श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-30 May 11, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय शक्तिपीठों की उत्पत्ति की कथा तथा उनके नाम एवं उनका माहात्म्य देवीपीठवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! तत्पश्चात् वे वन-प्रदेश में हिमालय की तलहटी में स्थित रहकर समाहितचित्त हो मायाबीज (भुवनेश्वरीमन्त्र ) – के जप में… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-29 May 11, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उन्नतीसवाँ अध्याय व्यासजी का राजा जनमेजय से भगवती की महिमा का वर्णन करना और उनसे उन्हीं की आराधना करने को कहना, भगवान् शंकर और विष्णु के अभिमान को देखकर गौरी तथा लक्ष्मी का अन्तर्धान होना और शिव तथा विष्णु… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-28 May 11, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अट्ठाईसवाँ अध्याय दुर्गम दैत्य की तपस्या; वर-प्राप्ति तथा अत्याचार, देवताओं का भगवती की प्रार्थना करना, भगवती का शताक्षी और शाकम्भरी रूप में प्राकट्य, दुर्गम का वध और देवगणों द्वारा भगवती की स्तुति शताक्षीचरित्रवर्णनम् जनमेजय बोले — हे मुने !… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-27 May 11, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सताईसवाँ अध्याय चिता बनाकर राजा का रोहित को उसपर लिटाना और राजा-रानी का भगवती का ध्यानकर स्वयं भी पुत्र की चिता में जल जाने को उद्यत होना, ब्रह्माजीसहित समस्त देवताओं का राजा के पास आना, इन्द्र का अमृत वर्षा… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-26 May 11, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-26 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-षड्विंशोऽध्यायः छब्बीसवाँ अध्याय रानी का चाण्डालवेशधारी राजा हरिश्चन्द्र से अनुमति लेकर पुत्र के शव को लाना और करुण विलाप करना, राजा का पत्नी और पुत्र को पहचानकर मूर्च्छित होना और विलाप करना हरिश्चन्द्रोपाख्याने राज्ञो हुताशनप्रवेशोद्योगवर्णनम् सूतजी बोले — तत्पश्चात् राजा… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-25 May 10, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-25 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-पञ्चविंशोऽध्यायः पच्चीसवाँ अध्याय सर्पदंश से रोहित की मृत्यु, रानी का करुण विलाप, पहरेदारों का रानी को राक्षसी समझकर चाण्डाल को सौंपना और चाण्डाल का हरिश्चन्द्र को उसके वध की आज्ञा देना चाण्डालाज्ञया हरिश्चन्द्रस्य खड्गग्रहणवर्णनम् सूतजी बोले — [ हे शौनक… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-24 May 10, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय चाण्डाल का राजा हरिश्चन्द्र को श्मशानघाट में नियुक्त करना हरिश्चन्द्रचिन्तावर्णनम् शौनक बोले — हे श्रेष्ठ सूतजी ! चाण्डाल के घर जाकर राजा हरिश्चन्द्र ने क्या किया ? आप मेरे प्रश्न का उत्तर शीघ्र ही दीजिये ॥ १… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-23 May 10, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय विश्वामित्र का राजा हरिश्चन्द्र को चाण्डाल के हाथ बेचकर ऋणमुक्त करना हरिश्चन्द्रोपाख्यानवर्णनम् व्यासजी बोले — राजा हरिश्चन्द्र से इस प्रकार का दयाहीन एवं निष्ठुर वचन कहकर और वह सम्पूर्ण धन लेकर कुपित विश्वामित्र वहाँ से चले गये… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-22 May 10, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय राजा हरिश्चन्द्र का रानी और राजकुमार का विक्रय करना और विश्वामित्र को ग्यारह करोड़ स्वर्णमुद्राएँ देना तथा विश्वामित्र का और अधिक धन के लिये आग्रह करना हरिश्चन्द्रस्य पत्नीपुत्रविक्रयवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! अपनी धर्मपत्नी के… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-21 May 10, 2025 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-21 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकविंशोऽध्यायः इक्कीसवाँ अध्याय विश्वामित्र का राजा हरिश्चन्द्र से दक्षिणा माँगना और रानी का अपने को विक्रय हेतु प्रस्तुत करना हरिश्चन्द्रोपाख्यानवर्णनम् सूतजी बोले — इतने में यमराज के समान क्रोधयुक्त महान् तपस्वी विश्वामित्र मन में संकल्पित अपना दक्षिणा-सम्बन्धी धन माँगने के… Read More