भैरों का मन्त्र मन्त्रः- “आद भैरों, जुगाद भैरों, भैरों है सब थाईं । भैरों ब्रह्मा, भैरों विष्णु, भैरों ही भोला साईं । भैरों देवी, भैरों सब देवता, भैरों सिद्ध, भैरों नाथ । भैरों गुरु, भैरों पीर, भैरों ज्ञान, भैरों ध्यान । भैरों योग- वैराग । भैरों विन होय ना रक्षा । भैरों विन बजे ना… Read More


नव-नाथ का मन्त्र मन्त्रः- “ॐ आदेश, गुरू जी को आदेश । ओङ्कार – रूपी आदि-नाथ आकाश-स्वरूपी । सन्तोषनाथ विष्णु खण्डा खड्‌ग-स्वरूपी । गज-वेली कन्थडीनाथ गणेश जी हस्ति-स्वरूपी । अचला अचम्भेनाथ शेषनाग अचल – स्वरूपी । सिद्ध चौरङ्गीनाथ पूर्ण भगत चन्द्रमा – स्वरूपी । माया-रूपी मच्छेन्द्रनाथ । घटे-बड़े पिण्ड गुरू गोरखनाथ । इतना नौ नाथ मन्त्र-जाप… Read More


श्री स्वामी अग्रदास जी (गलता / रैवासा, जिला-सीकर (राजस्थान)) अग्रदासजी राममोपासना में श्रृंगार-रस के आचार्य रूप में विख्यात हैं । इन्हें श्री जानकी जी की प्रिय सखी श्रीचन्द्रकलाजी का अवतार माना जाता है । रामचरितमानस में जानकी जी की एक प्रिय सखी का उल्लेख है, जिसे आगे कर जानकी जी पुष्पवाटिका में रामचन्द्र जी के… Read More


सङ्कट-मुक्ति के लिए यदि कोई भयंकर आपत्ति आई हो; अपनी तरफ से सभी प्रकार के प्रयत्न निष्फल हो चुके हों; आपत्ति से छुटकारा न मिल रहा हो– ऐसी स्थिति में निम्न साधना लगातार ८ दिन नित्य निश्चित समय पर करें- बाह्म मुहूर्त पर स्नान करके, गीले कपड़े पहने ही अपने इष्ट नाथ का ‘नाम-मन्त्र’ १०८… Read More


‘नव नाथ’ कृपा नाथ-पन्थ में ‘श्रीनवनाथ-भक्ति-सार’ ‘श्रीनाथलीलामृत’ आदि अनेक ग्रन्थ हैं । किसी भी ग्रन्थ का विधि-पूर्वक और सङ्कल्प- पूर्वक पारायण रात्रि में करें । निर्बल हृदय साधक इस साधना को न अपनाएँ । पारायण काल में किसी भी दशा में आसन छोड़कर भागना नही चाहिए । साथ ही पारायण-पूर्ति तक ‘अखण्ड’ दीप होना चाहिए… Read More


देवी कृपा-प्राप्ति के लिए पहले कोई भी एक पुराना मन्दिर भग्न मन्दिर ढूंढ़े, जहाँ कोई न जाता हो । फिर किसी भी दिन वहाँ जाकर देवता को अक्षत आदि देकर निमन्त्रण दे दें कि आपकी कृपा के लिए मैं यहाँ ४० दिन नित्य आऊँगा । दूसरे दिन से रात को १२ बजे वहाँ जाकर यथा-शक्ति… Read More


नाथ-पन्थीं मन्त्रों के कुछ ज्ञातव्य ‘नाथ पन्थ’ मे गुरु का बड़ा महत्व है । ईश्वर से भी ज्यादा महत्ता ‘गुरु’ को दी जाती है । सक्षम गुरु से पहले ‘दीक्षा’ लेना और बाद मे ‘साधना’ करना उचित माना जाता है । किसी कारण वश यदि गुरु की प्राप्ति नही हो पाती और मन्त्र-साधना में रुचि… Read More


महा-काली शाबर मन्त्र मन्त्र :- “सात पूनम काल का, बारह बरस क्वाँर । एको देवी जानिए, चौदह भुवन – द्वार ।। १ द्वि – पक्षे निर्मलिए, तेरह देवन देव । अष्ट-भुजी परमेश्वरी, ग्यारह रुद्र सेव ।। २ सोलह कला सम्पूर्णी, तीन नयन भरपूर । दसों द्वारी तू ही माँ, पाँचों बाजे नूर ।। ३ नव-निधी… Read More


अर्श-रोग का निवारण मन्त्र:- ॐ काका कता कोरी कर्वा । ॐ करता से होय परसना । दशह्रस प्रकटे खूनी बादी बवासीर न होय । मन्त्र जान के न बतावे द्रादश बह्म-हत्या का पाप होय । लाख जप करे, तो उसके वश में न होय । शदद सांचा, पिण्ड काचा । वो हनुमान का मन्त्र सांचा… Read More


नैत्र – रोग का शमन मन्त्र:- ॐ नमो वन बिनाई बानरी, जहाँ हनुवन्त आंखि पीड़ा कषावरि । गिहिया थनै लाइ चरिउ जाई भस्मन्तन । गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति । फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।” नैत्र पर हाथ फिराते हुए उक्त मन्त्र को सात बार फूंके ।… Read More