श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३४ April 23, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौंतीसवाँ अध्याय सुदर्शन और शङ्खचूड का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक बार नन्दबाबा आदि गोपों ने शिवरात्रि के अवसर पर बड़ी उत्सुकता, कौतूहल और आनन्द से भरकर बैलों से जुती हुई गाड़ियों पर सवार… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३३ April 23, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तैंतीसवाँ अध्याय महारास श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! गोपियाँ भगवान् की इस प्रकार प्रेमभरी सुमधुर वाणी सुनकर जो कुछ विरह-जन्य ताप शेष था, उससे भी मुक्त हो गयी और सौन्दर्य-माधुर्य-निधि प्राण-प्यारे के अङ्ग-सङ्ग से सफल-मनोरथ हो… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३२ April 23, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बत्तीसवाँ अध्याय भगवान् का प्रकट होकर गोपियों को सान्त्वना देना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् की प्यारी गोपियाँ विरह के आवेश में इस प्रकार भाँति-भाँति से गाने और प्रलाप करने लगीं । अपने कृष्ण-प्यारे के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३१ April 23, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकतीसवाँ अध्याय गोपिकागीत गोपियाँ विरहावेश में गाने लगीं — ‘प्यारे ! तुम्हारे जन्म के कारण वैकुण्ठ आदि लोकों से भी व्रज की महिमा बढ़ गयी हैं । तभी तो सौन्दर्य और मृदुलता की देवी लक्ष्मीजी अपना निवासस्थान… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३० April 22, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के विरह में गोपियों की दशा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् सहसा अन्तर्धान हो गये । उन्हें न देखकर व्रजयुवतियों की वैसी ही दशा हो गयी, जैसे यूथपति गजराजके बिना हथिनियों की… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २९ April 22, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनतीसवाँ अध्याय रासलीला का आरम्भ श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! शरद् ऋतु थी । उसके कारण बेला, चमेली आदि सुगन्धित पुष्प खिलकर महँ-महँ महँक रहे थे । भगवान् ने चीरहरण के समय गोपियों को जिन रात्रियों… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २८ April 22, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठाईसवाँ अध्याय वरुणलोक से नन्दजी को छुड़ाकर लाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! नन्दबाबा ने कार्तिक शुक्ल एकादशी का उपवास किया और भगवान् की पूजा की तथा उसी दिन रात में द्वादशी लगने पर स्नान करने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २७ April 22, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्ताईसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का अभिषेक श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब भगवान् श्रीकृष्ण ने गिरिराज गोवर्द्धन को धारण करके मूसलधार वर्षा से व्रज को बचा लिया, तब उनके पास गोलोक से कामधेनु (बधाई देने के लिये)… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २६ April 22, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छब्बीसवाँ अध्याय नन्दबाबा से गोपों की श्रीकृष्ण के प्रभाव के विषय में बातचीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! व्रज के गोप भगवान् श्रीकृष्ण के ऐसे अलौकिक कर्म देखकर बड़े आश्चर्य में पड़ गये । उन्हें भगवान्… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २५ April 21, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचीसवाँ अध्याय गोवर्धनधारण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब इन्द्र को पता लगा कि मेरी पूजा बंद कर दी गयी है, तब वे नन्दबाबा आदि गोपों पर बहुत ही क्रोधित हुए । परन्तु उनके क्रोध करने… Read More