श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-37 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-37 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सैंतीसवाँ अध्याय शिवजी द्वारा हनुमान्रूप में प्रकट होने की बात बताना, विष्णु का महाराज दशरथ के घर में राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के रूप में प्रकट होना, लक्ष्मी का सीता के रूप में तथा अन्य देवगणों का ऋक्ष, वानर आदि रूपों में प्रकट होना… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-36 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-36 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छत्तीसवाँ अध्याय रामोपाख्यान का प्रारम्भ, देवी कात्यायनी की आराधना से रावण का त्रैलोक्यविजयी होना, ब्रह्माजी की प्रार्थना पर विष्णु का राम के रूप में अवतरित होने का आश्वासन देना तथा जगदम्बा द्वारा रावण के वध का उपाय बताना अथः षट्त्रिंशोऽध्यायः महादेवनारदसंवादे श्रीभगवतीनारायण संवादवर्णनं नारदजी बोले… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-35 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-35 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पैंतीसवाँ अध्याय गणेश जन्म की कथा, पार्वती द्वारा अपने उबटन से विष्णुस्वरुप एक पुत्र की उत्पत्ति कर उसे नगर रक्षक के रूप में नियुक्त करना, भगवान् शंकर द्वारा अनजाने में त्रिशूल द्वारा उस बालक का सिर काटना, पार्वती का पुत्र वियोग से दुःखी होना, भगवान्… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-34 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-34 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौंतीसवाँ अध्याय देवताओं द्वारा कार्तिकेय की वन्दना, ब्रह्माजी के साथ कार्तिकेय का अपने माता-पिता के पास कैलास आना, भगवान् विष्णु द्वारा पुत्र रूप में माँ पार्वती का वात्सल्य प्राप्त करने की अभिलाषा प्रकट करना, महादेवी द्वारा ‘अभिलाषा पूर्ण होगी’ इस प्रकार का वर प्रदान करना… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-33 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-33 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तैंतीसवाँ अध्याय कार्तिकेय जी द्वारा तारकासुर का वध, देवसेना में हर्षोल्लास अथः त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः महादेवनारदसंवादे तारकासुरवधः श्रीमहादेवजी बोले — तदनन्तर युद्धभूमि में भयानक गर्जना करते हुए कार्तिकेय जी ने दैत्यराज तारकासुर पर यमदण्ड के समान भयंकर बाणों से प्रहार किया । तत्पश्चात् क्रोध से उन्मत्त हुए… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-32 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-32 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बत्तीसवाँ अध्याय देवासुर-संग्राम में देवसेनापति कार्तिकेय तथा तारकासुर के भीषण युद्ध अथः द्वात्रिंशोऽध्यायः कार्तिकेयतारकासुर संग्रामवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — तुरही के निनाद, भेरी तथा पणव (नगाड़ों) – की ध्वनियों, दोनों ओर की सेनाओं के चतुर्दिक् सिंहनादों और रथ की धुरी के भयंकर घोष से पृथ्वी तथा… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-31 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-31 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इकतीसवाँ अध्याय कुमार कार्तिकेय का तारकासुर के विनाश के लिए ससैन्य उद्यत होना, ब्रह्माजी द्वारा उन्हें वाहन के रूप में “मयूर” तथा अमोघ शक्ति प्रदान करना, कार्तिकेय को देवसेना का सेनापतित्व प्राप्त होने आदि का वर्णन अथः एकत्रिंशत्तमोऽध्यायः तारकासुर संग्रामे कुमारागमनवर्णनं नारदजी बोले — महादेव… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-30 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-30 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तीसवाँ अध्याय देवताओं द्वारा देवी पार्वती की स्तुति, भगवान् शंकर के तेज से षण्मुख कार्तिकेय का प्रादुर्भाव, देवताओं के हर्षोल्लास का वर्णन अथः त्रिंशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे कार्तिकेयजन्मवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — मुने ! तदनन्तर देवतागण अत्यन्त आश्चर्यचकित होकर जगत् के प्राणियों में लज्जारूप से विराजमान जगदम्बा पार्वती… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-29 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-29 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उनतीसवाँ अध्याय शिव-पार्वती का एकान्त-विहार है, पृथ्वी देवी का गोरूप धारण कर देवताओं के साथ ब्रह्माजी के पास जाना, ब्रह्माजी का उन्हें आश्वस्त करना और कुमार कार्तिकेय के प्रादुर्भाव होने की बात बताना अथः एकोनत्रिंशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीशिवपार्वती विहारवर्णनं श्रीमहादेव जी बोले — [मुने !] पार्वती… Read More
श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-28 श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-28 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अठ्ठाईसवाँ अध्याय हिमालय द्वारा बारात का यथोचित सत्कार करना है, शिव-पार्वती के माङ्लिक विवाहोत्सव का वर्णन, शिव-पार्वती के विवाहोत्सव के पाठ की महिमा अथः अष्टाविंशतितमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे श्रीशिवस्य हिमालयपुर आगमनं श्रीमहादेवजी बोले — इसके बाद महेश्वर को आया हुआ जानकर गिरिराज हिमालय ने वहाँ आकर उनकी… Read More