कर सकता है किन्तु, यदि प्रयोग पर्व विशेष मात्र में करना हो, तो पीले रंग के आसन पर पीले वस्त्र धारण कर पीले रंग की माला या पीले सूत में बनी स्फटिक की माला से… Read More
विविध फल-दायिनी श्रीचित्रसेन-साधना विविध फल-दायिनी श्रीचित्रसेन-साधना मन्त्रः- “क्लीं राजन् गन्धर्व-गगनाश्रय-चित्रसेन ! कन्यां प्रयच्छ मे स्वाहा ।” विनियोगः- ॐ अस्य श्रीचित्रसेन-मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः । विराट् छन्दः । गन्धर्व-प्रवर-श्रीचित्रसेन देवता । अभीष्ट-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More
मेधा सूक्त ॥ मेधा सूक्त ॥ यजुर्वेद के ३२वें अध्याय में मेधा-प्राप्ति के कुछ मन्त्र पठित हैं, जो मेधा-परक होने से ‘मेधा-सूक्त’ कहलाते हैं । ‘मेधा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है – धारणा शक्ति (Judgeent Power), प्रज्ञा (WisefulL, Intellect), बुद्धि आदि । मेधा-शक्ति-सम्पन्न व्यक्ति ही ‘मेधावी’ (Intelligent, Brilliant) कहलाता है । ‘मेधा’ बुद्धि की एक शक्ति-विशेष है… Read More
लक्ष्मी – नाम मन्त्र द्वारा हवन ‘श्रीलक्ष्मी’- नाम मन्त्र द्वारा हवन – पूर्व-मुख होकर आसन पर बैठे और अपने पास गन्ध, पुष्प, अक्षत, समानान्यार्घ्य-जल, कुश, काष्ठ आदि पूजन सामग्री रखें । – कुश से काष्ठ आदि सकल सामग्री का मार्जन करें । – भूमि को गो-मय और जल से लीपे । – तीन बार ‘मूल-मन्त्र’ अथवा “श्रीं” – एकाक्षर बीज का… Read More
श्री महा-नवार्ण-मन्त्र साधन-विधि श्री महा-नवार्ण-मन्त्र साधन-विधि गायत्रीः- “ॐ हूं घोर-रावायै विद्महे मुण्ड-मालिन्यै धीमहि तन्नो चामुण्डा प्रचोदयात् ।” विनियोगः- ॐ अस्य श्रीमहा-नवार्ण-मन्त्रस्य श्रीत्रिशिरात्मक ऋषिः, गायत्र्युष्णिगनुष्टुभः छन्दांसि, श्रीमहाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती-त्रिशक्ति-चामुण्डा देवता, ऐं बीजं, ह्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकं, मोक्षार्थे विनियोगः।… Read More
माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र १॰ यह साधना अर्द्ध-रात्रि में, पश्चिम-दिशा की ओर मुख कर, कुशासन के ऊपर रक्त-कम्बल तथा उसके ऊपर पीत रेशमी वस्त्र बिछाकर, उस पर बैठकर करनी चाहिए । पहले आचमन-पूर्वक आसन-शुद्धि-मन्त्र द्वारा आसन शुद्ध करे ।… Read More
शाबर मन्त्र विज्ञान शाबर मन्त्र विज्ञान शाबर मन्त्रों का आशयः- स्व॰ वामन शिवराम आप्टे ने सन् १९४२ ई॰ में अपने ‘संस्कृत-कोष’ में ‘शाबर’ शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रकार दी है; ‘शब (व)-र-अण्-शाबरः, शावरः, शाबरी।’ अर्थ में ‘जंगली जाति’ या ‘पर्वतीय’ लोगों द्वारा बोली जानीवाली ‘भाषा’ बताया गया है। वह एक प्रकार का मन्त्र भी है, इसका वहाँ कोई… Read More
बन्दी-मोचन-मन्त्र-प्रयोग बन्दी-मोचन-मन्त्र-प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य बन्दी-मोचन-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीकण्व ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, श्रीबन्दी-देवी देवता, ह्रीं वीजं, हूं कीलकं, मम-बन्दी-मोचनार्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- श्रीकण्व ऋषये नमः शिरसि, त्रिष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीबन्दी-देवी देवतायै नमः हृदि, ह्रीं वीजाय नमः गुह्ये, हूं कीलकाय नमः नाभौ, मम-बन्दी-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे । मन्त्रः-… Read More