एक चमत्कारी प्रयोग यह प्रयोग सिद्ध साधक द्वारा बताया हुआ है । प्रयोग तो चमत्कारी है ही, मन्त्र का स्वरूप भी विचित्र है । मन्त्र व उसके प्रयोग की विधि इस प्रकार है- –… Read More


शत्रु-नाश के लिए विधिः- उक्त मन्त्र को ग्यारह हजार की सख्यां में जप कर सिद्ध कर लें । जब प्रयोग करना हो, तो रात्रि में श्मशान जाकर राई व सरसों के तेल से चिता में १०८ आहुतियाँ दे । यह प्रयोग तीन रात्रि करें ।… Read More


विद्वेषण का सफल-तम मन्त्र यह प्रयोग दो घनिष्ठ प्रेमियों के मध्य शत्रुता उत्पन्न कराता है । शान्तिक-पौष्टिक कर्मो को छोडकर शेष सभी कर्म, तन्त्र में, ‘अभि-चार’-कर्मो की श्रेणी में आते हैं । ‘विद्वेषण’ भी अभिचार-कर्म होने के कारण निन्दनीय माना गया है क्योकि ये कर्म लोक-हित में नहीं, अपितु स्वार्थ-सिद्धि में उपयोग किए जाते हैं,… Read More


श्रीहनुमत जंजीरा (१) “ॐ गुरु जी । हनुमान पेलवान । बारे बरस का जुवान, हाथ में गदा – मुख में पान । ज्याँ समरूँ, त्याँ आगेवान । लुवे की पेटी – वज्र का ताला, पापी पाखण्डी का मुँह काला । जती सति का बोल – बाला, हमेरा पण्ड की रक्षा करो श्रीबजरङ्गवाला । सबद साचा,… Read More