कामाख्या देवी – मन्त्रः- “ॐ कामरु देश कामाख्या देवी, तहाँ बैठा इस्माइल जोगी । इस्माइल जोगी दिए चार पान । एक पान सों राती माती । दूजे पान सों विरह सँजोती । तीजे पान सों अंग मरोड़े । चौथे पान सों दोऊ कर जोड़े । चारों पान जो मेरे खाय, मेरे पास से कहूँ न… Read More


भैरव शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र ! हाजिर होके, तुम मेरा कारज करो तुरत । कमर विराज मस्तंगा लँगोट, घूँघर-माल । हाथ बिराज डमरु खप्पर त्रिशूल । मस्तक बिराज तिलक सिन्दूर । शीश बिराज जटा-जूट, गल बिराज नोद जनेऊ । ॐ नमो भैंरुनाथ, काली का पुत्र ! हाजिर होके तुम मेरा… Read More


सर्व-कार्य-सिद्धि-प्रद शाबर भैरव मन्त्र श्री काल-भैरव बटुक प्रयोग ॐ अस्य श्री वटुक-भैरव-स्तोत्रस्य सप्त-ऋषिः ऋषयः, मातृका छन्दः, श्रीवटुक-भैरो देवता, ममेप्सित-सिद्धयर्थ जपे विनियोगः । “ॐ काल-भैरौ, वटुक भैरौ, भूत-भैरौ ! महा-भैरव महा-भय-विनाशनं देवता-सर्व-सिद्धिर्भवेत् । शोक-दुःख-क्षय-करं निरञ्जनं, निराकारं नारायणं, भक्ति-पूर्ण त्वं महेशं । सर्व-काम-सिद्धिर्भवेत् । काल-भैरव, भूषण-वाहनं काल-हन्ता रुपं च, भैरव गुनी । महात्मनः योगिनां महा-देव-स्वरुपं । सर्व… Read More


हनुमत् ‘साबर’ मन्त्र प्रयोग ।। श्री पार्वत्युवाच ।। हनुमच्छावरं मन्त्रं, नित्य-नाथोदितं तथा । वद मे करुणा-सिन्धो ! सर्व-कर्म-फल-प्रदम् ।। ।। श्रीईश्वर उवाच ।। आञ्जनेयाख्यं मन्त्रं च, ह्यादि-नाथोदितं तथा । सर्व-प्रयोग-सिद्धिं च, तथाप्यत्यन्त-पावनम् ।। ।। मन्त्र ।। “ॐ ह्रीं यं ह्रीं राम-दूताय, रिपु-पुरी-दाहनाय अक्ष-कुक्षि-विदारणाय, अपरिमित-बल-पराक्रमाय, रावण-गिरि-वज्रायुधाय ह्रीं स्वाहा ।।” विधिः- ‘आञ्जनेय’ नामक उक्त मन्त्र का प्रयोग… Read More