अग्निपुराण – अध्याय 293 July 15, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 293 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ तिरानबेवाँ अध्याय मन्त्र-विद्या मन्त्रपरिभाषा: अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली मन्त्र विद्या का वर्णन करता हूँ, ध्यान देकर उसका श्रवण कीजिये। द्विजश्रेष्ठ। बीस से अधिक अक्षरों वाले मन्त्र ‘मालामन्त्र’ दस से… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 292 July 15, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 292 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ बानबेवाँ अध्याय गवायुर्वेद गवायुर्वेदः धन्वन्तरि कहते हैं — सुश्रुत ! राजा को गौओं और ब्राह्मणों का पालन करना चाहिये। अब मैं ‘गोशान्ति ‘ का वर्णन करता हूँ। गौएँ पवित्र एवं मङ्गलमयी हैं। गौओं में सम्पूर्ण लोक प्रतिष्ठित है।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 291 July 15, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 291 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ इक्यानबेवाँ अध्याय गज-शान्ति गज-शान्तिः शालिहोत्र कहते हैं — मैं गजरोगों का प्रशमन करने वाली गज-शान्ति के विषय में कहूँगा। किसी भी शुक्ला पञ्चमी को विष्णु, लक्ष्मी तथा नागराज ऐरावत की पूजा करे। फिर ब्रह्मा, शिव, विष्णु इन्द्र, कुबेर,… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 290 July 14, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 290 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ नब्बेवाँ अध्याय अश्व-शान्ति अश्व-शान्ति शालिहोत्र कहते हैं — सुश्रुत! अब मैं घोड़ों के रोगों का मर्दन करने वाली ‘अश्वशान्ति’ का वर्णन करूंगा; जो नित्य, नैमित्तिक और काम्य के भेद से तीन प्रकार की मानी गयी है; इसे सुनो।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 289 July 14, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 289 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ नवासीवाँ अध्याय अश्वचिकित्सा अश्वचिकित्सा शालिहोत्र कहते हैं — सुश्रुत अब मैं अश्वों के लक्षण एवं चिकित्सा का वर्णन करता हूँ। जो अश्व हीनदन्त, विषमदन्तयुक्त या बिना दाँत का, कराली (दो से अधिक दन्तपङ्क्तियों से युक्त, कृष्णतालु, कृष्णवर्ण की… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 288 July 14, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 288 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ अठासीवाँ अध्याय अश्ववाहन-सार अश्ववाहनसारः भगवान् धन्वन्तरि कहते हैं — सुश्रुत। अब मैं अश्ववाहन का रहस्य और अश्वों की चिकित्सा का वर्णन करूँगा। धर्म, कर्म और अर्थ की सिद्धि के लिये अश्वों का संग्रह करना चाहिये। घोड़े के ऊपर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 287 July 14, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 287 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ सत्तासीवाँ अध्याय गज चिकित्सा का कथन गज चिकित्साः पालकाप्य ने कहा — लोमपाद ! मैं तुम्हारे सम्मुख हाथियों के लक्षण और चिकित्सा का वर्णन करता हूँ। लम्बी सूँड़वाले, दीर्घ श्वास लेनेवाले, आघात को सहन करने में समर्थ, बीस… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 286 July 14, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 286 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ छियासीवाँ अध्याय मृत्युञ्जय योगों का वर्णन कल्पसागरः भगवान् धन्वन्तरि कहते हैं — सुश्रुत ! अब मैं मृत्युञ्जय-कल्पों का वर्णन करता हूँ, जो आयु देने वाले एवं सब रोगों का मर्दन करने वाले हैं। मधु, घृत, त्रिफला और गिलोय… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 285 July 13, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 285 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ पचासीवाँ अध्याय मृतसंजीवनकारक सिद्ध योगों का कथन मृतसञ्जीवनीकरसिद्धयोगः धन्वन्तरि कहते हैं — सुश्रुत । अब मैं आत्रेय के द्वारा वर्णित मृतसंजीवनकारक दिव्य सिद्ध योगों को कहता हूँ, जो सम्पूर्ण व्याधियों का विनाश करने वाले हैं ॥ १ ॥… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 284 July 13, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 284 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दो सौ चौरासीवाँ अध्याय मन्त्ररूप औषधों का कथन मन्त्र रूपौषध कथनम् धन्वन्तरि जी कहते हैं — सुश्रुत । ‘ओंकार’ आदि मन्त्र आयु देने वाले तथा सब रोगों को दूर करके आरोग्य प्रदान करने वाले हैं। इतना ही नहीं, देह छूटने… Read More