श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २४ April 21, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय इन्द्रयज्ञ-निवारण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजी के साथ वृन्दावन में रहकर अनेकों प्रकार की लीलाएँ कर रहे थे । उन्होंने एक दिन देखा कि वहाँ के सब गोप इन्द्र-यज्ञ करने की… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २३ April 21, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय यज्ञपत्नियों पर कृपा ग्वालबालों ने कहा — नयनाभिराम बलराम ! तुम बड़े पराक्रमी हो । हमारे चित्तचोर श्यामसुन्दर ! तुमने बड़े-बड़े दुष्टों का संहार किया है । उन्हीं दुष्टों के समान यह भूख भी हमें… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २२ April 21, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय चीरहरण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब हेमन्त ऋतु आयी । उसके पहले ही महीने में अर्थात् मार्गशीर्ष में नन्दबाबा के व्रज की कुमारियाँ कात्यायनी देवी की पूजा और व्रत करने लगीं । वे… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २१ April 21, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय वेणुगीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! शरद् ऋतु के कारण वह वन बड़ा सुन्दर हो रहा था । जल निर्मल था और जलाशयों में खिले हुए कमलों की सुगन्ध से सनकर वायु मन्द-मन्द चल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २० April 20, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय वर्षा और शरद् ऋतु का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! ग्वालबालों ने घर पहुँचकर अपनी मा, बहिन आदि स्त्रियों से श्रीकृष्ण और बलराम ने जो कुछ अद्भुत कर्म किये थे — दावानल से… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १९ April 20, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय गौओं और गोपों को दावानल से बचाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! उस समय जब ग्वालबाल खेल-कूद में लग गये, तब उनकी गौएँ बेरोक-टोक चरती हुई बहुत दूर निकल गयीं और हरी-हरी घास के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १८ April 20, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय प्रलम्बासुर-उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब आनन्दित स्वजन सम्बन्धियों से घिरे हुए एवं उनके मुख से अपनी कीर्ति का गान सुनते हुए श्रीकृष्ण ने गोकुलमण्डित गोष्ठ में प्रवेश किया ॥ १ ॥ इस… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १७ April 20, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय कालिय के कालियदह में आने की कथा तथा भगवान् का व्रजवासियों को दावानल से बचाना राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! कालिय नाग ने नागों के निवासस्थान रमणक द्वीप को क्यों छोड़ा था ?… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १६ April 20, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय कालिय पर कृपा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने देखा कि महाविषधर कालिय नाग ने यमुनाजी का जल विषैला कर दिया है । तब यमुनाजी को शुद्ध करने के विचार से उन्होंने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १५ April 19, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय धेनुकासुर का उद्धार और ग्वालबालों को कालियनाग के विष से बचाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब बलराम और श्रीकृष्ण ने पौगण्ड-अवस्था में अर्थात् छठे वर्ष में प्रवेश किया था । अब उन्हें गौएँ… Read More