आशु-फल-प्रद सिद्ध शाबर महा-लक्ष्मी मन्त्र आशु-फल-प्रद सिद्ध शाबर महा-लक्ष्मी मन्त्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीधन-प्रद-महा-लक्ष्मी-सिद्ध-शाबर-मन्त्रस्य श्रीविष्णु ऋषिः। अनुष्टुप छन्दः। श्रीमहा-लक्ष्मी देवता। श्रीं बीजं। ह्रीं शक्तिः। क्लीं कीलकं। मम सकल-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।… Read More
काल विकाल बाण प्रयोग बंगाल के सिद्ध मंत्र प्रयोग काल विकाल बाण प्रयोग इस प्रयोग को करते समय देवी घट स्थापन करें, उसमें देवी का आवाहन करें । कार्तिकेय, गणेश, शिव का पूजन भी करें । दिग्-रक्षण प्रयोग स्वयं का एवं अपने स्थान का करें, यदि अन्यत्र जाके प्रयोग कर रहे हैं तो साधक पहले अपने स्थान, परिवार व… Read More
घण्टाकर्ण कल्प ।। अथ घण्टाकर्ण कल्प ।। प्रस्तुत प्रयोग जैन साधक की संवत १६६१ की पाण्डुलिपि में से उद्धृत् है । प्रयोग शुभ मास, शुक्ल पक्ष तथा ५-१०-१५ तिथि सोम, बुध व गुरुवार में करें । रवि-पुष्य, हस्त व मूल नक्षत्र में हो या अन्य कोई “अमृत-सिद्धि-योग” बने तब प्रयोग करें । प्रयोग देवस्थान, नदी, तालाब के… Read More
सिद्ध वशीकरण मन्त्र सिद्ध वशीकरण मन्त्र १॰ “बारा राखौ, बरैनी, मूँह म राखौं कालिका। चण्डी म राखौं मोहिनी, भुजा म राखौं जोहनी। आगू म राखौं सिलेमान, पाछे म राखौं जमादार। जाँघे म राखौं लोहा के झार, पिण्डरी म राखौं सोखन वीर। उल्टन काया, पुल्टन वीर, हाँक देत हनुमन्ता छुटे। राजा राम के परे दोहाई, हनुमान के पीड़ा चौकी।… Read More
दूकान की बिक्री दूकान की बिक्री १॰ “श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दल निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नमः। लक्ष्मी माई, सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करो भलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई।” विधि- घर से नहा-धोकर दुकान पर जाकर अगर-बत्ती जलाकर उसी से लक्ष्मी जी के चित्र की आरती… Read More
पितृ-आकर्षण मन्त्र पितृ-आकर्षण मन्त्र (कभी-कभी पितृ-पीड़ा से मनुष्य का जीवन दुःख-मय हो जाता है। निर्धारित कार्यों में बाधा, विफलता की प्राप्ति होती है। आकस्मिक दुर्घटनाएँ घटती है। पूरा कुटुम्ब दुःखी रहता है। ऐसी दशा में निम्नलिखित ‘प्रयोग’ करे। यह ‘प्रयोग’ निर्दोष है। पितृ-पीड़ा हो या न हो, सभी प्रकार की बाधाएँ नष्ट हो जाती है और सुख-शान्ति… Read More
देवाकर्षण मन्त्र देवाकर्षण मन्त्र “ॐ नमो रुद्राय नमः। अनाथाय बल-वीर्य-पराक्रम प्रभव कपट-कपाट-कीट मार-मार हन-हन पथ स्वाहा।” विधिः- कभी-कभी ऐसा होता है कि पूजा-पाठ, भक्ति-योग से देवी-देवता साधक से सन्तुष्ट नहीं होते अथवा साधक बहुत कुछ करने पर भी अपेक्षित सुख-शान्ति नहीं पाता। इसके लिए यह ‘प्रयोग’ सिद्धि-दायक है।… Read More
हनुमान जी का शत्रु-नाशक मन्त्र हनुमान जी का शत्रु-नाशक मन्त्र “ॐ हनुमान वीर नमः। ॐ नमो वीर, हनुमत वीर, शूर वीर, धाय-धाय चलै वीर। मूठी भर चलावै तीर। मूठी मार, कलेजा काढ़ै। क्रोध करता, हियरा काढ़ै। मेरा वैरी, तेरे वश होवै। धर्म की दुहाई। राजा रामचन्द्र की दोहाई। मेरा वैरी न पछाड़ मारै तो माता अञ्जनी की दोहाई।”… Read More
बैरि-नाशक हनुमान ग्यारहवाँ बैरि-नाशक हनुमान ग्यारहवाँ विधिः- दूसरे से माँगे हुए मकान में, रक्षा-विधान, कलश-स्थापन, गणपत्यादि लोकपालों का पूजन कर हनुमान जी की प्रतिमा-प्रतिष्ठा करे। नित्य ११ या १२१ पाठ, ११ दिन तक करे। ‘प्रयोग’ भौमवार से प्रारम्भ करे। ‘प्रयोग’-कर्त्ता रक्त-वस्त्र धारण करे और किसी के साथ अन्न-जल न ग्रहण करे।… Read More
शाबर मन्त्र को जाग्रत करने की अनुभूत विधि शाबर मन्त्र को जाग्रत करने की अनुभूत विधि कभी ऐसा भी होता है कि उचित विधि से शाबर मन्त्र का प्रयोग करने के बाद भी साधना में सिद्धि नहीं मिलती। ऐसे समय शाबर मन्त्र को जाग्रत करने की आवश्यकता होती है। शाबर मन्त्र को जाग्रत करने की अनुभूत विधियाँ इस प्रकार हैः- १॰ एक अखण्ड… Read More