एक चमत्कारी प्रयोग एक चमत्कारी प्रयोग यह प्रयोग सिद्ध साधक द्वारा बताया हुआ है । प्रयोग तो चमत्कारी है ही, मन्त्र का स्वरूप भी विचित्र है । मन्त्र व उसके प्रयोग की विधि इस प्रकार है- –… Read More
शत्रु-नाश के लिए शत्रु-नाश के लिए विधिः- उक्त मन्त्र को ग्यारह हजार की सख्यां में जप कर सिद्ध कर लें । जब प्रयोग करना हो, तो रात्रि में श्मशान जाकर राई व सरसों के तेल से चिता में १०८ आहुतियाँ दे । यह प्रयोग तीन रात्रि करें ।… Read More
विद्वेषण का सफल-तम मन्त्र विद्वेषण का सफल-तम मन्त्र यह प्रयोग दो घनिष्ठ प्रेमियों के मध्य शत्रुता उत्पन्न कराता है । शान्तिक-पौष्टिक कर्मो को छोडकर शेष सभी कर्म, तन्त्र में, ‘अभि-चार’-कर्मो की श्रेणी में आते हैं । ‘विद्वेषण’ भी अभिचार-कर्म होने के कारण निन्दनीय माना गया है क्योकि ये कर्म लोक-हित में नहीं, अपितु स्वार्थ-सिद्धि में उपयोग किए जाते हैं,… Read More
स्वप्न में अङ्क ज्ञात होना स्वप्न में अङ्क ज्ञात होना मन्त्रः- “आजू-बाजू जाला बूना, पकड़ चोटी, धर पछाड़ । लाओ हरफ का मुद्दा ।।”… Read More
सुख समृद्धि पाने का मन्त्र सुख समृद्धि पाने का मन्त्र मन्त्र:- “जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं । सुख सम्पत्ति नानाविध पावहिं ।।”… Read More
शत्रु को मित्र बनाने का मन्त्र शत्रु को मित्र बनाने का मन्त्र मन्त्र:- “गरल सुधा रिपु करहिं मिताई । गोपद सिन्धु अनल सितलाई ।।”… Read More
विष नाशक मन्त्र विष नाशक मन्त्र मन्त्र:- “नाम प्रताप जान सिब नीको । कालकूट फल दान अभी को ।।”… Read More
वृष्टि कारक व रोगनाशक मन्त्र वृष्टि कारक व रोगनाशक मन्त्र मन्त्र:- “सोइ जल अनल संघाता । होइ जलद जग जीवनदाता ।।”… Read More
अपराध क्षमापन का मन्त्र अपराध क्षमापन का मन्त्र मन्त्र:- “अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता । छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता ।।”… Read More
श्रीहनुमत जंजीरा श्रीहनुमत जंजीरा (१) “ॐ गुरु जी । हनुमान पेलवान । बारे बरस का जुवान, हाथ में गदा – मुख में पान । ज्याँ समरूँ, त्याँ आगेवान । लुवे की पेटी – वज्र का ताला, पापी पाखण्डी का मुँह काला । जती सति का बोल – बाला, हमेरा पण्ड की रक्षा करो श्रीबजरङ्गवाला । सबद साचा,… Read More