श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय १ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय कलियुग के राजवंशों का वर्णन राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण जब अपने परमधाम पधार गये, तब पृथ्वी पर किस वंश का राज्य हुआ ? तथा अब किसका राज्य होगा ? आप… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३१ May 10, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकतीसवाँ अध्याय श्रीभगवान् का स्वधामगमन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! दारुक के चले जाने पर ब्रह्माजी, शिव-पार्वती, इन्द्रादि लोकपाल, मरीचि आदि प्रजापति, बड़े-बड़े ऋषि-मुनि, पितर-सिद्ध, गन्धर्वविद्याधर, नाग-चारण, यक्ष-राक्षस, किन्नर-अप्सराएँ तथा गरुड़लोक के विभिन्न पक्षी अथवा मैत्रेय आदि… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३० May 10, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसवाँ अध्याय यदुकुल का संहार राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! जब महाभागवत उद्धवजी बदरीवन को चले गये, तब भूतभावन भगवान् श्रीकृष्ण ने द्वारका में क्या लीला रची ? ॥ १ ॥ प्रभो ! यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २९ May 10, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनतीसवाँ अध्याय | भागवतधर्मों का निरूपण और उद्धवजी का बदरिकाश्रम गमन उद्धवजी ने कहा — अच्युत ! जो अपना मन वश में नहीं कर सका है, उसके लिये आपकी बतलायी हुई इस योगसाधना को तो मैं बहुत ही… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २८ May 10, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठाईसवाँ अध्याय परमार्थ-निरूपण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — उद्धवजी ! यद्यपि व्यवहार में पुरुष और प्रकृति-द्रष्टा और दृश्य के भेद से दो प्रकार का जगत् जान पड़ता है, तथापि परमार्थ-दृष्टि से देखने पर यह सब एक अधिष्ठान-स्वरूप ही… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २७ May 10, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्ताईसवाँ अध्याय क्रियायोग का वर्णन उद्धवजी ने पूछा — भक्तवत्सल श्रीकृष्ण ! जिस क्रियायोग का आश्रय ले जो भजन जिस प्रकार से जिस उद्देश्य से आपकी अर्चा-पूजा करते हैं, आप अपने उस आराधनरूप क्रियायोग का वर्णन कीजिये ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २६ May 10, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छब्बीसवाँ अध्याय पुरूरवा की वैराग्योक्ति भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — उद्धवजी ! यह मनुष्य शरीर मेरे स्वरूपज्ञान की प्राप्ति का — मेरी प्राप्ति का मुख्य साधन है । इसे पाकर जो मनुष्य सच्चे प्रेम से मेरी भक्ति करता… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २५ May 9, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचीसवाँ अध्याय तीनों गुणों की वृत्तियों का निरूपण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — पुरुषप्रवर उद्धवजी ! प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग गुणों का प्रकाश होता है । उनके कारण प्राणियों के स्वभाव में भी भेद हो जाता है ।… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २४ May 9, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय सांख्ययोग भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्यारे उद्धव ! अब मैं तुम्हें सांख्यशास्त्र का निर्णय सुनाता हूँ । प्रचीन काल के बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों ने इसका निश्चय किया है । जब जीव इसे भलीभाँति समझ लेता है,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २३ May 9, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय एक तितिक्षु ब्राह्मण का इतिहास श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! वास्तव में भगवान् की लीला-कथा ही श्रवण करने योग्य है । वे ही प्रेम और मुक्ति के दाता हैं । जब उनके परमप्रेमी भक्त उद्धवजी… Read More