॥ श्रीराधास्तोत्रम् ॥ राधे राधे च कृष्णेशे कृष्णप्राणे मनोहरे । भक्तधामप्रदे देवि राधिके त्वं प्रसीद मे ॥ १ ॥ रहःकेलिसुखस्थाने सखीप्रेमकरेऽनघे । कृष्णोत्कर्षकरे नित्यं राधिके त्वं प्रसीद मे ॥ २ ॥… Read More


॥ गोपालस्तोत्रं अथवा गोपालस्तवराजस्तोत्रम् ॥ श्रीमद्गोपीजनवल्लभाय नमः । विनियोगः- ॐ अस्य श्रीगोपालस्तवराजमन्त्रस्य श्रीनारद ऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीकृष्णः परमात्मा देवता । श्रीकृष्णप्रीत्यर्थे जपे विनोयोगः ॥ ॥ ध्यानम् ॥ सजलजलदनीलं दर्शितोदारशीलं करतलधृतशैलं वेणुवाद्यै रसालम् । व्रजजनकुलपालं कामिनीकेलिलोलं तरुणतुलसिमालं नौमि गोपालबालम् ॥… Read More


॥ श्रीकृष्णसहस्रनामस्तोत्र ॥ श्रीमद्रुक्मिमहीपालवंशरक्षामणिः स्थिरः । राजा हरिहरः क्षोणीं रक्षत्यम्बुधिमेखलाम् ॥ १ ॥ स राजा सर्वतन्त्रज्ञः समभ्यर्च्य वरप्रदम् । देवं श्रियः पतिं स्तुत्या समस्तौद्वेदवेदितम् ॥ २ ॥ तस्य हृष्टाशयः स्तुत्या विष्णुर्गोपांगनावृतः । स पिंछश्यामलं रूपं पिंछोत्तंसमदर्शयत् ॥ ३ ॥ स पुनः स्वात्मविन्यस्तचित्तं हरिहरं नृपम् । अभिषिच्य कृपावर्षैरभाषत कृतांजलिम् ॥ ४ ॥… Read More


॥ श्रीकृष्णस्तोत्रम् ॥ ॥ पार्वत्युवाच ॥ भगवन् श्रोतुमिच्छामि यथा कृष्णः प्रसीदति । विना जपं विना सेवां विना पूजामपि प्रभो ॥ १ ॥ पार्वती ने कहा – हे भगवन ! हे प्रभो ! मैं यह पूँछना चाहती हूँ कि बिना जप, बिना सेवा तथा बिना पूजाके भी कृष्ण कैसे प्रसन्न होते हैं ? ॥ १ ॥… Read More


॥ अथ श्रीकृष्ण यंत्रावरण पूजनम् ॥ सम्प्रदाय भेद से एक अन्य यंत्रार्चन इस प्रकार है । यन्त्ररचना -बिन्दु, त्रिकोण, षट्कोण, अष्टदल, दशदल, द्वादशदल, चतुर्दशदल एवं षोडशदल बनाकर भूपुर बनाये। ॥ श्रीकृष्ण पूजन यन्त्रम् ॥ प्रत्येक आवरण पूजन बाद, पुष्पांजलि देकर प्रार्थना करे ।… Read More


॥ अथ राधा यंत्रावरण पूजनम् ॥ राधा यंत्र के निर्माण में प्रचलित तंत्रग्रंथों, राधारहस्य, राधातंत्रादि में अलग से कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है । परन्तु राधातंत्र कवचादि में वर्णित नायिकायें सहित तथा अन्य दृष्टान्तों के आधार पर राधायंत्र की परिकल्पना कर यंत्र की रचना की गई है । उक्त यंत्र पर राधा एवं कृष्ण दोनों… Read More


श्रीराधा-माधव यन्त्र श्रीराधिकाजी का यह यन्त्र राधिका-पंचदशी-यन्त्र कहलाता है । इसका राधाष्टमी (भाद्रपद शु० ८)-के दिन, दीपावली (कार्तिक अमावस्या)-या होलिका पर्व (फाल्गुन पूर्णिमा)-में ताम्र, स्वर्ण, रजत पत्रपर खुदवाकर अथवा भोजपत्रपर अष्टगन्ध से रचनाकर अभिषेक करना चाहिये । पंचगव्य, पंचामृत, गंगाजल अथवा यमुनाजल से स्नान कराने के पश्चात् रक्तवस्त्र या पीतवस्त्र पर यन्त्र को रखकर पंचोपचार,… Read More


॥ श्रीकृष्ण – दशाक्षर मन्त्र प्रयोगः ॥ दशाक्षर मन्त्र – “गोपीजन वल्लभाय स्वाहा ।” श्रीकृष्णमन्त्र – गोपीजनवल्लभाय स्वाहा — यह श्रीकृष्ण का दशाक्षर मन्त्र है । इससे दृष्टादृष्ट सभी प्रकार के फल प्राप्त होते हैं । ऐहिक और पारलौकिक दोनों ही शुभ फल प्राप्त होते हैं । इस मन्त्र के पहले ‘क्लीं’ बीज लगाकर ‘क्लीं… Read More


॥ श्रीकृष्ण – अष्टाक्षर मन्त्र ॥ 1. मन्त्रः- क्लीं हृषीकेशाय नमः । हृषिकेश-पद डेऽन्त नमोऽन्त काम-पूर्वक अष्टाक्षरो मनु प्रोक्त समस्त पुरुषार्थद – (बृहद् तन्त्रसार,  मन्त्र महोदधि) विनियोग- अस्य श्रीगोविन्दमन्त्रस्य त्रैलोक्यमोहनाख्य ऋषिर्गायत्री छन्दः त्रैलोक्यमोहनो देवताऽभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- श्रीगोविन्दमन्त्रस्य त्रैलोक्यमोहनाख्य ऋषये नमः शिरसि । गायत्री छन्दसे नमः मुखे । त्रैलोक्यमोहनो देवताय नमः हृदि । विनियोगाय… Read More