श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-04 March 26, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ चतुर्थोध्याय: श्रीमद्देवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में रेवती नक्ष त्रके पतन और पुनः स्थापन की कथा तथा श्रीमद्देवीभागवत के श्रवण से राजा दुर्दम को मन्वन्तराधिप-पुत्र की प्राप्ति रैवत नामक मनुपुत्रोत्पत्तिवर्णनम् ॥ सूतउवाच ॥ इति श्रुत्वा कथां दिव्यां विचित्रां कुम्भसम्भवः… Read More
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-03 March 26, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ तृतीयोध्यायः श्रीमदेवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में राजा सुद्युम्न की कथा नवाहश्रवणाद् इलायाः पुंस्त्वप्राप्तिवर्णनम् ॥ सूत उवाच ॥ अथेतिहासमन्यच्च शृणुध्वं मुनिसत्तमाः । देवीभागवतस्यास्य माहात्म्यं यत्र गीयते ॥ १ ॥ एकदा कुम्भयोनिस्तु लोपामुद्रापतिर्मुनिः । गत्वा कुमारमभ्यर्च्य पप्रच्छ विविधाः कथाः ॥… Read More
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-02 March 26, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत महापुराण देवीमाहात्म्य-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ द्वितीयोऽध्यायः श्रीमद्देवीभागवत के माहात्म्य के प्रसंग में स्यमन्तकमणि की कथा अथ द्वितीयोऽध्यायः ॥ ऋषय ऊचुः ॥ वसुदेवो महाभागः कथं पुत्रमवाप्तवान् । प्रसेनः कुत्र कृष्णेन भ्रमताऽन्वेषितः कथम् ॥ १ ॥ विधिना केन कस्माच्च देवीभागवतं श्रुतम् । वसुदेवेन सुमते वद सूत… Read More
श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्यम् अध्याय 01 March 26, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्यम् अध्याय 01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अथ प्रथमोऽध्यायः सूतजी के द्वारा ऋषियों के प्रति श्रीमद्देवीभागवत के श्रवण की महिमा का कथन सृष्टौ या सर्गरूपा जगदवनविधौ पालनी या च रौद्री संहारे चापि यस्या जगदिदमखिलं क्रीडनं या पराख्या । पश्यन्ती मध्यमाथो तदनु भगवती वैखरी वर्णरूपा सास्मद्वाचं प्रसन्ना विधिहरिगिरिशा-राधितालङ्करोतु… Read More
श्रीमद्देवीभागवत की पाठविधि March 25, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत की पाठविधि देवीभागवतं नाम पुराणं परमोत्तमम् । त्रैलोक्यजननी साक्षाद् गीयते यत्र शाश्वती ॥ श्रीमद्भागवतं यस्तु पठेद्वा शृणुयादपि । श्लोकार्थं श्लोकपादं वा स याति परमां गतिम् ॥ श्रीमद्देवीभागवत नामक पुराण सभी पुराणों में अतिश्रेष्ठ है, जिसमें तीनों लोकों की जननी साक्षात् सनातनी भगवती की महिमा गायी गयी है। जो श्रीमद्देवीभागवत के आधे श्लोक या चौथाई… Read More
दुर्गासहस्रनाम स्तोत्रम् / नामावली March 24, 2025 | aspundir | Leave a comment दुर्गासहस्रनाम स्तोत्रम् / नामावली ॥ श्रीः ॥ ॥ श्री दुर्गायै नमः ॥ ॥ अथ श्री दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ॥ ॥ नारद उवाच ॥ कुमार गुणगम्भीर देवसेनापते प्रभो । सर्वाभीष्टप्रदं पुंसां सर्वपापप्रणाशनम् ॥ १॥ गुह्याद्गुह्यतरं स्तोत्रं भक्तिवर्धकमञ्जसा । मङ्गलं ग्रहपीडादिशान्तिदं वक्तुमर्हसि ॥ २॥ ॥ स्कन्द उवाच ॥ शृणु नारद देवर्षे लोकानुग्रहकाम्यया । यत्पृच्छसि परं पुण्यं तत्ते वक्ष्यामि कौतुकात्… Read More
शिवसंकल्प सूक्त (कल्याण सूक्त ) March 23, 2025 | aspundir | Leave a comment शिवसंकल्पसूक्त (कल्याणसूक्त ) मनुष्य शरीर में प्रत्येक इन्द्रिय का अपना विशिष्ट महत्त्व है, परंतु मन का महत्त्व सर्वोपरि है; क्योंकि मन सभी को नियन्त्रित करने वाला, विलक्षण शक्तिसम्पन्न तथा सर्वाधिक प्रभावशाली है। इसकी गति सर्वत्र है, सभी कर्मेन्द्रियाँ – ज्ञानेन्द्रियाँ, सुख-दुःख मन के ही अधीन हैं। स्पष्ट है कि व्यक्ति का अभ्युदय मन के शुभ… Read More
श्रद्धा सूक्त March 23, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रद्धासूक्त ऋग्वेद के दशम मण्डल के १५१वें सूक्त को ‘श्रद्धासूक्त’ कहते हैं। इसकी ऋषि का श्रद्धा कामायनी, देवता श्रद्धा तथा छन्द अनुष्टुप् है । प्रस्तुत सूक्त में श्रद्धा की महिमा वर्णित है। अग्नि, इन्द्र, वरुण-जैसे बड़े देवताओं तथा अन्य छोटे देवों में भेद नहीं है – यह इस सूक्त में बतलाया गया है। सभी यज्ञ-कर्म,… Read More
सौमनस्य सूक्त [ संज्ञान सूक्त ] March 23, 2025 | aspundir | Leave a comment सौमनस्यसूक्त [ संज्ञानसूक्त ( क ) ] ऋग्वेद १० वें मण्डल का यह १९१ वाँ सूक्त ऋग्वेद का अन्तिम सूक्त है। इस सूक्त के ऋषि आङ्गिरस, पहले मन्त्र के देवता अग्नि तथा शेष तीनों मन्त्रों के संज्ञान देवता हैं। पहले, दूसरे तथा चौथे मन्त्रों का छन्द अनुष्टुप् तथा तीसरे मन्त्र का छन्द त्रिष्टुप् है। प्रस्तुत… Read More
विवाह सूक्त [ सोमसूर्या सूक्त ] March 23, 2025 | aspundir | Leave a comment विवाहसूक्त [ सोमसूर्यासूक्त ] ऋग्वेद के दशम मण्डल का ८५ वाँ सूक्त विवाहसूक्त कहलाता है। यह सोमसूर्यासूक्त भी कहलाता है। यह सूक्त बड़ा है और इसमें ४७ ऋचाएँ पठित हैं। इन ऋचाओं की द्रष्टा ऋषि का सावित्री सूर्या हैं। इस सूक्त में सूर्य, चन्द्र आदि देवों की भी स्तुतियाँ हैं । विवाहादि संस्कारों में इसके… Read More