श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-57 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सत्तावनवाँ अध्याय महाभारतयुद्ध का वर्णन अथः सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय महाभारतयुद्धवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — तब पृथ्वी के भार का हरण करने के लिये महाकाली कृष्णरूप से अपनी सेना को धृतराष्ट्रपुत्रों की सहायता में नियोजित कर स्वयं पूर्णरूप से सात्यकिसहित पाण्डवों के पास चली आयी । महामते ! अनेक… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-56 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ छप्पनवाँ अध्याय पाण्डवों द्वारा भगवती की स्तुति, भगवती द्वारा प्रसन्न होकर विजय का आशीर्वाद देना, पाण्डवों का अज्ञातवास के लिये राजा विराट के नगर में जाना, भीम द्वारा कीचक और उपकीचकों का वध, अभिमन्यु-विवाह अथः षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः कीचकवधोपाख्यानं श्रीमहादेवजी बोले — मुनिश्रेष्ठ ! बहुत काल तक… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-55 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पचपनवाँ अध्याय स्वयंवर में न बुलाये जाने पर श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी का हरण, राजसूययज्ञ के लिये पाण्डवों की विजययात्रा तथा जरासन्धवध, राजसूय यज्ञ में कृष्ण की प्रथम पूजा का शिशुपाल द्वारा विरोध तथा उसका वध, द्यूतक्रीड़ा में हारकर पाण्डवों का वनवास अथः पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः राजसूयादनन्तरं शिशुपालहननपूर्वकद्यूते… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-54 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौवनवाँ अध्याय नारदजी का कंस को श्रीकृष्ण के देवकीपुत्र होने की बात बताना, अक्रूर का गोकुल से श्रीकृष्ण और बलराम को ले आना, कुवलयापीड, चाणूर और मुष्टिक का वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिकारूप से कंस का संहार करना तथा उग्रसेन का राज्याभिषेक कर माता- पिता को… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-53 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तिरपनवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण की बाललीला – धेनुकासुरवध, कालियमर्दन, रासलीला तथा वृषभासुर वध अथः त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे राधया सह रासक्रीडावर्णने कंसप्रेरितवृषभासुरवधः श्रीनारद जी बोले — पार्वती प्राणवल्लभ महेश्वर ! श्रीकृष्ण-रूपवाली भगवती के चरित्र का संक्षेप में मुझसे वर्णन कीजिए ॥ १ ॥ जिस प्रकार उन्होंने गोकुल… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-52 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बावनवाँ अध्याय प्रजापति दक्ष और प्रसूति की उग्र तपस्या तथा वरप्राप्ति, दक्ष और प्रसूति का गोकुल में नन्द और यशोदा के रूप में जन्म लेना अथः द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे दक्षप्रसूतिनन्दयशोदाजन्मवर्णनं श्रीनारद जी बोले — देवकी के गर्भ से बालकरूप में प्रादुर्भूत होकर साक्षात् भगवती गोकुल में… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-51 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ इक्यावनवाँ अध्याय पूतना का गोकुल में आना और कृष्ण द्वारा दूध सहित उसके प्राणों का पान करना, तृणावर्त का कृष्ण को उड़ाकर ले जाना और कालीरूप में कृष्ण द्वारा उसका वध करना, भगवान् शिव का राधा नाम से स्त्रीरूप में प्रकट होना अथः एकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-50 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पचासवाँ अध्याय कश्यप और अदिति का वसुदेव-देवकी के रूप में जन्म, कंस द्वारा देवकी के छः पुत्रों का वध, देवी का कृष्णरूप में देवकी के गर्भ से जन्म लेना और सिंहवाहिनीरूप में आकाश में स्थित हो कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी कर अन्तर्धान होना अथः… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-49 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उनचासवाँ अध्याय भगवान् शिव का भगवती से पुरुषरूप में अवतार लेने की प्रार्थना करना तथा स्वयं राधा और आठ पटरानियों के रूप में अवतरित होने का आश्वासन देना, भगवती का स्वयं कृष्णरूप से तथा भगवान् विष्णु का अर्जुनरूप से अवतार लेने और महाभारत युद्ध में… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-48 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय श्रीराम और देवगणों द्वारा देवी का स्तवन, ब्रह्माजी द्वारा भगवती का पूजन, देवी के शारदीय पूजा-अनुष्ठान की अनिवार्यता अथः अष्टचत्वारिंशोऽध्यायः देव्याः शारदीयपूजानुष्ठाने श्रीमद्रामायरणवर्णनं श्रीमहादेवजी बोले — तदनन्तर श्रीरामचन्द्र जी दण्डवत् प्रणाम करके परम भक्ति से युक्त होकर प्रसन्नमन से भगवती की स्तुति करने… Read More