‘श्रीदुर्गे स्मृतेति’ – मन्त्र की साधना सभी प्रकार के कष्ट-निवारण, आर्थिक-संकट-निवारण हेतुः शुद्ध होकर आसन पर बैठे। आसन-शोधन, आत्म-शोधन की प्रारम्भिक क्रियाएँ कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्रीदुर्गे स्मृतेति मन्त्रस्य विष्णुः ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहा-लक्ष्मी देवता, शाकम्भरी शक्तिः, वायु कीलकं, सकल-संकेत-कष्ट-दारिद्र्य-परिहारार्थं जपे विनियोगः।… Read More


सिद्धि-चण्डी महा-विद्या सहस्राक्षर मन्त्र वन्दे परागम-विद्यां, सिद्धि-चण्डीं सङ्गिताम् । महा-सप्तशती-मन्त्र-स्वरुपां सर्व-सिद्धिदाम् ।। विनियोगः- ॐ अस्य सर्व-विज्ञान-महा-राज्ञी-सप्तशती रहस्याति-रहस्य-मयी-परा-शक्ति श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डिका-सहस्राक्षरी-महा-विद्या-मन्त्रस्य श्रीमार्कण्डेय-सुमेधा ऋषि, गायत्र्यादि नाना-विधानि छन्दांसि, नव-कोटि-शक्ति-युक्ता-श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी देवता, श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी-प्रसादादखिलेष्टार्थे जपे विनियोगः ।… Read More


दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो भगवती पुर-पुर देशनि पुराधिपतये सर्व जगद-भयंकरिच्छीमै ॐ रांग र रीं क्ला वालो सल्पञ्च काम-बाण सर्वश्री समस्त नर-नारी-गणं मम वशमानय मानय स्वाहा ।”… Read More


सर्वोपयोगी अनुभूत साधना इस ‘साधना-क्रम’ में तीन उपासनाएँ है- (१) श्री गायत्री उपासना, (२) श्री दुर्गोपासना एवं (३) श्री बटुक-भैरवोपासना। प्रतिदिन प्रातःकाल और रात्रि-भोजन के पूर्व, निजी आसन पर बैठकर नियमित रुप से निश्वित समय पर इस साधना कप करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं एवं सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।… Read More


बगलामुखी मंत्र प्रयोग बगलामुखी एकाक्षरी मंत्र – || ह्लीं || इसे स्थिर माया कहते हैं । यह मंत्र दक्षिण आम्नाय का है । दक्षिणाम्नाय में बगलामुखी के दो भुजायें हैं । अन्य बीज “ह्रीं” का उल्लेख भी बगलामुखी के मंत्रों में आता है, इसे “भुवन-माया” भी कहते हैं । चतुर्भुज रुप में यह विद्या विपरीत… Read More


सफलता पाने का मन्त्र  “प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देव । सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब ।।”… Read More