माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र १॰ यह साधना अर्द्ध-रात्रि में, पश्चिम-दिशा की ओर मुख कर, कुशासन के ऊपर रक्त-कम्बल तथा उसके ऊपर पीत रेशमी वस्त्र बिछाकर, उस पर बैठकर करनी चाहिए । पहले आचमन-पूर्वक आसन-शुद्धि-मन्त्र द्वारा आसन शुद्ध करे ।… Read More
लक्ष्मी-नारायण-वज्र-पञ्जर-कवच श्रीलक्ष्मी-नारायण-वज्र-पञ्जर-कवच ।।पूर्व-पीठिका-श्रीभैरव उवाच।। अधुना देवि ! वक्ष्यामि, लक्ष्मी-नारायणस्य ते । कवचं मन्त्र-गर्भं च, वज्र-पञ्जरकाख्यया ।।१ श्रीवज्र-पञ्जरं नाम, कवचं परमाद्भुतम । रहस्यं सर्व-देवानां, साधकानां विशेषतः ।।२ यं धृत्वा भगवान् देवः, प्रसीदति परः पुमान् । यस्य धारण-मात्रेण, ब्रह्मा लोक-पितामहः ।।३ ईश्वरोऽहं शिवो भीमो, वासवोऽपि दिवस्पतिः । सूर्यस्तेजो-निधिर्देवि ! चन्द्रमास्तारकेश्वरः ।।४ वायुश्च बलवांल्लोके, वरुणो यादसांपतिः । कुबेरोऽपि धनाध्यक्षो,… Read More
श्रीमहागणपति-वज्रपञ्जर-कवच श्रीमहागणपति-वज्रपञ्जर-कवच ॥ पूर्व-पीठिका-श्रीभैरव उवाच ॥ महा-देवि गणेशस्य, वरदस्य महात्मनः । कवचं ते प्रवक्ष्यामि, वज्र-पञ्जरकाभिधम् ॥ विनियोगः- अस्य श्रीमहा-गणपति-वज्र-पञ्जर-कवचस्य शऽरीभैरव ऋषिः, गायत्र्यं छन्दः, श्रीमहा-गणपतिः देवता, गं बीजं, ह्रीं शक्तिः, कुरु-कुरु कीलकं, वज्र-विद्यादि-सिद्धयर्थे महा-गणपति-वज्र-पञ्जर-कवच-पाठे-विनियोगः।… Read More
नवनाथ वन्दनाष्टकम् श्री नवनाथ वन्दनाष्टकम् वन्दे श्री आदिनाथं शिव गुरु मुदयाख्योमया युक्तमादौ । ब्राह्मण सत्यनाथं तदनु दनुकुलध्वंसि सन्तोषनाथम् ।।… Read More
नव-नाथ साम्प्रदायिक पूजा-विधान श्रीनव-नाथ साम्प्रदायिक पूजा-विधान यह पूजा किसी भी गुरुवार या पूर्णिमा को की जा सकती है। इसके लिए ‘वरुथिनी एकादशी, का दिन अत्यन्त शुभ है। इसी दिन भगवान् गोरखनाथ का जन्म हुआ था। पहले प्रातः शीघ्र उठकर स्नान करें। फिर बरगद, उदुम्बर व पीपल वृक्षों की उत्तर दिशा की १-१ डाली (८-९ इंच लम्बी) ले आएँ।… Read More
नाथजी बालाष्टक श्रीनाथजी बालाष्टक ॐ गुरुजी । प्रथमं सुमिरण गुरुजी का करलो हृदय में ज्ञान प्रकाशितं, श्री आदि योग युगादि ब्रह्म सवेते शिव शंकर, श्री बाले गोरक्ष चरण नमाम्यहम् । जियो जति गोरक्ष चरण प्रणाम्यहम् । ॐ गुरुजी । बालयति गुरु ब्रह्मज्ञानी घट ही में ज्योति प्रकाशितम् । उदत भानु हसंत कमला, श्री बाले गोरक्ष चरणं प्रणाम्यहम्… Read More
शाबर-मन्त्र-साधना में गुरु-तत्त्व शाबर-मन्त्र-साधना में गुरु-तत्त्व आदि-गुरु तो भगवान् सदाशिव ही हैं। उन्हीं के अवतार-स्वरुप ‘नव-नाथ’ ही ‘शाबर-मन्त्र-विज्ञान’ के प्रचारक लौकिक गुरु माने गये हैं। इन नाथों के सम्बन्ध में निम्न पद्यात्मक साहित्य का मनन अपेक्षित है। १॰ नव-नाथ-माला ‘आदि-नाथ’ महेश आकाश-रुप छाय रहे । ‘उदय-नाथ’ पार्वती पृथ्वी-रुप भाए हैं । ‘सत्य-नाथ’ ब्रह्मा जी जिनका है जल-रुप ।… Read More
श्री-बृहत्-महा-सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्रम् श्री-बृहत्-महा-सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्रम् ॥शिव उवाच॥ शृणु देवि! प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिका-स्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्र-प्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत् ॥ 1 ॥ न कवचं नार्गला तु, कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं नापि ध्यानं च, न न्यासो न च वाऽर्चनम् ॥ 2 ॥ कुञ्जिका-पाठ-मात्रेण, दुर्गा-पाठ-फलं लभेत्। अति गुह्यतरं देवि! देवानामपि दुर्लभम् ॥ 3 ॥ गोपनीयं प्रयत्नेन, स्वयोनिरिव पार्वति! मारणं मोहनं वश्यं, स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।… Read More
शाबर मन्त्र विज्ञान शाबर मन्त्र विज्ञान शाबर मन्त्रों का आशयः- स्व॰ वामन शिवराम आप्टे ने सन् १९४२ ई॰ में अपने ‘संस्कृत-कोष’ में ‘शाबर’ शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रकार दी है; ‘शब (व)-र-अण्-शाबरः, शावरः, शाबरी।’ अर्थ में ‘जंगली जाति’ या ‘पर्वतीय’ लोगों द्वारा बोली जानीवाली ‘भाषा’ बताया गया है। वह एक प्रकार का मन्त्र भी है, इसका वहाँ कोई… Read More
बन्दी-मोचन-मन्त्र-प्रयोग बन्दी-मोचन-मन्त्र-प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य बन्दी-मोचन-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीकण्व ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, श्रीबन्दी-देवी देवता, ह्रीं वीजं, हूं कीलकं, मम-बन्दी-मोचनार्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- श्रीकण्व ऋषये नमः शिरसि, त्रिष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीबन्दी-देवी देवतायै नमः हृदि, ह्रीं वीजाय नमः गुह्ये, हूं कीलकाय नमः नाभौ, मम-बन्दी-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे । मन्त्रः-… Read More