श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ११ May 12, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय भगवान् के अङ्ग, उपाङ्ग और आयुधों का रहस्य तथा विभिन्न सूर्यगणों का वर्णन शौनकजी ने कहा — सूतजी ! आप भगवान् के परमभक्त और बहुज्ञों में शिरोमणि हैं । हमलोग समस्त शास्त्रों के सिद्धान्त के सम्बन्ध… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय १० May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय मार्कण्डेयजी को भगवान् शङ्कर का वरदान सूतजी कहते हैं — शौनकादि ऋषियो ! मार्कण्डेय मुनि ने इस प्रकार नारायण निर्मित योगमाया-वैभव का अनुभव किया । अब यह निश्चय करके कि इस माया से मुक्त होने के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ९ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय मार्कण्डेयजी का माया-दर्शन सूतजी कहते हैं — जब ज्ञान-सम्पन्न मार्कण्डेय मुनि ने इस प्रकार स्तुति की, तब भगवान् नर-नारायण ने प्रसन्न होकर मार्कण्डेयजी से कहा ॥ १ ॥ भगवान् नारायण ने कहा — सम्मान्य ब्रह्मषि-शिरोमणि !… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ८ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय मार्कण्डेयजी की तपस्या और वर-प्राप्ति शौनकजी ने कहा — साधुशिरोमणि सूतजी ! आप आयुष्मान् हो । सचमुच आप वक्ताओं के सिरमौर हैं । जो लोग संसार के अपार अन्धकार में भूल-भटक रहे हैं, उन्हें आप वहाँ… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ७ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय अथर्ववेद की शाखाएँ और पुराणों के लक्षण सूतजी कहते हैं — शौनकादि ऋषियो ! मैं कह चुका हूँ कि अथर्ववेद के ज्ञाता सुमन्तु मुनि थे । उन्होंने अपनी संहिता अपने प्रिय शिष्य कबन्ध को पढ़ायी ।… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ६ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय परीक्षित की परमगति, जनमेजय को सर्पसत्र और वेदों के शाखाभेद सूतजी कहते हैं — शौनकादि ऋषियो ! व्यासनन्दन श्रीशुकदेव मुनि समस्त चराचर जगत् को अपनी आत्मा के रूप में अनुभव करते हैं और व्यवहार में सबके… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ५ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय श्रीशुकदेवजी का अन्तिम उपदेश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — प्रिय परीक्षित् ! इस श्रीमद्भागवत महापुराण में बार-बार और सर्वत्र विश्वात्मा भगवान् श्रीहरि का ही संकीर्तन हुआ है । ब्रह्मा और रुद्र भी श्रीहरि से पृथक् नहीं हैं,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ४ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय चार प्रकार के प्रलय श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! (तीसरे स्कन्धमें) परमाणु से लेकर द्विपरार्धपर्यन्त काल का स्वरूप और एक-एक युग कितने-कितने वर्षों का होता है, यह मैं तुम्हें बतला चुका हूँ । अब तुम… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ३ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय राज्य, युगधर्म और कलियुग के दोषों से बचने का उपाय — नामसङ्कीर्तन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब पृथ्वी देखती है कि राजा लोग मुझ पर विजय प्राप्त करने के लिये उतावले हो रहे हैं,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय २ May 11, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – द्वादशः स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय कलियुग के धर्म श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! समय बड़ा बलवान् है; ज्यों-ज्यों घोर कलियुग आता जायगा, त्यों-त्यों उत्तरोत्तर धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरणशक्ति का लोप होता जायगा ॥ १ ॥… Read More